एमिटी विश्वविद्यालय में 'सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजीस - मटीरियल्स टू चिप्स' पर त्रिदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ

एमिटी विश्वविद्यालय में 'सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजीस - मटीरियल्स टू चिप्स' पर त्रिदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ

नोएडा। एमिटी विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश नोएडा द्वारा सोसाइटी ऑफ सेमीकंडक्टर डिवाइसेज (एसएसडी) और सेमीकंडक्टर सोसाइटी (इंडिया) के सहयोग से 18 से 20 सितंबर 2024 तक “सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजीज - मटीरियल्स टू चिप्स” विषय पर तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया। इस सम्मेलन का उद्देश्य भारत सेमीकंडक्टर सामग्री से लेकर चिप तक के निर्माण में किस तरह अग्रणी भूमिका निभा रहा है इस पर विचार-विमर्श करना है और इस मिशन में शिक्षाविदों और अनुसंधान एवं विकास संस्थानों के शोध की भूमिका की पहचान करना है।

इस सम्मेलन का शुभारंभ भारत सरकार के एमईआईटीवाई के इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी डॉ. एस. के. मारवाह, एमिटी शिक्षण समूह के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. अशोक के. चौहान, सोसाइटी ऑफ सेमीकंडक्टर डिवाइसेज के अध्यक्ष प्रो. विक्रम कुमार, भारत सरकार के एमईआईटीवाई के भारतीय सेमीकंडक्टर मिशन के निदेशक डॉ. मोनीश हुड्डा, एमिटी विश्वविद्यालय के चांसलर डॉ. अतुल चौहान, जापान के क्यूशू इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के प्रो. यासुहिरो फुकुमा और एमिटी विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश की वाइस चांसलर प्रो. (डॉ.) बलविंदर शुक्ला द्वारा किया गया।

उद्घाटन सत्र के दौरान सभा को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि भारत सरकार के एमईआईटीवाई के इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी डॉ. एस. के. मारवाह ने कहा कि भारत सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है। यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता भी है और इसने हाल के वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति की है। हमारा देश 2026 तक 300 बिलियन डॉलर का इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण केंद्र बनने का लक्ष्य रखता है।

इलेक्ट्रॉनिक्स पर राष्ट्रीय नीति 2019 में भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिज़ाइन और विनिर्माण के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने की परिकल्पना की गई है और भारत सरकार इलेक्ट्रॉनिक्स हार्डवेयर विनिर्माण को उच्च प्राथमिकता देती है, क्योंकि यह “मेक इन इंडिया” और “डिजिटल इंडिया” कार्यक्रमों का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। भारत का सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम बढ़ रहा है, सरकार और उद्योग एक मजबूत घरेलू बाजार बनाने और वैश्विक कंपनियों को आकर्षित करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। भारत में दुनिया के 20 प्रतिशत सेमीकंडक्टर डिज़ाइन कार्यबल हैं और साणंद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, बेंगलुरु में कई नई सुविधाओं की स्थापना के साथ प्रमुख सेमीकंडक्टर हब बन रहे हैं।

सेमीकंडक्टर मिशन के लिए एमिटी के दृष्टिकोण को साझा करते हुए एमिटी शिक्षण समूह के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. अशोक के. चौहान ने कहा कि भारत के सेमीकंडक्टर मिशन का उद्देश्य एक जीवंत सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले इकोसिस्टम का निर्माण करना है, ताकि भारत इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और डिजाइन के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में उभर सके। एमिटी इस मिशन में योगदान देने और भारत को दुनिया में सेमीकंडक्टर का सबसे बड़ा निर्माता बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

इस अवसर पर अपने विचार साझा करते हुए सोसाइटी ऑफ सेमीकंडक्टर डिवाइसेज के अध्यक्ष प्रो. विक्रम कुमार ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में, सरकार ने सेमीकंडक्टर पर बहुत जोर दिया है और भारत अगले कुछ वर्षों में एक बड़े सेमीकंडक्टर हब के रूप में उभरने जा रहा है। सेमीकंडक्टर भू-राजनीतिक संतुलन प्राप्त करने के लिए नए चालक हैं और सेमीकंडक्टर उद्योग तेजी से बढ़ रहा है। इसलिए, शैक्षणिक संस्थानों को उद्योग के बराबर होना चाहिए और कुशल कार्यबल तैयार करना चाहिए जो सेमीकंडक्टर उद्योग में काम कर सकें और भारत को सेमीकंडक्टर हब बनाने के मिशन का नेतृत्व कर सकें।

भारत के विकास में सेमीकंडक्टर की भूमिका पर जोर देते हुए भारत सरकार के एमईआईटीवाई के भारतीय सेमीकंडक्टर मिशन के निदेशक डॉ. मोनीश हुड्डा, ने कहा कि भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र का मूल्य अब 150 बिलियन डॉलर से अधिक है, प्रधान मंत्री ने देश के इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र को इस दशक के अंत तक 500 बिलियन डॉलर तक बढ़ाने और 6 मिलियन नौकरियां पैदा करने का एक बड़ा लक्ष्य रेखांकित किया है। समय की मांग है कि एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र बनाया जाए जो सेमीकॉन उद्योग के विकास को गति दे सके और हमें अपनी स्वयं की सेमीकॉन बौद्धिक संपदा (एसआईपी) बनाने के लिए कौशल विकास के साथ-साथ गहन अनुसंधान एवं विकास की आवश्यकता होगी।

इस अवसर पर बोलते हुए, एमिटी विश्वविद्यालय के चांसलर डॉ. अतुल चौहान ने कहा कि सेमीकंडक्टर्स ने सिंगापुर जैसे कई देशों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और एमिटी यह सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी कि यह इस क्षेत्र में नंबर एक निजी संस्थान बने और भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने में योगदान दे।

जापान के क्यूशू इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के प्रो. यासुहिरो फुकुमा ने कहा, कि जापान का सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम सरकार के बढ़ते निवेश और नई कंपनियों की स्थापना के साथ पुनर्जीवित हो रहा है। जापान सेमीकंडक्टर उद्योग में अनुसंधान और विकास के लिए विभिन्न देशों के साथ सहयोग करने के लिए भी तत्पर है और ऐसे सम्मेलनों से सूचनाओं और विचारों का आदान-प्रदान होता है जो वैश्विक स्तर पर उद्योग के विकास को बढ़ावा दे सकते हैं।

सम्मेलन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए एमिटी विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश की वाइस चांसलर प्रो. (डॉ.) बलविंदर शुक्ला ने कहा कि सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लिए भारत सेमीकंडक्टर सामग्री, उपकरणों के निर्माण, चिप निर्माण में प्रवेश करने और कौशल विकास पर अधिक जोर देने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। यह सम्मेलन सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकियों में विभिन्न शोध गतिविधियों और नवीनतम विकास पर चर्चा करने का अवसर प्रदान करेगा।

इस अवसर पर सम्मेलन की एक सार ई-बुक का विमोचन किया गया और इस अवसर पर एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड रिसर्च एंड स्टडीज, प्रतिष्ठित वैज्ञानिक और प्रोफेसर, प्रो. (डॉ.) वी.के. जैन एमिटी फाउंडेशन फॉर साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन अलायंस (एएफएसटीआईए), उप महानिदेशक, डा नीरज शर्मा, विज्ञान, इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी के डीन (ट्रांसलेशनल रिसर्च एंड एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट) डॉ. बी. के. मूर्ति और एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ नैनोटेक्नोलॉजी के प्रमुख डा ओ पी सिन्हा भी उपस्थित थे। तीन दिवसीय सम्मेलन के दौरान, तकनीकी सत्रों और पोस्टर प्रस्तुतियों के साथ-साथ “सेमीकंडक्टर उद्योग - भारत सेमीकंडक्टर मिशन को मजबूत करने के लिए अकादमिक बातचीत” विषय पर एक पैनल चर्चा भी आयोजित की जाएगी।