मेकअप कला के महान कलाकार पंढरी दादा को श्रद्धांजलि है ‘पंढरी के रंग’
नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा जगत में स्टारडम का जोर इतना ज्यादा रहता है कि फिल्म के अन्य विभागों से जुड़े लोगों, खासकर तकनीशियनों और मेकअप आर्टिस्टों के बारे न के बराबर ही बात होती है। लेकिन इनमें से कई लोग ऐसे हैं, जिन्होंने अपने योगदान से सिनेमा को समृद्ध किया है। पंढरी दादा के नाम से मशहूर नारायण हरिश्चंद्र जुकर उर्फ पंढरी जुकर उन्हीं में से एक थे।
वह मेकअप कला के मास्टर थे, एक आइकनिक मेकअप कलाकार थे और सही अर्थों मेकअप कला का एक स्कूल थे। उन्होंने सैकड़ों चेहरों को अपनी कला से निखारा, सैकड़ों दिलों को छुआ। वह 1948 से फिल्म जगत में सक्रिय थे। उन्होंने दिलीप कुमार, राज कपूर, मधुबाला, नरगिस, सुनील दत्त, मीना कुमारी, धर्मेंद्र, नूतन, वहीदा रहमान, अमिताभ बच्चन, सलमान खान, शाहरुख खान, माधुरी दीक्षित, जूही चावला, ऐश्वर्या रॉय, मनीषा कोईराला, अश्विनी भावे सहित सैकड़ों कलाकारों को अपने मेकअप से निखारा।
18 फरवरी, 2020 को 88 वर्ष का आयु में उनका देहांत हो गया। उन्हीं पंढरी दादा की कला पर फिल्म डिविजन ऑफ इंडिया (भारतीय फिल्म प्रभाग) ने एक फिल्म ‘पंढरी के रंग’ का निर्माण किया है, जिसका निर्देशन सचिन शिर्के और पंकज शर्मा ने किया है। इस फिल्म का प्रदर्शन इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (आईजीएनसीए) के मीडिया सेंटर प्रभाग ने केन्द्र के समवेत ऑडिटोरियम में 17 मई को किया।
लगभग आधे घंटे की यह फिल्म एक मेकअप कलाकार के रूप में पंढरी दादा की यात्रा को दिखाती है। इस फिल्म में उनकी मेकअप कला के बारे में स्वयं उन्होंने तो बात की है, वहीदा रहमान, जूही चावला, अश्विनी भावे, गुलशन ग्रोवर, मनीषा कोईराला जैसे प्रसिद्ध कलाकारों ने भी बात की है। प्रख्यात फिल्मकार सुभाष घई ने भी एक मेकअप कलाकार के रूप में पंढरी दादा के योगदान को रेखांकित किया है।
इसके अलावा, कुछ प्रसिद्ध मेकअप आर्टिस्ट और पंढरी दादा के शिष्यों ने भी उनके काम करने की शैली पर बात की है। जिस तरह से वह उंगलियों के स्पर्श से मेकअप को एक नए मायने दे देते थे, वह अद्भुत होता था। मेकअप आर्टिस्ट फिल्म के प्रभाव को बढ़ाने में कितना अहम किरदार निभाते हैं, फिल्म यह भी संदेश देती है। कलाकार अपने चेहरे के भावों, देह-भाषा से किरदार को साकार करता है तथा एक मेकअप कलाकार अपने मेकअप से उसके प्रभाव को और बढ़ा देता है, फिल्म इस बात को भी कई उदाहरणों के जरिये साबित करती है। प्रभावी ढंग से बनाई गई यह फिल्म पर्दे के पीछे सार्थक भूमिका निभाने वाले महान कलाकार पंढरी दादा को भावपूर्ण श्रद्धांजलि है।


