अमरनाथ से भयावह और खौफनाक मंजर के बीच से प्रेरक दास्तान
सिक्स सिगमा हेल्थ केयर के डायरेक्टर प्रदीप भारद्वाज ने बताया कि मैं कोई धर्म गुरु नहीं हूं। पिछले 22 साल से देश के शीर्ष अस्पतालों में मेडिकल सूपरिंटेंडेंट / सीईओ रहा हूँ! अमरनाथ में तांडव मचा रहा रहे सैलाब से सच्ची घटना को आपके साथ शेयर कर रहा हुए…कर्म पर विश्वास रखो और ईश्वर पर आस्था, कितना भी मुश्किल समय हो जरूर निकलेगा रास्ता!

प्रदीप भारद्वाज ने बताया कि अमरनाथ गुफा के पास शुक्रवार शाम 5 बजकर 30 मिनट पर बादल फटा जिस समय बादल फटा, उस समय गुफा के पास 10 - 15 हजार श्रद्धालु मौजूद थे। अमरनाथ के सैलाब में जो विजिबल थे, वो आज इनविजिबल हो गए हैं। जलजले में बड़ी-बड़ी चट्टानें बह रही थीं। कई कैंप तबाह हों गए। बादल फटा और सब तबाह हो गया.. मलबा, मौत, मातम, मन्नत और मदद कि दास्तान।

देवाधिदेव महादेव ने हमें खरोंच तक ना आने दी। अमरनाथ में ये वही स्थान है जिसमें सारी सिक्स सिग्मा टीम रहती थी…यहीं हम मेडिकल सेवा दे रहे थे…ज़रा सोचो और एक बार केवल कल्पना कीजिए की अगर हम यहाँ होते तो क्या होता ?
कुछ समय के लिए मेरा इस जगह से जाने का निर्णय शायद महादेव का ही निर्णय था… उसने हमको बचाना था…हम गुफा के सबसे नज़दीक थे, हमारा सब कुछ बह गया, पर महादेव ने हमें खरोंच तक ना आने दी।

महादेव तभी तो मैं कहता हूँ, कोई है…कहीं कोई शक्ति ज़रूर है? जो हमसे ये सब करवा रही है! ये आस्था अटूट – अडिग व दृढ़ विश्वास पैदा करती है ! दिन चाहे सुख के हों या दुःख के, भगवान अपने बन्दों के साथ हमेशा रहते हैं
सर्वशक्तिमान पर अटूट विश्वास बड़ी ही शानदार चीज़ है। कर्म पर विश्वास रखो और ईश्वर पर आस्था कितना भी मुश्किल समय हो जरूर निकलेगा रास्ता! सच में आस्था विश्वास है, पौरूष दर्पण है, भाग्य उसका प्रतिबिम्ब।


सिक्स सिग्मा हेल्थकेयर काँ जन्म 2013 त्रासदी से हुआ और फिर सभी शिव यात्राओं में मेडिकल सेवा का जूनुन सिर चढ़ कर ऐसा बोला की हमने मानव सेवा - समर्पण और पराक्रम की मिशाल पेश कर दी !
ये साक्षात उदाहरण हैं जिसमें आस्था, कर्म, नीति, चरित्र, भक्ति और अध्यात्म की महिमा प्रमाणित हो जाती है। आस्था हमेशा भक्त के चित्त और मन में होती है, वरना कमी निकालने वालों को तो परमात्मा में भी कमी नजर आती है !
विषम परिस्थितियों में भी आज हम अपने कर्तव्य पथ पर अडिग हैं..दे रहे हैं मेडिकल सेवा- कभी भी - कहीं भी - हर मौसम में - हर पहाड़ पर - ना कोई दान - ना कोई दर्शन की अभिलाषा - फिर काम कर रहे हैं महान !
*भारत की प्राचीन गौरवशाली परंपरा के प्रति समर्पण भाव के साथ-साथ सिक्स सिग्मा* ने उत्तम स्वास्थ्य सेवा, सत्य, साहस, समर्पण और पराक्रम से देश के विकास में चार चांद लगाए और कन्धे से कन्धा मिलाकर अद्म्य साहस का परिचय दिया।


