भक्तिवेदान्त एकेडमी, इस्कॉन नें छठा दीक्षान्त समारोह संपन्न
नोएडा। भक्तिवेदान्त एकेडमी, इस्कॉन नोएडा नें अपना छठा दीक्षान्त समारोह मनाया। इस्कॉन संस्थापकाचार्य श्रील प्रभुपाद की यह उत्कट इच्छा थी कि प्रत्येक व्यक्ति शास्त्रों का सम्यक रूप से अध्ययन करे। इसी क्रम में वर्ष 2003 में इस्कॉन नोएडा में श्रील प्रभुपाद के निजी शिष्य परम पूज्य लोकनाथ स्वामी महाराज के अनुरक्षण में भक्तिवेदान्त एकेडेमी की स्थापना की गई, जिसका उद्देश्य लोगो को व्यवस्थित एवं पूर्ण रूप से आध्यात्मिक शिक्षा प्रदान करना है।

इस एकेडेमी द्वारा प्रति वर्ष कई सारे आध्यात्मिक सर्टिफिकेट कोर्स आयोजित किये जाते है तथा ये कोर्स पूर्ण रूप से प्रामाणिक एवं आध्यात्मिक अध्यापकों द्वारा पढ़ाये जातें हैं। प्रत्येक वर्ष हजारों भक्तगण इस एकेडमी से शास्त्र अध्ययन करके इन कोर्सों का लाभ उठा रहे हैं। एक वर्षीय भक्ति शास्त्री डिग्री कोर्स इस एकेडमी का एक प्रमुख कोर्स है जिसके अन्तर्गत भगवद्गीता सहित अनेकों शास्त्रों का विस्तारपूर्वक अध्ययन कराया जाता है और वर्ष के अन्त में उन्हें भक्ति शास्त्री की डिग्री प्रदान की जाती है। अभी तक भारत के विभिन्न नगरों सहित अमेरिका, म्यांमार, नेपाल, मोरिशियस, सऊदी अरब, कोलम्बिया एवं पाकिस्तान आदि देशों के 350 से अधिक लोग यहाँ से भक्ति शास्त्री की डिग्री प्राप्त कर चुके हैं।
दीक्षान्त समारोह का शुभारम्भ दीप प्रज्ज्वलित करके किया गया। इस वर्ष विभिन्न आयु वर्ग के 40 विद्यार्थियों ने भक्ति शास्त्री स्नातक की डिग्री प्राप्त की। किसी भी आयु वर्ग, वर्ण, सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति का व्यक्ति इन कोर्सों को कर सकता है। इस अवसर पर मन्दिर के सह अध्यक्ष श्रीमान वंशीधर दास, सह अध्यक्ष श्रीमान वेदान्त चैतन्य दास, टेम्पल कमांडर राधाकुण्ड दास एवं भक्तिवेदान्त एकेडमी के निदेशक श्रीमान बुद्धिमन्ता दास सहित सभी स्नातक विद्यार्थी एवं उनके परिवार के लगभग 300 सदस्य उपस्थित रहे।
इस समारोह में विशेष रूप से इस्कॉन शिक्षा मंत्रालय के सदस्य एवं इस्कॉन बोर्ड ऑफ एग्जाम के चेयरमैन श्रीमान अतुल कृष्ण प्रभुजी मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए। उन्होंने शास्त्र अध्ययन के महत्व पर बल देते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को शास्त्रों का गम्भीरतापूर्वक अध्ययन करना चाहिए जिससे सभी के जीवन में शान्ति लाई जा सकती है।


