राहुल गांधी समर्थकों द्वारा डूसू सचिव मित्रवृंदा कर्णवाल को कार्यालय में प्रवेश से रोकना: छात्र अधिकारों पर भारी चोट
राहुल गांधी की दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ कार्यालय में अनाधिकृत घुसपैठ द्वारा लोकतंत्र का हनन
नई दिल्ली । अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने आज दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ कार्यालय में प्रेस वार्ता आयोजित कर बताया कि राहुल गांधी का दिल्ली विश्वविद्यालय परिसर में एक बार फिर बिना अनुमति और किसी पूर्व सूचना के प्रवेश, न केवल विश्वविद्यालय की गरिमा के विरुद्ध है, बल्कि यह छात्रों की सुरक्षा, लोकतांत्रिक मर्यादाओं और शैक्षणिक वातावरण पर सीधा आघात है।
यह पहली बार नहीं है जब राहुल गांधी ने विश्वविद्यालय की मर्यादाओं और नियमों को ताक पर रखा हो। इससे पूर्व भी वे पीजी मेंस छात्रावास में अनधिकृत रूप से प्रवेश कर चुके हैं, जहाँ छात्रों के निजी जीवन व सुरक्षा को नजरअंदाज़ कर राजनीतिक प्रचार की कोशिश की गई थी। लगातार विश्वविद्यालय परिसरों को राजनीतिक मंच के रूप में उपयोग करने की उनकी प्रवृत्ति अत्यंत चिंताजनक है।
छात्रसंघ कार्यालय पर ताला लगाना और छात्रसंघ प्रतिनिधि के साथ दुर्व्यवहार: लोकतंत्र पर सीधा प्रहार
डूसू कार्यालय, जो कि दिल्ली विश्वविद्यालय के लाखों विद्यार्थियों द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधियों की लोकतांत्रिक गतिविधियों का केंद्र है, उस पर राहुल गांधी के समर्थकों और बाहरी तत्वों द्वारा विद्यार्थियों को बाहर खदेड़ कर जबरन ताला जड़ना और अनुशासनहीनता फैलाना एक अत्यंत शर्मनाक कृत्य है। यह केवल एक कार्यालय पर ताला नहीं था, बल्कि छात्रशक्ति की आवाज़, स्वायत्तता और विश्वास पर ताला जड़ने का दुस्साहस था। यह वही कार्यालय है जहाँ छात्रों की समस्याओं का समाधान होता है, उनकी आवाज़ को वैधानिक मंच मिलता है, और वे प्रशासन से संवाद स्थापित करते हैं।
इससे भी अधिक निंदनीय यह था कि छात्रसंघ की निर्वाचित सचिव मित्रवृंदा कर्णवाल को उनके ही कार्यालय में प्रवेश से रोका गया, उनके साथ धक्का-मुक्की की गई, अभद्र भाषा का प्रयोग हुआ और उनके संवैधानिक कर्तव्यों के निर्वहन में बाधा उत्पन्न की गई। परीक्षा के समय जब अनेक छात्र अपनी समस्याएँ लेकर वहाँ पहुँचे थे, उन्हें भी डराया-धमकाया गया और कार्यालय में बंद कर दिया गया। यह पूरी घटना दिल्ली विश्वविद्यालय में लोकतंत्र, शिष्टता और छात्रहित के विरुद्ध एक सुनियोजित राजनीतिक षड्यंत्र के रूप में देखी जानी चाहिए।
परीक्षा के दौरान छात्रों का उत्पीड़न – छात्रहित के प्रति असंवेदनशीलता
घटना उस समय पर हुई जब विश्वविद्यालय में परीक्षाएँ चल रही हैं। कई छात्र अपनी समस्या लेकर डूसू सचिव के पास पहुँचते हैं, परंतु उन्हें भी धमकाकर, बाहर कर जबरन डूसू कार्यालय बंद कर दिया गया। यह घटना केवल छात्रसंघ प्रतिनिधियों पर नहीं, बल्कि हर उस छात्र पर सीधा हमला है जो विश्वविद्यालय में शांतिपूर्ण, सुरक्षित और लोकतांत्रिक वातावरण की अपेक्षा करता है।
कांग्रेस नेताओं द्वारा भारतीय सशस्त्र बलों पर उठाए गए सवाल पर आक्रोशित छात्रों ने जब राहुल गांधी से जवाब मांगा, तो पीठ दिखाकर भागे राहुल गांधी।
वहीं दूसरी ओर, जब भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारतीय सशस्त्र बलों के पराक्रम से ऑपरेशन 'सिंदूर' को सफलतापूर्वक अंजाम दिया, तब कांग्रेस पार्टी ने उसपर बार-बार संदेह प्रकट कर, हमारे जवानों के साहस व पराक्रम को अपमानित करने का कार्य किया। राहुल गांधी द्वारा बार-बार सेना की कार्रवाई पर प्रश्नचिन्ह लगाना, राष्ट्रीय सुरक्षा पर राजनीतिक लाभ के लिए राजनीति करना, अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
जब दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों ने राहुल गांधी से इन राष्ट्रहित से जुड़े सवालों का उत्तर माँगा, तो उन्होंने पीठ दिखाई। संवाद से बचकर, परिसर से बाहर निकल जाना उनके जवाबदेही से पलायन की प्रवृत्ति को उजागर करता है। जो नेता स्वयं को युवाओं का प्रतिनिधि कहते हैं, वे छात्रों के प्रश्नों से क्यों डरते हैं?
एबीवीपी का प्रतिकार और विश्वविद्यालय प्रशासन की स्वीकारोक्ति
एबीवीपी ने डूसू कार्यालय में बाहरी तत्वों की घुसपैठ, निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ दुर्व्यवहार और नशीली गतिविधियों के विरोध में दिल्ली विश्वविद्यालय प्रॉक्टर कार्यालय के समक्ष जोरदार प्रदर्शन किया। परिषद ने मांग की कि इस कृत्य में संलिप्त लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि विश्वविद्यालय परिसर की गरिमा और छात्र सुरक्षा बनी रहे।
प्रदर्शन के पश्चात विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह स्वीकार किया कि डूसू कार्यालय में बाहरी लोगों की उपस्थिति, ताला जड़ना और छात्र प्रतिनिधियों को प्रताड़ित करना अत्यंत गंभीर और अनुशासनहीन कृत्य हैं। प्रशासन ने उचित जांच और कार्रवाई का आश्वासन भी दिया।
डूसू सचिव मित्रवृंदा कर्णवाल ने कहा, "छात्रसंघ कार्यालय वह मंच है जहाँ छात्र-प्रतिनिधि विद्यार्थियों की समस्याओं को प्रशासन तक पहुँचाते हैं, समाधान के लिए संवाद करते हैं, और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्षरत रहते हैं। लेकिन जिस प्रकार एक विधिवत निर्वाचित सचिव को, अपने ही कार्यालय में प्रवेश से रोका गया, दुर्व्यवहार किया गया — यह केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि पूरे छात्र समुदाय के मत, मताधिकार और लोकतांत्रिक मर्यादा का सीधा अपमान है।
कांग्रेस परिवार को शायद यह भ्रम हो गया है कि दिल्ली विश्वविद्यालय उनकी पारिवारिक जागीर है, और वे जब चाहें यहाँ प्रवेश कर सकते हैं, बिना अनुमति के ताले जड़ सकते हैं, और छात्रसंघ जैसी लोकतांत्रिक संस्था को हाशिए पर धकेल सकते हैं। लेकिन हम यह स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि यह विश्वविद्यालय छात्रों की भावना, परिश्रम और अधिकारों से संचालित होता है, किसी राजनीतिक वंश के विशेषाधिकार से नहीं। डूसू कार्यालय किसी राजनीतिक ड्रामे का मंच नहीं, बल्कि छात्रहित की सेवा और दायित्व का स्थल है — और इसे अपवित्र करने का हर प्रयास न केवल निंदनीय है, बल्कि छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों का खुला हनन है, जिसका हम हर स्तर पर प्रतिकार करेंगे।"
अभाविप की राष्ट्रीय मंत्री शिवांगी खरवाल ने कहा, "दिल्ली विश्वविद्यालय में कांग्रेस और राहुल गांधी द्वारा फैलाया गया यह अराजकता और असंवेदनशीलता का माहौल पूरी तरह से निंदनीय है। छात्रसंघ कार्यालय को जबरन बंद करना, छात्रों को डराना और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे विषयों पर भ्रामक राजनीति करना कांग्रेस की सोच को दर्शाता है। राहुल गांधी एक ऐसे नेता है जिनके बयान को पाकिस्तान अपने लाभ हेतु वैश्विक मंचों पर इस्तेमाल करती है। एबीवीपी ऐसे हर प्रयास का पुरज़ोर विरोध करती है और विश्वविद्यालय को राजनीति का अखाड़ा बनने से रोकेगी।"


