भारत में हियरेबल्स और वियरेबल्स उद्योग को 2025-26 तक होगी 5 गुना अधिक वर्कफोर्स की जरूरत: ईएसएससीआई रिपोर्ट
ईएसएससीआई ने हियरेबल्स और वियरेबल्स उद्योग के लिए कराया है स्किल गैप स्टडी
स्किल गैप स्टडी से हियरेबल्स और वियरेबल्स उद्योग में तेजी से विकास की संभावना का लगा है पता
नोएडा: कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय के अंतगर्त कार्यरत इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर स्किल्स काउंसिल ऑफ इंडिया (ईएसएससीआई) ने हियरेबल्स और वियरेबल्स उद्योग के लिए एक स्किल गैप स्टडी कराई है। स्टडी में खुलासा हुआ है कि 2025-26 तक इस क्षेत्र में मौजूद 50,000 स्किल्ड वर्कफोर्स की जरूरत होगी, जो मौजूदा वर्कफोर्स का करीब पांच गुना अधिक है। अभी इस इंडस्ट्री का एक बड़ा हिस्सा केवल हियरेबल्स यानी सुनने वाले सेगमेंट पर निर्भर है। इसी हिस्से से इस इंडस्ट्री की हिस्सेदारी करीब एक बिलियन डॉलर है। रिपोर्ट में बताया गया है कि यह इंडस्ट्री तेजी से बढ़ रही है और इसमें बहुत संभावनाएं है। बता दें कि हियरेबल्स किसी भी ऑडियो डिवाइस को कहा जाता है, जिसे आमतौर पर कान में लगाया जाता है, जबकि वियरेबल्स में कलाई घड़ियां, फिटनेस बैंड और ऐसे अन्य डिवाइस शामिल होते हैं।
स्टडी के मुताबिक, देश के अंदर स्मार्टवॉच कैटेगरी का निर्माण तेजी से बढ़ रहा है और 2020 के मुकाबले 2021 में वैश्विक शिपमेंट में इजाफा हुआ है और भारत सरकार के विज़न दस्तावेज़ के अनुसार वर्ष 2025-26 तक हियरेबल्स और वियरेबल्स मैन्यूफैक्चरिंग करीब आठ बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है। जिसमें करीब 2.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निर्यात का लक्ष्य है और शेष भारतीय बाजार की जरूरतों को पूरा करेगा। इसलिए इस क्षेत्र में विकास की बहुत संभावनाएं है।
कोविड-19 के बाद से वर्क फ्रॉम होम और ओटीटी प्लेटमफॉर्म के बढ़ने के कारण इस क्षेत्र में मांग बढ़ी है। इस क्षेत्र में कार्यरत वर्तमान जनशक्ति काफी कम है और स्थायी और अनुबंध दोनों आधार पर विभिन्न भूमिकाओं में 10,000 से भी कम कर्मचारी कार्यरत हैं। सेल्स और मार्केटिंग इस इंडस्ट्री के लिए प्रमुख है। जैसे-जैसे इस क्षेत्र में मैन्युफैक्चरिंग बढ़ेगी, वैसे-वैसे स्किल्ड वर्कफोर्स की जरूरत बढ़ती जाएगी।
ईएसएससीआई के अध्यक्ष अमृत मनवानी ने कहा कि भारत में हियरेबल्स और वियरेबल्स इंडस्ट्री में विकास की जबरदस्त संभावनाएं है। यह क्षेत्र भारत के आर्थिक विकास में सहायक बन सकता है। ईएसएससीआई उच्च गुणवत्ता वाले प्रशिक्षण और कौशल विकास कार्यक्रमों के जरिये इस इंडस्ट्री को सपोर्ट कर रहा है। ताकि युवाओं के लिए एक करियर का अवसर पैदा हो।
ईएसएससीआई की चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर डॉ. अभिलाषा गौड़ ने स्किल गैप स्टडी के महत्व और आने वाले वर्ष में भविष्य की नौकरी भूमिकाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इस स्टडी से स्किल गैप को पूर्ति करने में मदद मिलेगी और युवाओं को इंडस्ट्री के जरूरत अनुसार ट्रेनिंग देकर उन्हें वर्क फ्लोर पर काम करने के लायक बनाया जा सकेगा।
इस उद्योग के लिए जरूरी स्किल में क्वालिटी कंट्रोल, कंप्यूटर हार्डवेयर/सॉफ्टवेयर का बुनियादी ज्ञान, तकनीकी ज्ञान (इलेक्ट्रॉनिक्स/इलेक्ट्रिकल) और डेटा एनालिटिक्स शामिल हैं, जबकि सॉफ्ट स्किल में संचार कौशल, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट, आदि शामिल हैं।


