कृष्ण! तेरी यमुना कब स्वच्छ होगी? दिल्ली में

कृष्ण! तेरी यमुना कब स्वच्छ होगी? दिल्ली में

हरेश उपाध्याय

दिल्ली: राम तेरी गंगा मैली हो गई।पापियों के पाप धोते- धोते।कृष्ण तेरी भी यमुना मैली हो गई है? दिल्ली के राजनीतिज्ञों/लोगों के पाप धोते-धोते।राजधानी के सियासत के सूरमाओं ने करोड़ों रुपए खर्च कर दिए और खूब फोटो खिंचवाये,लेकिन यमुना का प्रदूषण कम होने के बजाय 5 वर्ष में बढ़ता ही गया। अब गौर फरमाइएगा। वजीराबाद में बीओडी (जैविक आक्सीजन मांग) तकरीबन तीन मिलीग्राम प्रति लीटर से बढ़ कर 9 मिलीग्राम प्रति लीटर हो गया। आईएसबीटी पुल पर बीओडी 30 मिलीग्राम प्रति लीटर हो गया। गौरतलब है कि दिल्ली सरकार ने भले ही 2025 तक यमुना नदी का पानी नहाने लायक बनाने का वायदा किया हो,लेकिन पर्यावरण विभाग की रिपोर्ट के अनुसार पिछले पांच साल में 2017 के बाद यमुना में प्रदूषण का लेवल और बढ़ गया है।रिपोर्ट के अनुसार पल्ला को छोड़ कर राष्ट्रीय राजधानी में प्रत्येक स्थान पर बीओडी का सालाना औसत स्तर बढ़ गया है।बीओडी पानी की गुणवत्ता मापने का एक महत्वपूर्ण मानक है।यदि बीओडी का स्तर तीन मिलीग्राम से कम हो तो उसे अच्छा माना जाता है और साथ ही घुलित आक्सीजन (डीओ) की मात्रा 5 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक हो तो यमुना का पानी नहाने लायक माना जाता है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पल्ला,वजीराबाद और आईएसबीटी पुल,आईटीओ पुल,निजामुद्दीन पुल, ओखला बैराज व असगरपुर में यमुना नदी के पानी के नमूने एकत्र करता है। ज्ञातव्य हो कि यमुना दिल्ली में पल्ला से ही प्रवेश करती है। बोर्ड के अनुसार पिछले पांच साल में पल्ला में बीओडी के स्तर में कोई खास बदलाव नहीं हुआ है।लेकिन वजीराबाद में बीओडी तीन से बढ़ कर नौ मिलीग्राम प्रति लीटर हो गया है और आईएसबीटी पुल पर बीओडी 30 मिलीग्राम से बढ़ कर 50मिलीग्राम प्रति लीटर तथा आईटीओ पुल पर बीओडी 22 से 55 मिलीग्राम प्रति लीटर हो गया है। क्यों कृष्ण तेरी भी यमुना मैली हो गई, दिल्ली के पापियों के पाप धोते-धोते ?