सर्वेक्षण में शामिल 10 में से 7 युवा भारतीयों को आने वाले दशक में ग्लोबल साउथ को बेहतर नेतृत्व मिलने की उम्मीद

सर्वेक्षण में शामिल 10 में से 7 युवा भारतीयों को आने वाले दशक में ग्लोबल साउथ को बेहतर नेतृत्व मिलने की उम्मीद

सीईईडब्ल्यू-संयुक्त राष्ट्र फाउंडेशन की एक नई रिपोर्ट, स्वतंत्रता शताब्दी वर्ष से पहले, भारत के भविष्य के लिए एक इंटरजेनरेशनल रोडमैप (Intergenerational roadmap) को दर्शाती है।

नई दिल्ली: नेक्स्ट जनरेशन इंडिया फेलो के पहले समूह की आज जारी एक रिपोर्ट भारत की स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष के लिए एक रास्ता दिखाती है। ‘अवर फ्यूचर इंडिया’ रिपोर्ट युवाओं की सशक्त भागीदारी वाले एक ऐसे रोडमैप की जानकारी देती है, जो विकसित भारत 2047 लक्ष्य को पाने के लिए दुनिया के पांच बड़े रुझानों - जलवायु परिवर्तन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, तीव्र शहरी विकास, जनसांख्यिकीय बदलाव और भू-राजनीति - को अवसर में बदलने पर केंद्रित है। रिपोर्ट के अनुसार, सर्वेक्षण में शामिल 72 प्रतिशत युवा भारतीयों का मानना है कि अगले 10 वर्षों में भारत, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील जैसे ग्लोबल साउथ के देशों का वैश्विक निर्णयों को तय करने में प्रभाव बढ़ेगा।

अपने मुख्य अभिभाषण में, अमिताभ कांत, पूर्व जी20 शेरपा और नेक्स्ट जनरेशन इंडिया एडवाइजर*, ने कहा, “आज भारत 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था है और इसका लक्ष्य सभी नागरिकों के जीवन में बदलाव लाने के लिए 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर को पार करना है। कुछ ही देशों ने ऐसी महत्वाकांक्षी छलांग लगाई है, और ऐसा करने के लिए निरंतर सुधार, विनिर्माण के विस्तार और सतत विकास की आवश्यकता होगी। हमारा सबसे बड़ा फायदा हमारा जनसांख्यिकीय लाभांश यानी एक युवा, गतिशील आबादी है, जिसकी ऊर्जा और नवाचार इस परिवर्तन को ताकत दे सकती है। अस्थिरता, संरक्षणवाद और जलवायु संकट से जूझ रही इस दुनिया में, अवर फ्यूचर इंडिया रिपोर्ट हमें याद दिलाती है कि एक लचीले (रेजिलिएंट) और समावेशी विकसित भारत के निर्माण के लिए युवा भारतीयों की सोच प्रेरक शक्ति का काम करेगी।”

संयुक्त राष्ट्र फाउंडेशन और काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) के सहयोग से यह अध्ययन 10 नेक्स्ट जनरेशन इंडिया फेलो (Fellows) ने किया है। इसमें 2,000 से अधिक भारतीयों के साथ चर्चा, एक राष्ट्रव्यापी सर्वे, और सात भारतीय शहरों व चार वैश्विक क्षेत्रों में 23 संवादों से मिली जानकारी का इस्तेमाल किया गया है। यह रिपोर्ट इस पीढ़ी को नेतृत्व करने और आगे बढ़ने के लिए सशक्त बनाने का वैश्विक महत्व दिखाती है।

30 साल से कम उम्र के 73.4 करोड़ से अधिक लोगों के साथ, भारत में दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी रहती है यानी विश्व के लगभग 10 युवा में से 1 युवा भारत में रहता है। जैसे-जैसे भारत का वैश्विक प्रभाव बढ़ रहा है, यहां के युवा दुनिया के भविष्य को आकार देने के लिए तैयार हो रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र फाउंडेशन की अध्यक्ष और सीईओ, एंबेसडर एलिजाबेथ कूसेंस* ने कहा, “जैसा कि हम अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों की नई कल्पना के बारे में चुनौती का सामना कर रहे हैं, ‘अवर फ्यूचर इंडिया’ अध्ययन रेखांकित करता है कि कैसे संस्थान नेतृत्व कर सकते हैं और संभावनाओं को उद्देश्य व कार्रवाई में बदल सकते हैं। यह रिपोर्ट हमारे नेक्स्ट जेनरेशन इंडिया फेलो (Fellows) की गहरी समझ और कल्पना की एक प्रभावशाली तस्वीर है, जिन्होंने भारत और अन्य देशों को जनसांख्यिकीय ऊर्जा को साझा प्रगति में बदलने और पीढ़ियों तक परिणाम देने वाली साझेदारियों को नई शक्ति देने का एक रोडमैप पेश किया है।”

डॉ. अरुणाभा घोष, सीईओ, सीईईडब्ल्यू और COP30 के लिए साउथ एशिया के स्पेशल एन्वाय*, ने कहा, “भारत के विकास का अगला चरण इस बात से तय नहीं होगा कि हम क्या वादे करते हैं, बल्कि इससे तय होगा कि हम जमीन पर क्या उतारते हैं - डेटा, पारदर्शिता और नवाचार के माध्यम से - जो सभी नागरिकों तक पहुंच सके और उन्हें जमीनी स्तर पर सोचने और कार्य करने के लिए सशक्त बन सके। ‘अवर फ्यूचर इंडिया’ रिपोर्ट दिखाती है कि ऐसा परिवर्तन कैसे शुरू होता है, जिसमें युवा व्यवस्थित रूप से सोचते हैं, साहस के साथ कार्य करते हैं, और अपने काम से साबित करते हैं कि एक पीढ़ी जब परिपक्व होती है तो क्या हासिल कर सकती है। पीढ़ियां इस बात से परिभाषित नहीं होतीं है कि उनका कब जन्म हुआ, बल्कि इस बात से जानी जाती है कि वे कब परिपक्व होती हैं। नेक्स्ट जनरेशन इंडिया फेलो (Fellows) परिपक्व हो चुके हैं और अब उन्हें हमारे भविष्य को आकार देना चाहिए।”

भारत में संयुक्त राष्ट्र के रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर, शोम्बी शार्प* ने कहा, “ऐसे समय में जब दुनिया कई संकटों और बढ़ते हुए मतभेदों का सामना कर रही है, भारत आशा और कल्पना के एक स्रोत के रूप में सामने आया है। भारत की यात्रा को जो खास बनाता है, वह है इसके विकास मॉडल में मौजूद स्वदेशीपन, ऐसे समाधान जिनकी जड़ें इसकी अपनी संस्कृति, रचनात्मकता और समुदाय से जुड़ी हैं। अवर फ्यूचर भारत उसी भावना का प्रतीक है, जो दिखाता है कि कैसे युवा भारतीय न केवल अपने लिए, बल्कि एक अधिक सहयोगात्मक और सतत विश्व के लिए प्रगति की नए सिरे से कल्पना कर रहे हैं।”

फेलोशिप के दौरान परामर्शों और संयुक्त राष्ट्र के 70 से अधिक उच्च-स्तरीय कार्यक्रमों और अन्य वैश्विक अवसरों पर चर्चाओं के माध्यम से फेलो (Fellows) को मिली जानकारी से पता चलता है कि विकसित भारत एक पीढ़ीगत परियोजना है, जो युवा भारतीयों के दृढ़ विश्वास और कल्पना से संचालित है, जो इसके परिणामों के साथ सबसे अधिक समय तक रहेंगे।

नेक्स्ट जनरेशन इंडिया फेलो (Fellows) के युवा-नेतृत्व वाले रोडमैप के केंद्र में प्रमुख रणनीतियां हैं, जो सरल और महत्वाकांक्षी कदमों के माध्यम से पांच महाप्रवृत्तियों (megatrends) का समाधान देती हैं। त्वरित लक्ष्य तत्कालिक, राजनीतिक रूप से व्यवहार्य कार्यों की रूपरेखा देते हैं, जो 2030 तक वास्तविक प्रगति दिखा सकते हैं - जैसे कि राजस्थान के अग्रणी कानून से प्रेरित होकर 40 करोड़ अनौपचारिक और प्लेटफॉर्म श्रमिकों की सुरक्षा को औपचारिक रूप देने के लिए एक राष्ट्रीय गिग वर्क कमीशन स्थापित करना। महत्वाकांक्षी लक्ष्य महत्वाकांक्षी, दीर्घकालिक पहलों का प्रस्ताव करते हैं, जिनका उद्देश्य 2047 तक भारत में बदलाव  लाना है, उदाहरण के लिए, दूरदर्शिता को शासन में एकीकृत करने के लिए मिनिस्ट्री ऑफ फ्यूचर अफेयर्स की स्थापना।

रिपोर्ट में देखभाल करने वालों (caregivers) को भुगतान करने और अर्थव्यवस्था में लैंगिक समानता लाने के लिए एक केयर फंड बनाने; उच्च-प्रवासन वाले क्षेत्रों में स्मार्ट विलेज हब (Smart Village Hubs) की शुरुआत करने ताकि प्रवासन एक विकल्प रहे, मजबूरी नहीं; सहभागितापूर्ण शहरी नियोजन के लिए एक जन भागीदारी फ्रेमवर्क को विस्तार देने; युवाओं के प्रतिनिधित्व के साथ एआई और उभरती तकनीक पर एक पैनल बनाने; स्किल फर्स्ट एजुकेशन मॉडल को अपनाने; जलवायु अनुकूल स्वदेशी प्रथाओं के संरक्षण के लिए एक भारत क्लाइमेट नॉलेज कंपोडियम बनाने; और हरित ऊर्जा जनतंत्र को शक्ति देने के लिए एक भारत सुपरग्रिड के निर्माण जैसे सुझाव दिए गए हैं।