केंद्र सरकार की नई नीति से छोटे किसानों, श्रमिकों और खांडसारी उद्योग पर संकट निश्चित

केंद्र सरकार की नई नीति से छोटे किसानों, श्रमिकों और खांडसारी उद्योग पर संकट निश्चित

नई दिल्ली:  उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में स्थित खांडसारी उद्योग जो एक लघु उद्योग की श्रेणी में आता है सदियों से स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। भारतीय चीनी और जैव-ऊर्जा निर्माता संघ की मांग ने खांडसारी इकाइयों से जुड़े व्यापारियों की नींद उड़ा दी है। संपूर्ण भारत में इस उद्योग द्वारा ख़रीदे जाने वाला गन्ना मिलों के मुक़ाबले 2 से 3 प्रतिशत हीं है। यह उद्योग बहुत हद तक मानव श्रम पर आधारित है और पारंपरिक लघु कुटीर उद्योग के रूप में कार्य करता है, जो खांडसारी राब और खांडसारी शक्कर और खांडसारी सीरा जैसे उत्पादों का उत्पादन करता है।गौरतलब हो की खांडसारी उद्योग का संचालन उत्तर प्रदेश में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रदत्त खांडसारी लाइसेंस आदेश 1967 के तहत किया जाता है। यह उद्योग विशेष रूप से उन छोटे और सीमांत किसानों के लिए फायदेमंद साबित हुआ है। 2019 में उत्तर प्रदेश सरकार इस उद्योग के लिए समय समय पर प्रोत्साहन नीति भी लाती रहती है।

विदित हो कि सरकार द्वारा जारी शुगर कंट्रोल संबंधी पत्र 22 अगस्त 2024 के माध्यम से खांडसारी सुगर को भी सुगर की परिभाषा में सम्मिलित किए जाने के संबंध में राज्य सरकारो और सुगर मिल एसोसिएशन आदि से 23 सितंबर 2024 तक सुझाव माँगे गए हैं जब कि खांडसारी उद्योग से कोई सुझाव नहीं माँगे गए। 

सरकार शुगर कंट्रोल ऑर्डर 2024 लागू करने जा रही है इसी संबंध में उत्तर प्रदेश खांडसारी मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन की टीम जगदीश प्रसाद गुप्ता के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्री पहलाद जोशी से मिली और एक पत्र के माध्यम से खांडसारी उद्योग को इससे बाहर रखने की मांग की गई। साथ अन्य मांगो से भी अवगत कराया।

खांडसारी उद्योग सीमांत क्षेत्रों से आता है, चीनी मिलों के द्वारा (वैक्यूम पेन) के साथ आटोमैटिक मशीनों से निर्मित किया जाता है,जिस कारण उत्पादन क्षमता  25-30% कम रहती है।  चीनी मिलों को गन्ना किसानों का एरिया रिज़र्वेशन सुनिश्चित होता वही गन्ना खांडसारी के लिए भी निश्चित होना चाहिए।

खांडसारी छोटे किसानों को अगली बुवाई के लिए  नक़द भुगतान  कराता है,वही गन्ना किसानों को भुगतान समय पर नहीं मिलता।
 चीनी मिलों के द्वारा विविध  एथनॉल, बायो गैस एवं पावर जनरेशन इत्यादि का उत्पादन करता है जबकि खांडसारी उद्योग सीमित संसाधनों के कारण अन्य उत्पादों का उत्पादन करने में सक्षम नहीं हैं।एसोसियेशन की मांग है खांडसारी उद्योग को यदि चीनी मिलों के साथ जोड़ दिया जाता है तो  निश्चित ही खांडसारी उद्योग बंद हो जाएगा,छोटे किसानों को भरी नुकसान होगा।

संक्षिप्त में उपरोक्त कारणों की वजहों से विगत 57 वर्षों से खांडसारी उद्योग उत्तर प्रदेश खांडसारी मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंसिंग अधिनियम के अंतर्गत नियंत्रित है और चीनी मिलों का नियंत्रण भी विगत 58 वर्षों से भारत सरकार के द्वारा नियंत्रित है दोनों अलग अलग नियंत्रित है।