Gen-Z को आधुनिकता के साथ सनातन संस्कारों से जोड़ना भारत के उज्ज्वल भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता- सद्गुरु रितेश्वर महाराज
लखनऊ। लखनऊ स्थित सद्गुरु रितेश्वर महाराज की तपोस्थली श्री आनंदम धाम आश्रम में बुधवार को भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय राज्यमंत्री पंकज चौधरी, उत्तर प्रदेश सरकार के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक, माननीय रक्षा मंत्री के पुत्र एवं भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष नीरज सिंह, सांसद जगदंबिका पाल, महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव, एमएलसी आरती सिंह, कैबिनेट मंत्री एवं सांसद कुसुम राय, विधायक अनिल त्रिपाठी, पूर्व विधायक शैलेश कुमार सिंह उर्फ शैलू , अवध प्रांत के प्रांत प्रचारक कौशल किशोर, विभाग प्रचारक अनिल एवं भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष अर्चना मिश्रा सहित अनेक गणमान्यजन पहुंचे और सद्गुरु रितेश्वर महाराज का आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन प्राप्त किया।
इस अवसर पर सद्गुरु रितेश्वर महाराज ने सभी गणमान्यजनों को आशीर्वचन देते हुए कहा कि “आज की Gen-Z को सनातन संस्कृति और भारतीय संस्कारों से जोड़ना केवल हमारी संस्कृति के संरक्षण का विषय नहीं है, बल्कि यह भारत के भविष्य को मजबूत करने का संकल्प है। आधुनिक बनना आवश्यक है, नई तकनीक और नई सोच को अपनाना भी आवश्यक है, लेकिन अपनी जड़ों और अपनी संस्कृति को भूलकर आधुनिकता अधूरी है। जिस युवा की सोच में आधुनिकता के साथ सनातन के संस्कार, व्यवहार में भारतीय संस्कृति और हृदय में राष्ट्रहित होगा, वही आने वाले भारत का वास्तविक निर्माण करेगा।”
सद्गुरु रितेश्वर महाराज ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने अधिकारों की बात रखने और अपने हक के लिए आवाज उठाने का अधिकार है, लेकिन अधिकारों की लड़ाई भी हमारी संस्कृति, संस्कार, मर्यादा और सभ्यता के दायरे में रहकर लड़ी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब किसी व्यक्ति के विचार, व्यवहार और संघर्ष में सनातन संस्कृति की झलक दिखाई देती है, तो समाज का विश्वास उसके साथ स्वतः जुड़ने लगता है। संस्कारों से जुड़ा हुआ संघर्ष न केवल अधिक प्रभावी होता है, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन का आधार भी बनता है।
उन्होंने कहा कि सनातन हमें केवल परंपराओं से जोड़ने वाला विचार नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाली संस्कृति है। सनातन के मूल में सेवा, संयम, सत्य, कर्तव्य, समरसता और राष्ट्रहित जैसे मूल्य हैं। यदि इन मूल्यों को नई पीढ़ी के जीवन का हिस्सा बनाया जाए तो Gen-Z आधुनिक विश्व के साथ कदम से कदम मिलाकर चलते हुए भी अपनी भारतीय पहचान और गौरव को मजबूती से आगे ले जा सकती है।
सद्गुरु रितेश्वर महाराज ने कहा कि “हमारी आने वाली पीढ़ी को यह सिखाने की आवश्यकता है कि आधुनिकता और सनातन एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि दोनों का संतुलन ही भारत की वास्तविक शक्ति बन सकता है। जब युवा अपनी जड़ों से शक्ति लेकर भविष्य की ओर बढ़ता है, तो वह केवल अपने जीवन को नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की दिशा को भी बदलने की क्षमता रखता है।”
इस दौरान उपस्थित गणमान्यजनों ने सद्गुरु रितेश्वर महाराज के आशीर्वचनों को ध्यानपूर्वक सुना तथा सनातन संस्कृति, युवा पीढ़ी और राष्ट्र निर्माण से जुड़े उनके विचारों को प्रेरणादायी बताते हुए उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। श्री आनंदम धाम आश्रम का यह आध्यात्मिक एवं वैचारिक सान्निध्य उपस्थित सभी लोगों के लिए सकारात्मक ऊर्जा और नई प्रेरणा का अवसर रहा।


