अनुसंधान सहयोग बढ़ाने के लिए यूएसए के मैरीविले विश्वविद्यालय से प्रतिनिधिमंडल ने किया एमिटी का दौरा
मैरीविले विश्वविद्यालय यूएसए और एमिटी विश्वविद्यालय के एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ फिजियोथिरेपी के मध्य आपसी अनुसंधान सहयोग के विकास हेतु आज मैरीविले विश्वविद्यालय के प्रो डा प्रदीप घोष सहित उनके डाक्टर ऑफ फिजियोथिरेपी के 07 छात्रों ने एमिटी विश्वविद्यालय का दौरा किया। इस अवसर पर एमिटी विश्वविद्यालय के एडिशनल प्रो - वाइस चांसलर डा चद्रदीप टंडन, हैल्थ एंड एलाइड साइंसेस के डीन डा बी सी दास, डिप्टी डीन डा तनवीर नावेद और एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ हैल्थ एलाइड सांइसेस के निदेशक डा जसोबंता सेठी ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया।

मैरीविले विश्वविद्यालय के प्रो डा प्रदीप घोष ने ‘‘स्ट्रोक से पीड़ित व्यक्तियों को चलने का प्रशिक्षण’’ पर जानकारी देते हुए कहा कि गेट (चाल) प्रशिक्षण, शक्ति, संतुलन और समन्वय में सुधार करके चलने की क्षमता को फिर से बनाने में मदद करता है। स्ट्रोक के बाद, यह प्राकृतिक चलने के पैटर्न को बहाल करने और गिरने के जोखिम को कम करने पर ध्यान केंद्रित करता है, जिससे व्यक्तियों को दैनिक गतिविधियों में गतिशीलता और आत्मविश्वास हासिल करने में मदद मिलती है। विभिन्न प्रकार के व्यायाम के माध्यम से चाल को बनाए रखना चाल क्षमताओं में सुधार करने के लिए सबसे आम दृष्टिकोण हैं। प्रो घोष ने कहा कि क्रमिक मांसपेशी सुदृढ़ीकरण कार्यात्मक नहीं है और बेहतर चलने की क्षमता में स्थानांतरित नहीं होता है, लेकिन रोगियों की मांसपेशियों की ताकत में सुधार हुआ है। ट्रेडमिल प्रशिक्षण का प्रभाव ओवर ग्राउंड चाल प्रशिक्षण के समतुल्य पाया गया है, विशेष रूप से उप-तीव्र पुनर्वास के दौरान। इलास्टिक बैंड का उपयोग करके डोर्सिफ्लेक्सन और घुटने के लचीलेपन को बढ़ावा देने से स्ट्रोक वाले व्यक्ति की चाल में भी सुधार होता है। डा घोष ने कहा कि एमिटी द्वारा अनुसंधान विशेषकर रोगियों को दर्द से निजात प्रदान करने आदि के क्षेत्र में कार्य किया जा रहा है हम कई सहयोगी क्षेत्र की संभावनाओ पर विचार कर रहे है।
एमिटी विश्वविद्यालय के एडिशनल प्रो - वाइस चांसलर डा चद्रदीप टंडन ने संबोधित करते हुए कहा कि एमिटी विश्वविद्यालय सदैव अनुसंधान व नवाचार को प्रोत्साहन देने के लिए कार्य करता है। वर्तमान में फिजियोथिरेपी और आक्यूपेशनल थिरेपी लोगों के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे है। यह अनुसंधानिक सहयोग का लाभ दोनों संस्थानो ंके शोधाथियों के अलावा उपचार के नये तरीके खोजने और उससे चुनौतियों का निवारण करने में सहायता प्रदान करेगा। परिवर्तनशील समय मे कोई भी संस्थान नेपथ्य मे ंअनुसंधान को बढ़ावा नही दे सकता इसलिए आपसी सहयोग आवश्यक है जिससे छात्रों को वैश्विकरण के अवसर प्राप्त हो सके।
एमिटी विश्वविद्यालय के हैल्थ एंड एलाइड साइंसेस के डीन डा बी सी दास द्वारा इस अवसर पर एमिटी द्वारा संचालित विभिन्न अनुसंधान योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। उन्होनें कहा कि हमें यह विचार करना होगा कि फिजियोथिरेपी के क्षेत्र में सहयोग की कौन सी संभावनायें व्याप्त है और किन विषयों पर संयुक्त कार्य किया जा सकता है।
इस अवसर पर एमिटी विश्वविद्यालय के हैल्थ एंड एलाइड साइंसेस के डिप्टी डीन डा तनवीर नावेद और एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ हैल्थ एलाइड सांइसेस के निदेशक डा जसोबंता सेठी ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम के अंर्तगत बाइपोलर एंव क्वाटरूपोलर मैग्नेट का उपयोग करके दर्द प्रबंधन पर चर्चा का आयोजन भी किया गया।


