बदलते मौसम में बाहर का खाना बिगाड़ रहा सेहत

बदलते मौसम में बाहर का खाना बिगाड़ रहा सेहत

मौसम परिवर्तन के बाद लोग संक्रामक बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। डायरिया और पेट संबंधित मरीज भी तेजी से बढ़े हैं। फेलिक्स हॉस्पिटल के गेस्ट्रोइंटोरोलॉजिस्ट डॉ. संचित सिंह का कहना है कि इस बढ़ते-घटते तापमान के बीच पेट की समस्याएं काफी बढ़ जाती हैं। ऐसे मौसम में उल्टी, दस्त, कब्ज और पेट दर्द की भी समस्या परेशान करने लगती है। जो वायरस और बैक्टीरिया सांस के रास्ते से संक्रमण करते हैं, वे पाचन तंत्र को भी प्रभावित करते हैं और कुछ लोगों में डायरिया की आशंका बढ़ जाती है। 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चे संक्रमण की चपेट में जल्दी आते हैं, क्योंकि उनका पाचन तंत्र कमजोर होता है। यह मौसम सबसे ज्यादा पाचन को प्रभावित करता है। पानी और वातावरण में नमी बैक्टीरिया, फंगस-वायरस के लिए अनुकूल स्थिति बनाते हैं। जिससे थोड़ी सी भी गंदगी और खान-पान में छोटी सी गलती आपके पेट को खराब करने का काम कर सकती है। इस कारण पेट खराब होता हैं। इसमें पेट दर्द, पेट में गैस, ऐंठन, दस्त, कब्ज और उल्टी आती है। इन दिनों गैस्ट्रो व पेट के मरीजों को भर्ती किया जा रहा है बरसात का मौसम होने के कारण पानी जगह-जगह दूषित होने लगता है। इससे तमाम तरह के रोग फैलने लगते हैं। जिसमें डायरिया गैस्ट्रो प्रमुख है। इसके बचने के लिए लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। बारिश के मौसम में दूध, दही, पनीर, छाछ आदि डेयरी प्रोडक्ट्स न खाने की सलाह दी जाती है। इस मौसम में पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है, ऐसे में डेयरी प्रोडक्ट्स आसानी से डाइजेस्ट नहीं हो पाता है। इसके सेवन से कफ से जुड़ी समस्याएं बढ़ने का रिस्क बढ़ जाता है। इस कारण मॉनसून में डेयरी प्रोडक्ट न लेने की सलाह दी जाती है। हालांकि, दूध अगर पीना भी है तो हल्का गर्म और हल्दी डालकर ही पीएं। फास्ट फूड जैसे टिक्की, गोलगप्पे, चाट, पकौड़े, समोसे वगैरह भी नहीं खाने चाहिए। यह ऑयली होने की वजह से ये चीजें भारी होती हैं और पेट के लिए तमाम परेशानियां पैदा करती हैं। इसके बजाए मौसम में करेला, नीम, लौकी, हल्दी, मेथी, राई या सरसों, काली मिर्च, लौंग, अदरक आदि को अपनी डाइट में शामिल करें। पेट संबंधित बीमारियों से बचाव के लिए जरूरी है कि लोग घर में ताजा खाना खाएं। खाना पकाने से पहले, परोसने से पहले और खाना खाने के पहले हाथ अवश्य धोएं। ज़्यादा परेशानी होने पर डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।

लक्षण-

-गैस बनना 

-लूज मोशन

-जी मिचलाना 

-सीने पर जलन 

-पेट में मरोड़ आना 

-कुछ खाते ही पेट फूल जाना


इन बातों का रखे ध्यान-

-गुनगना पानी पीए। 

-बाहर की चीजें न खाए। 

-लोग बाहर भीगने से बचे।

-पेट दर्द और उल्टी होने पर डॉक्टर से परामर्श ले।

-बाजार के कटे-फटे फलों को ना खाएं ताजा भोजन का सेवन करें।