पंजाबी विकास मंच ने मनाया बैसाखी महोत्सव, शबद कीर्तन सरबजीत सिंह खालसा द्वारा किया गया 

पंजाबी विकास मंच ने मनाया बैसाखी महोत्सव, शबद कीर्तन सरबजीत सिंह खालसा द्वारा किया गया 

नोएडा सेक्टर-12 स्तिथ गुरुद्वारा साहिब में पंजाबी विकास मंच द्वारा बैसाखी महोत्सव के पर्व को पंजाबी संस्कृति के अनुसार बहुत धूम धाम से मनाया। बैशाखी की परम्परानुसार श्रद्धा पूर्वक शबद कीर्तन विश्व प्रसिद्ध भाई सरबजीत सिंह खालसा दिल्ली वालों द्वारा किया गया । 

इस अवसर पर पंजाबी विकास मंच के चेयरमैन पंजाबी रत्न दीपक विग ने उपस्थित पंजाबी परिवारों को वैशाखी पर्व की महता बताते हुए कहा कि हमारा देश विभिन्न त्यौहारों का एक खूबसूरत गुलदस्ता है। इस गुलदस्ते का एक सुंदर फूल है ‘बैसाखी’। वैसाखी पंजाब के कैलेंडर में सबसे महत्वपूर्ण तिथियों में से एक है। वैसाखी एक वसंत उत्सव है जो हर साल 12-13 या 14 अप्रैल को होता है। इस दिन को सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है।

इसी दिन सिखों के 10वें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह ने 1699 ईस्वी को आनंदपुर साहिब में ‘पांच प्यारों’ को अमृत छकाकर ‘खालसा पंथ’ की सृजना की थी। पांच प्यारों को अमृत छकाने का मूल उद्देश्य गुलाम मानसिकता की जिंदगी व्यतीत कर रही जनता में ‘चढ़दी कला’ अर्थात जोश और शक्ति की भावना भर कर आत्मबल और शक्ति पैदा करना था ताकि हर प्रकार के जुल्म का डट कर सामना कर सके। इस पंथ के द्वारा गुरु गोबिन्द सिंह ने लोगों को धर्म और जाति के आधार पर भेदभाव छोड़कर इसके स्थान पर मानवीय भावनाओं को आपसी संबंधों में महत्व देने की भी दृष्टि दी।

बैसाखी के दिन गुरुद्वारों में विशेष उत्सव मनाए जाते हैं।  हिंदु समाज की मान्यतानुसार देवी गंगा नदी स्वर्ग से पृथ्वी पर उतरी थीं। इस लिए देश में सबसे बड़े वैशाखी मेलों में से एक हरिद्वार में आयोजित किया जाता है, जो एक महत्वपूर्ण तीर्थ है। वैशाखी पर ब्रह्म कुंड में डुबकी लगाने के लिए लाखो तीर्थयात्री हरिद्वार आते हैं।

पंजाबी विकास मंच के अध्यक्ष जी. के. बंसल ने संबोधित करते हुए कहा कि इस पावन दिन पवित्र सरोवर में स्नान का भी अपना अलग महत्व है सुबह के समय से ही स्नान आदि के बाद सिक्ख लोग श्री गुरुद्वारा साहेब जाते है। इस दिन श्री गुरुद्वारा साहेब मे श्री गुरु ग्रंथ साहेब का पाठ किया जाता है, कीर्तन आदि करवाए जाते है. नदियो किनारे मेलो का आयोजन किया जाता है। उन्होंनें बताया कि पंजाबी लोग इस दिन अपनी खुशी को अपने विशेष नृत्य भांगड़ा के द्वारा भी व्यक्त करते है. बच्चे बुड़े महिलाए सभी ढोल की आवाज मे मदमस्त हो जाते है और हर्षो उल्लास से नाचते गाते है। 

पंजाबी विकास मंच के डिप्टी चेयरमैन संजीव पूरी ने बताया कि - 
भारत भर में बैसाखी का पर्व सभी जगह मनाया जाता है और इसे दूसरे नाम से खेती का पर्व भी कहा जाता है। किसान इसे बड़े आनंद और उत्साह के साथ मनाते हुए खुशियों का इजहार करते हैं। बैसाखी मुख्यतः कृषि पर्व है। पंजाब की भूमि से जब रबी की फसल पककर तैयार हो जाती है तब यह पर्व मनाया जाता है। इस कृषि पर्व की आध्यात्मिक पर्व के रूप में भी काफी मान्यता है। किसान इस दिन अपनी अच्छी फसल के लिए भगवान को धन्यवाद देते है। 

पंजाबी विकास मंच के संरक्षक जे. एम. सेठ ने संबोधित करते हुए कहा कि हर वर्ष बैसाखी 12-13 या 14 अप्रैल को मनाई जाती है इस दिन से ही हिंदू नव वर्ष की शुरुआत होती है । क्योंकि सूर्य स्वयं की राशि मेष में आता है सूर्य 12 राशियों का भ्रमण करने के बाद स्वयं की राशि मेष में उच्च का होता है सूर्य सभी ग्रहों का राजा है सूर्य के उच्च में आने के कारण इस दिन किसी भी नए कार्य की शुरुआत शुभ मानी जाती है सूर्य के उच्च में आने से जो अलौकिक किरणें सूर्य के द्वारा जो पृथ्वी में आती है वह नदियों में समा जाती है वह वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण होती है  बैसाखी के दिन नदियों में स्नान करने से आभामंडल में तीव्रता आती है और कई रोगो का नाश भी होता है ।
कीर्तन के उपरांत गुरु घर की लंगर की सेवा की गई। सभी पंजाबी परिवार व अन्य उपस्थित गुरु संगत लगभग 600 से अधिक थी लंगर प्रसाद लेकर अति आनंदित हुए और उसकी सराहना की। 

इस वर्ष वैशाखी पर्व को मनाने में विशेष रूप से  पीवीएम के सरांक्षक जे एम सेठ, एस पी कालरा, एस एस सचदेव, चेयरमैन पंजाबी रत्न दीपक बिग , अध्यक्ष जी. के. बंसल, डिप्टी चेयरमैन संजीव पुरी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुनील वाधवा,संजीव बाँधा, हरीश सभरवाल, उपाध्यक्ष प्रदीप वोहरा, आर के भट्ट, संजय खत्री, कोषाध्यक्ष अजय साहनी, सचिव अलका सुद व सरोज भाटिया, सह सचिव अमरदीप शाह, रितु दुग्गल व प्रभा जयरथ, ऑडिटर प्रेम अरोड़ा और अन्य पदाधिकारी, देवेंद्र सिंह चावला, योगिराज सिंह गुप्ता, राज कुमार नारंग, अमरजीत कौर, सुनील वर्मा, सुषमा नेब, गौरव जग्गी, प्रवीण पासी, शरण चौहान, अंजू मग्गू, पिंकी गुप्ता, विक्की कलसी, सविता अरोड़ा, राजीव चावला, इंद्रपाल खांडपुर, अजय अग्रवाल, हेमंत डोगरा, अचल जैन आदि पंजाबी समाज के लोगों का स्वागत करने के लिए वहाँ उपस्थित रहे।