एमिटी विश्वविद्यालय में मनाया गया राष्ट्रीय विज्ञान दिवस
भारतीय वैज्ञानिक सर चंद्रशेखर वेंकट रमन के सम्मान में और भारतीय वैज्ञानिकों की उपलब्धियों का उत्सव मनाने के साथ युवाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए आज एमिटी विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया गया। इस कार्यक्रम का थीम ‘‘विकसित भारत के लिए विज्ञान और नवाचार में वैश्विक नेतृत्व के लिए भारतीय युवाओं को सशक्त बनाना’’ है। इस कार्यक्रम का शुभारंभ भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के उपाध्यक्ष (इंटरनेशनल अफेयरस) के डा एन के मेहरा, भारत सरकार के इलेक्ट्रानिक्स ओर सूचना मंत्रालय के राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र की उप महानिदेशक डा सीमा खन्ना, डीआरडीओ के एसएसपीएल के वैज्ञानिक डा शीतल गर्ग और एमिटी विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर डा बलविंदर शुक्ला द्वारा किया गया।
इस कार्यक्रम का शुभारंभ भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के उपाध्यक्ष (इंटरनेशनल अफेयरस) के डा एन के मेहरा ने कहा कि आज का यह राष्ट्रीय विज्ञान दिवस आने वाली पीढ़ीयों को आशा व प्रेरणा प्रदान करते हुए चुनौतियों से निपटने के अनुसंधान व नवाचार के लिए प्रोत्साहित भी करता है। अगले पचास वर्षों में मानव जीवन को स्वच्छ ऊर्जा, जल, खाद्य और पोषण सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण प्रदूषण, जनसंख्या और कई अन्य चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। शोध शिक्षा को मजबूत करना, नवाचार और स्टार्ट-अप को प्रोत्साहित करना, कौशल अंतर को पाटना, स्थिरता और समावेशिता पर मजबूत ध्यान और युवा नेतृत्व को बढ़ावा देना कुछ ऐसे तरीके हैं जिनसे भारत 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बन सकता है। उन्होंने छात्रों से नए दृष्टिकोण आजमाने, बड़ा सोचने और असफलताओं से कभी न डरने का आह्वान किया।
भारत सरकार के इलेक्ट्रानिक्स ओर सूचना मंत्रालय के राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र की उप महानिदेशक डा सीमा खन्ना ने कहा कि छात्रों को जीवन में जो कुछ भी करना है, उसके प्रति जुनूनी होना चाहिए और उसमें अपना दिल और आत्मा लगा देना चाहिए। युवा शक्ति परिवर्तन का एजेंट और लाभार्थी है और छात्र बेहद भाग्यशाली हैं कि वे एक ऐसी दुनिया देख रहे हैं जो विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारी प्रगति के साथ तेजी से विकसित हो रही है। हर कोई टॉपर नहीं होता, लेकिन छात्रों को खुद पर विश्वास करना चाहिए और अपने सपनों का पीछा करना चाहिए। एआई और साइबर सुरक्षा दो ऐसे क्षेत्र हैं जो युवा उज्ज्वल दिमागों के लिए एक आशाजनक भविष्य रखते हैं क्योंकि ये दोनों क्षेत्र दुनिया को तेज गति से बदल रहे हैं।
डीआरडीओ के एसएसपीएल के वैज्ञानिक डा शीतल गर्ग ने कहा कि विज्ञान हमें जलवायु परिवर्तन, गरीबी और असमानता जैसी जटिल चुनौतियों को समझने और उनका समाधान करने तथा वास्तविक दुनिया की समस्याओं को हल करने में मदद करता है। ज्ञान प्राप्त करने से एक विचार विकसित होता है जो नवाचार का रूप ले लेता है। नवाचार केवल नई रचना नहीं है बल्कि आत्मनिर्भरता और रचनात्मकता की विरासत है। नवाचार का व्यावसायीकरण अर्थव्यवस्था में योगदान देता है और राष्ट्रों की संपत्ति बढ़ाता है। विज्ञान केवल एक पेशा नहीं है, यह समस्याओं को हल करने, जीवन को बेहतर बनाने और हमारे राष्ट्र को मजबूत करने का एक मिशन है।
एमिटी विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर डा बलविंदर शुक्ला ने कहा कि राष्ट्रीय विज्ञान दिवस हर साल 28 फरवरी को भारतीय वैज्ञानिक सर चंद्रशेखर वेंकट रमन द्वारा फोटॉन के बिखराव की घटना की खोज को चिह्नित करने के लिए मनाया जाता है, जिसे बाद में रमन प्रभाव के रूप में जाना जाता है। एमिटी यूनिवर्सिटी अनुसंधान और नवाचार पर जोर देती है और विज्ञान के बिना कोई नवाचार नहीं हो सकता है। विज्ञान हमारे समाज में लोगों के जीवन को आकार देने में एक प्रमुख भूमिका निभाता है और इसलिए छात्रों को एक वैज्ञानिक स्वभाव और समझ विकसित करनी चाहिए ताकि वे अपने देश और दुनिया के विकास में योगदान दे सकें।
इस अवसर पर डीन, बायोसाइंसेज एंड बायोटेक्नोलॉजी, एमिटी यूनिवर्सिटी, के अतिरिक्त प्रो-वाइस चांसलर डा चंद्रदीप टंडन, ट्रांसलेशनल रिसर्च, के डीन डॉ. बीके मूर्ति, एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ एप्लाइड साइंसे की निदेशक डॉ. सुनीता रतन, संकाय, शोधकर्ता और एमिटी के छात्र भी मौजूद थे। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर, “एआई के माध्यम से दुनिया को नया आकार देना”, “रमन की खोज और भविष्य के विज्ञान और प्रौद्योगिकी के लिए इसकी प्रासंगिकता”, “बाहरी परियोजनाओं के लिए अपने अनुभव और क्षमता का विस्तार कैसे करें” जैसे विषयों पर पैनल चर्चाएँ आयोजित की गईं, साथ ही फ़ूड इनोवेटर आइडिया पिच प्रतियोगिता, फ़ूड फ़ोटोग्राफ़ी प्रतियोगिता, वाद-विवाद प्रतियोगिता, पोस्टर प्रतियोगिता और विज्ञान प्रश्नोत्तरी भी आयोजित की गईं।


