डॉक्टरों ने जलजनित रोगों के बढ़ते मामलों के मद्देनज़र दूषित जल से बचाव संबंधी सावधानियां बरतने पर दिया जोर
नोएडा/ग्रेटर नोएडा: जनजनित रोगों के बढ़ते मामलों को देखते हुए, डॉक्टरों ने जनता को दूषित जल एवं भोजन संबंधी सावधानी बरतने की सलाह दी है। दूषित जल का सेवन करने से डायरिया,उल्टी,बुखार,पेट दर्द,पानी की कमी,जॉन्डिस,टायफायड,कॉलरा,हेपेटाइटिस ए एवं ई के अलावा एमीबियॉसिस जैसी स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
ऐसे रोगी अक्सर दस्त,उल्टी,कमजोरी महसूस होने,ऐंठन, कम पेशाब, मुंह सूखने और कुछ मामलों में आंखों एवं त्वचा में पीलेपन जैसी तकलीफ से भी ग्रस्त होते हैं। यदि ऐसे में उपचार न किया जाए, तो ये कंडीशंस तेजी से बिगड़ सकती हैं और जीवनघाती भी हो सकती हैं, खासतौर से बच्चों एवं बुजुर्गों तथा पहले से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों की हालत तेजी से बिगड़ सकती है।
डॉक्टरों का कहना है कि जलजनित रोगों से बचाव के लिए शरीर में पानी की कमी (डीहाइड्रेशन) नहीं होने दें। शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा सुनिश्चित करने के लिए, ओआरएस घोल, नारियल पानी, नींबू शिकंजी और सुरक्षित पेयजल का सेवन करते रहें। मरीजों को आसानी से पचने वाला भोजन जैसे खिचड़ी, कर्ड राइस, और केले खाने की सलाह दी जाती है, तथा स्ट्रीट फूड या बिना ढके भोज्य पदार्थों का सेवन करने से बचना चाहिए। इसके अलावा, उन्हें केवल उबला हुआ या सही तरीके से फिल्टर किए गए पानी को ही पीने के लिए इस्तेमाल करना चाहिए।
डॉ अभिषेक दीपक, सीनियर कंसल्टेंट – गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी, फोर्टिस हॉस्पीटल ग्रेटर नोएडा ने कहा, “जलजनित रोगों के शुरुआती लक्षणों को नजरंदाज करने पर ये रोग तेजी से बढ़ सकते हैं। लगातार डायरिया की शिकायत बनी रहने, उल्टी और तेजी बुखार या पेशाब की कम मात्रा ऐसे लक्षण हैं जिनकी ओर तत्काल ध्यान देना और मेडिकल सहायता लेना जरूरी होता है।”
डॉ अभिषेक दीपक ने बचाव के निम्न उपायों को अपनाने की सलाह दी हैः
बचाव के लिए, हाइजिन संबंधी अच्छी आदतें अपनाएं जैसे नियमित रूप से हाथों को धोएं, ताजा पकाया हुआ और ढके हुए भोजन, स्वच्छ पेयजल का ही इस्तेमाल करें। यदि जरूरी हो तो नियमित रूप से टीकाकरण (वैक्सीनेशन) करवाएं।
यदि किसी को लगातार डायरिया की शिकायत है, बार-बार उल्टियां हो रही हैं, तेजी बुखार और काफी कमजोरी महसूस होती है, पेशाब की कम मात्रा या आंखों एवं त्वचा में पीलापन दिखायी दे, तो तुरंत मेडिकल परामर्श लें।
शरीर में पानी की कमी न होने दें, और तत्काल उपचार लें जिससे जटिलताएं पैदा नहीं होंगी और लोगों का जीवन बचाया जा सकेगा।


