संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में हरनंदी महानगर द्वारा ‘प्रमुख जन गोष्ठी’ का दूसरा भव्य आयोजन संपन्न

संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में हरनंदी महानगर द्वारा ‘प्रमुख जन गोष्ठी’ का दूसरा भव्य आयोजन संपन्न

प्रताप विहार (गाजियाबाद); राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित विविध कार्यक्रमों की श्रृंखला के अंतर्गत आज, दिनांक 29 मार्च 2026 को हरनंदी महानगर (गाजियाबाद) द्वारा प्रतापविहार स्थित लीलावती पब्लिक स्कूल में ‘प्रमुख जन गोष्ठी’ का भव्य एवं सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में समाज के विभिन्न क्षेत्रों से आए गणमान्य नागरिकों की उल्लेखनीय उपस्थिति एवं सक्रिय सहभागिता रही।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में क्षेत्र प्रचार प्रमुख (पश्चिमी उत्तर प्रदेश) पद्म जी तथा मुख्य वक्ता के रूप में मेरठ प्रांत कार्यवाह श्री शिवकुमार जी की गरिमामयी उपस्थिति रही।

संघ का विकास और ऐतिहासिक संघर्ष

मुख्य वक्ता शिवकुमार ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में भारत के गौरवशाली इतिहास, उसकी सांस्कृतिक विरासत एवं दीर्घकालीन संघर्षों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि एक लंबे समय तक गुलामी के चलते अपने समाज में जी विषंगति आई है आज संघ उन्ही को दूर कर समाज को पुनः एक सज्जन और एक जुट बनाने के प्रयास कर रहा है। शिवकुमार जी ने समय परिस्थिति के उद्धरण से अपने विषय को रखा । 

संघ की स्थापना की पृष्ठभूमि को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि डॉ. हेडगेवार जी जन्मजात राष्ट्रभक्त थे। तत्कालीन परिस्थितियों तथा उस समय प्रचलित विचारधाराओं से असंतुष्ट होकर उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे सशक्त राष्ट्रभक्त संगठन की स्थापना की। भारत केवल भौतिक संपदा में ही नहीं, बल्कि ज्ञान, विज्ञान और संस्कृति के क्षेत्र में भी विश्व में अग्रणी रहा है। हमारे समाज में वीरता और क्षमता की कोई कमी नहीं थी, परंतु सामूहिक रूप से कार्य करने की पद्धति के अभाव एवं आत्मगौरव के विस्मरण के कारण हम पिछड़ गए।

उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ‘व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण’ की एक अखंड एवं सतत यात्रा है, जिसमें संगठनात्मक कार्यपद्धति, सामूहिक निर्णय और स्वावलंबन के मूल्यों को विकसित किया जाता है। संघ समाज के प्रत्येक वर्ग को साथ लेकर एक सशक्त, संगठित एवं आत्मनिर्भर राष्ट्र के निर्माण हेतु निरंतर कार्य कर रहा है।

समाज और नागरिक कर्तव्य
मुख्य अतिथि पद्म ने अपने उद्बोधन में वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों, चुनौतियों तथा उनके समाधान में प्रत्येक नागरिक की भूमिका पर सारगर्भित मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने विशेष रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर प्रकाश डाला :-

नागरिक निर्माण : संघ का मूल कार्य ऐसे चरित्रवान, सजग एवं उत्तरदायी नागरिकों का निर्माण करना है, जो समाज के प्रत्येक वर्ग को साथ लेकर समस्याओं के समाधान हेतु सक्रिय भूमिका निभा सकें।
संगठन की शक्ति : संघ कोई अमूर्त इकाई नहीं, बल्कि स्वयंसेवकों द्वारा संचालित जीवंत संगठन है। स्वयंसेवक ही संघ के कार्य को गति देते हैं, जबकि संघ समय-समय पर उन्हें दिशा और मार्गदर्शन प्रदान करता है।
संस्कार युक्त शिक्षा : शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं होना चाहिए, बल्कि वह संस्कारयुक्त, चरित्रनिर्माणकारी एवं आजीविका प्रदान करने वाली होनी चाहिए।
सामाजिक समरसता : समाज को जातिवाद, भाषावाद, क्षेत्रवाद एवं प्रांतवाद जैसी संकीर्णताओं से ऊपर उठकर एकात्म भाव से कार्य करना होगा। हम सभी भारत माता की संतान हैं और परस्पर भाई-बहन हैं।
• पारिवारिक एवं व्यक्तिगत उत्तरदायित्व : समाज की कुरीतियों को समाप्त करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति और परिवार को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्होंने शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग एवं प्राणायाम के महत्व पर बल देते हुए अभिभावकों से आग्रह किया कि वे बच्चों के संस्कारों के प्रति सजग रहें।
सनातन परंपरा का महत्व : सनातन संस्कृति ही वह आधार है, जो ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ के भाव के साथ सम्पूर्ण विश्व के कल्याण की भावना को पोषित करती है ।  अपने वक्तव्य में रामायण और महाभारत के समय के उल्लेख कर उद्धरण दिए जो आज भी प्रेरणादायी है । 

कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह 10:00 बजे हुआ तथा समापन दोपहर 12:00 बजे हुआ। कार्यक्रम में क्षेत्र के 300 से अधिक प्रबुद्ध जनों के साथ मातृशक्ति की भी सक्रिय सहभागिता रही। संपूर्ण आयोजन अनुशासित, गरिमामय एवं प्रेरणादायी वातावरण में संपन्न हुआ।

इस अवसर पर हरनंदी महानगर के संघचालक प्रदीप एव सह संघचालक जितेंद्र , महानगर कार्यवाह अमरदीप, सह-कार्यवाह सर्वेश सहित संघ के 100 से अधिक कार्यकर्ता व्यवस्था में उपस्थित रहे।