डॉ. राहत इंदौरी की याद में ऑल इंडिया मुशायरा, दिल्ली में गूंजी राहत इंदौरी की शायरी
नई दिल्ली। उर्दू अदब के आफ़ताब, अवाम के दिलों पर राज करने वाले महबूब शायर डॉ. राहत इंदौरी की याद में राजधानी दिल्ली में एक शानदार ऑल इंडिया मुशायरे का आयोजन किया गया। जनता की खोज मीडिया ग्रुप, नोएडा और उर्दू हिंदी एकता अंजुमन के संयुक्त तत्वावधान में यह ऑल इंडिया -मुशायरा सुरभि स्टूडियो, नांगलोई, दिल्ली में हुआ , जहाँ दिल्ली-एनसीआर समेत मुल्क के कोने-कोने से शायर और अदीब तशरीफ़ लाए नामवर शायरों ने अपने कलाम से राहत इंदौरी साहब को ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश की।
मुशायरे का माहौल शुरू से ही राहत इंदौरी साहब की यादों से लबरेज़ रहा। हर शायर ने अपने अंदाज़ में राहत इंदौरी साहब को याद किया। किसी ने कहा कि राहत साहब सिर्फ शायर नहीं, बल्कि एक तहरीक थे, जिन्होंने अपनी शायरी से हक़ और इंसाफ की आवाज़ को बुलंद किया।

इस ख़ास मुशायरे के संयोजक शायर असर देहलवी असर रहे, जिन्होंने बड़ी मेहनत और मोहब्बत से इस पूरी महफ़िल को सजाया। मुशायरे के संयोजन और निज़ामत की ज़िम्मेदारी उर्दू हिंदी एकता अंजुमन के अध्यक्ष और मशहूर शायर असलम बेताब ने बेहद खूबसूरत अंदाज़ में निभाई। उनकी निज़ामत में राहत इंदौरी साहब के शेरों की झलक शामिल थी।
मुशायरे की सदारत उस्ताद शायर खुमार देहलवी साहब ने की। उन्होंने अपने सदारती खुतबे में कहा कि राहत इंदौरी ने मुशायरे को आम आदमी से जोड़ा और शायरी को स्टेज से निकालकर दिलों तक पहुंचाया। उनकी कमी हमेशा महसूस होगी, और उनकी शायरी हमेशा ज़िंदा रहेगी।
इस मौके पर मेहमान-ए-ख़ुसूसी के तौर पर सूफ़ी कशिश वारसी* तशरीफ़ लाए, जबकि मेहमान-ए-ज़ी-वक़ार के तौर पर वरिष्ठ कवयित्री कृष्णा शर्मा दामिनी मौजूद रहीं। इसके अलावा मेहमान के तौर पर कर्नल संजय चतुर्वेदी, साहित्य चंचल साधक, सरफ़राज़ देहलवी, एहतराम सिद्दीकी, ज़ुबैर अहमद और कई अन्य अदब-नवाज़ शख्सियतों ने शिरकत कर महफ़िल की रौनक बढ़ाई।
उर्दू हिंदी एकता अंजुमन के अध्यक्ष असलम बेताब ने अपने संबोधन में कहा, "राहत इंदौरी साहब ने हमेशा हक़ की बात की, मजलूम की आवाज़ बने और अपनी शायरी से अवाम के दिलों में घर बनाया। उनकी याद को ताज़ा रखने और नई नस्ल को उनकी बेबाक शायरी से जोड़ने के लिए ही हमने इस मुशायरे का आयोजन किया है। राहत साहब हिंदू-मुस्लिम एकता और गंगा-जमुनी तहज़ीब की मिसाल थे, और हमारी अंजुमन भी इसी एकता के लिए काम करता है।"
मुशायरे में शिरकत करने वाले शायरों की फेहरिस्त काफी लंबी और शानदार रही। जिनमें आरिफ़ देहलवी, हाशिम देहलवी, वफ़ा आज़मी, अनवर गाज़ियाबादी , असलम बेताब, असर देहलवी असर, पदम प्रतीक, राजीव तनेजा , शादान हसन, शफ़ीक़ सैफ़ी, संजय कुमार गिरी, फुरकान अंसारी, नूरुज़ ज़मा नूर, गोपाल गुप्ता, सुरेश चंद्रा, सैयद बाबर, गोल्डी ग़ज़ब, पवन कुमार तोमर, रंजन शर्मा जैसे वरिष्ठ शायरों ने अपने कलाम से खूब दाद बटोरी।
शायरात में किरन सिंह, , गायत्री खंडेलवाल, अनिका एम, पूनम सागर, संजू तनेजा, ख़ुशी जसवाल, अदीबा नाज़ जैसी नामचीन शायराओं ने भी अपनी नज़्मों और ग़ज़लों से महफ़िल को नया रंग दिया। सभी ने एक सुर में राहत साहब के मशहूर शेर "सभी का खून है शामिल यहाँ की मिट्टी में, किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है" को याद करते हुए देश की एकता और भाईचारे का पैगाम दिया।
देर रात तक चले इस मुशायरे में सामईन का हुजूम आखिर तक बना रहा। लोगों ने शायरों के हर शेर पर खुलकर दाद दी और राहत साहब की याद में आयोजित इस महफ़िल को कामयाब बनाया। अंत में नाज़िम ए मुशायरा असलम बेताब और असर देहलवी असर ने सभी मेहमानों, शायरों और मीडिया कर्मियों और वहाँ मौजूद शोताओ का शुक्रिया अदा किया।


