एमिटी विश्वविद्यालय में इम्यूनोफार्मोकोलॉजी पर कार्यशाला का आयोजन
एमिटी विश्वविद्यालय के एमिटी सेंटर फॉर ट्रांसलेशनल रिसर्च द्वारा ग्लोबल कैंसर कंसोरियम के सहयोग से इम्यूनोफार्मोकोलॉजी पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का शुभारंभ ज्वांइट ड्रग कंट्रोलर इंडिया डा चंद्रशेखर रंगा, एमिटी सांइस टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन फांउडेशन के अध्यक्ष डा डब्लू सेल्वामूर्ती, एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ मॉलेक्यूलर मेडिसिन एंड स्टेम सेल रिसर्च के चेयरमैन डा बी सी दास, एमिटी विश्वविद्यालय के एडिशनल प्रो वाइस चांसलर डा चंद्रदीप टंडन द्वारा किया गया। इस कार्यशाला में दिल्ली एनसीआर क जामिया विश्वविद्यालय, जेएनयू, मणिपाल विश्वविद्यालय आदि विभिन्न संस्थानो से लगभग 100 से अधिक प्रतिभागीयों ने हिस्सा लिया।
कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए भारत सरकार के ज्वांइट ड्रग कंट्रोलर इंडिया डा चंद्रशेखर रंगा ने कहा कि प्रतिरोधक क्षमता प्रणाली अत्यंत जटिल होती है जिसके बारे में हमें और अधिक जानना है। हाल के दिनों में विकसित की गई 50 प्रतिशत से ज़््यादा दवाएँ बायोलॉजिक्स हैं, जो प्रोटीन और जीन जैसे जीवित जीवों से प्राप्त दवाएँ हैं। इन दवाओं की बहुत ज़रूरत है और इनका दायरा भी काफ़ी बड़ा है, ख़ास तौर पर इम्यूनोलॉजी के क्षेत्र में एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाएँ दवाओं की सबसे बड़ी श्रेणी हैं। इम्यूनोफार्माकोलॉजी, ऑन्कोलॉजी में अहम भूमिका निभाती है और यह एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ नवीनतम दवाएँ विकसित की जा रही हैं। अगले कुछ सालों में भारत इन दवाओं का सबसे बड़ा उत्पादक बन जाएगा क्योंकि इन दवाओं की माँग तेज़ी से बढ़ रही है। दवा की खोज और विकास में उद्योग-अकादमिक सहयोग ज़रूरी है ताकि नई दवाएँ विकसित की जा सकें जो विभिन्न प्रकार की बीमारियों को ठीक करने में मदद करेंगी। इसके अलावा, दवाओं की सुरक्षा और प्रभावकारिता बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि रोगियों का जीवन इन दवाओं पर निर्भर करता है।
एमिटी सांइस टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन फांउडेशन के अध्यक्ष डा डब्लू सेल्वामूर्ती ने कहा कि यह सम्मेलन चिकित्सकों और वैज्ञानिकों को कैंसर के खिलाफ नई प्रतिरक्षा-दवाइयों को डिजाइन करने में अपने विचारों और अनुभवों को साझा करने के लिए एक मंच प्रदान करेगा, जिससे विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं के बीच सहयोग की संभावना बढ़ सकती है। इसका उद्देश्य कैंसर के खिलाफ नई दवाओं को मान्य करने के लिए महत्वपूर्ण अनुवादात्मक और नैदानिक अध्ययन करने के लिए विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय अनुसंधान और विकास प्रयोगशालाओं और अस्पतालों के साथ न्यायसंगत सहयोग स्थापित करना भी है।
एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ मॉलेक्यूलर मेडिसिन एंड स्टेम सेल रिसर्च के चेयरमैन डा बी सी दास ने कहा कि इस कार्यशाला में कैंसर इम्यूनोफार्माकोलॉजी पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जो अनुसंधान का एक उभरता हुआ क्षेत्र है और इसमें कैंसर रोगियों की चिकित्सा आवश्यकताओं को पूरा करने की जबरदस्त क्षमता है। प्रतिभागियों को ट्यूमर इम्यूनोलॉजिस्ट के राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों की भागीदारी से निश्चित रूप से लाभ होगा। कार्यशाला के दौरान जिन प्रमुख विषयों को कवर किया जाएगा, उनमें कीमो/रेडियोथेरेपी, कैंसर के टीके, कैंसर थेरेपी में पारंपरिक और वैकल्पिक चिकित्सा और ट्रांसलेशनल कैंसर रिसर्च में चुनौतियाँ शामिल हैं।
एक दिवसीय कार्यशाला के दौरान, एप्लाइड इम्यूनोफार्माकोलॉजी, चुनौतियां और परिप्रेक्ष्य, प्रतिरक्षा कोशिका और अलगाव और उनके कार्यात्मक विश्लेषण पर व्यावहारिक प्रशिक्षण और प्रतिरक्षा फार्मास्यूटिकल्स, इम्यूनोलॉजी फार्माकोलॉजी से मिलती है जैसे विषयों पर तकनीकी सत्र का आयोजन किया गया। कार्यशाला मे ंग्लोबल कैसंर कंसेारियम के आयोजन सचिव डा हदयेश प्रकाश और संयोजक प्रो शुभ्रतो विश्वास भी उपस्थित थे।


