नृत्य को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करना चाहिएः डॉ. बसंती रामचंद्रन
नृत्य में उपचार करने की शक्ति है, नृत्य शरीर और मन को स्वस्थ बनाता है
नई दिल्ली। इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (आईजीएनसीए) में बुधवार को एक अनूठी पुस्तक ‘इंडियन क्लासिकल डांसेजः द हीलिंग पावर’ का लोकार्पण किया गया। पुस्तक की लेखिका प्रसिद्ध भरतनाट्यम नृत्यांगना, गुरु और कोरियोग्राफर कनक सुधाकर हैं। लोकार्पण प्रसिद्ध नाट्य समीक्षक लीला वेंकटरमण, कलावती बाल अस्पताल की सेवानिवृत्त अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वसंती रामचंद्रन, प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना मौमला नायक और आईजीएनसीए के डीन (प्रशासन) व कला निधि प्रभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. रमेश चंद्र गौड़ ने किया।

इस अवसर पर लेखिका भी उपस्थित थीं। पुस्तक लोकार्पण के साथ ही, इस पर एक चर्चा सत्र का आयोजन भी किया गया और लेखिका तथा उनकी सहयोगी अपराजिता एवं अंजलि मुंजाल ने पुस्तक में वर्णित नृत्य के उपचारक गुणों को नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया।
लेखिका कनक सुधाकर ने बताया कि नृत्य में श्वसन की ऐसी तकनीकें होती हैं, जो फेफड़े और हृदय की क्षमता को बढ़ाती हैं। साथ ही, नृत्य की विभिन्न भंगिमाएं मांसपेशियों और तंत्रिका तंत्र की क्षमताओं में वृद्धि करती हैं। नृत्य के स्टेप्स एक्यूप्रेशर का काम भी करते हैं। उन्होंने कहा कि शरीर के स्वस्थ होने के लिए मस्तिष्क का स्वस्थ होना ज़रूरी है और नृत्य का अभिनय (भाव) पक्ष मस्तिष्क को स्वस्थ रखने में सहायता करता है। इसमें योग, आसन और करण हैं, जो संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभप्रद हैं।
पुस्तक का परिचय देते हुए प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना मौमला नायक ने कहा कि नृत्य की उपचारक शक्तियों के बारे में बताने के लिए लेखिका द्वारा भरतनाट्यम के व्याकरण को आधार बनाया गया है, लेकिन इसमें शास्त्रीय नृत्य के अन्य प्रारूपों का भी ध्यान रखा गया है। उन्होंने पुस्तक के प्रत्येक अध्याय की विषय-वस्तु पर संक्षेप में प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नृत्य एक जीवनदायी कला है
डॉ. बसंती रामचंद्रन ने कहा कि यह पुस्तक कुछ अलग और विशिष्ट है। नृत्य करना बहुत ज़रूरी है। बच्चों के नृत्य सीखने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए और इसे स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करना चाहिए। नृत्य मस्तिष्क को शक्ति प्रदान करता है, दबाव का सामना करना सिखाता है और तनाव को दूर करता है। किसी भी उम्र में नृत्य कर सकें, तो बहुत अच्छा है।
प्रसिद्ध नृत्य समीक्षक सुश्री लीला वेंकटरमण ने कुछ उदाहरणों के जरिये बताया कि नृत्य मस्तिष्क को आघातों को सहने और चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बनाता है। उन्होंने यह भी सलाह दी कि नृत्य गुरुओं को अपने शिष्यों को वैसे स्टेप्स भी बताने चाहिए, जो शरीर को संतुलित रखने में मदद करते हैं।
प्रो. रमेश चंद्र गौड़ ने इस अनूठी पुस्तक के लिए लेखिका कनक सुधाकर की सराहना की और उन्हें बधाई दी। प्रो. गौड़ ने कहा कि यह एक अनूठा कार्यक्रम था। उन्होंने कहा कि जनजातीय समुदायों और विभिन्न समाजों में विभिन्न तरह की हीलिंग प्रैक्टिस की जाती हैं, उन्हें सामने लाने और प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। उन्होंने लेखिका को यह भी सलाह दी कि इस पुस्तक को वीडियो बुक के रूप में लाना चाहिए। कार्यक्रम के अंत में, कला निधि विभाग के गोपाल ने वक्ताओं, अतिथियों और आगंतुकों को धन्यवाद ज्ञापित किया।


