रामलीला केवल एक नाट्य प्रस्तुति नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति है

श्री सनातन धर्म रामलीला समिति के तत्वावधान में हरि भक्ति कला ट्रस्ट द्वारा आयोजित भव्य रामलीला का मंचन में स्वरूपनखा नाक-कान प्रसंग, सीता हरण, जटायु वीरगति, शबरी प्रसंग, तथा ग्यारह मुखी हनुमान प्रकटोत्सव जैसे प्रमुख प्रसंगों को अत्यंत प्रभावशाली एवं भावनात्मक अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत किया गया।

रामलीला की शुरुआत स्वरूपनखा प्रसंग से हुई, जिसमें उसकी श्रीराम व लक्ष्मण से विवाह की लालसा, क्रोध में सीता को आहत करने का प्रयास, और अंततः लक्ष्मण द्वारा उसके नाक-कान काटने का दृश्य दर्शाया गया। इसके बाद खर-दूषण वध, स्वरूपनखा का रावण दरबार में जाना, रावण-मारीच संवाद और स्वर्ण हिरण का प्रपंच, सीता हरण एवं जटायु का बलिदान, श्रीराम का शोक, शबरी प्रसंग, और अंत में ग्यारह मुखी हनुमान जी के प्रकटोत्सव ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।

प्रत्येक कलाकार ने अपने पात्र में समर्पण, ऊर्जा और निष्ठा के साथ अभिनय किया, जिससे मंच पर प्रत्येक दृश्य जीवंत हो उठा। दर्शकों ने लगातार तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।

यह रामलीला केवल एक नाट्य प्रस्तुति नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, भक्ति और जीवन मूल्यों की सजीव झलक थी। समिति ने सभी दर्शकों से आगामी लीलाओं में सपरिवार उपस्थित होकर इस पावन आयोजन का लाभ उठाने का आग्रह किया।

डा. टी.एन. गोविल, टी.एन. चौरसिया, अल्पेश गर्ग, अतुल मित्तल, अनुज गुप्ता, सत्यनारायण गोयल, संजय गोयल, पंकज जिंदल, विपिन बंसल, राजीव अजमानी, प्रदीप अग्रवाल, संजय गुप्ता, सुशील भारद्वाज, मित्रा शर्मा, चंद्रपाल सिंह, शुभकरण सिंह राणा, रमेश कुमार, चितरंजन कुमार, कुलदीप गोयल, के.के. दत्ता, पीयूष द्विवेदी, परवेश बंसल, महेश चौहान, पुष्कर शर्मा आदि गणमान्य व्यक्तियों ने अपनी उपस्थिति से आयोजन की शोभा बढ़ाई।