वसंत पंचमी पर जीवंत होगा भारत का सांस्कृतिक इतिहास 

वसंत पंचमी पर जीवंत होगा भारत का सांस्कृतिक इतिहास 

दिल्ली अग्रोहा विकास ट्रस्ट करेगा महाराजा अग्रसेन-माता माधवी के दिव्य विवाह उत्सव का ऐतिहासिक आयोजन 

नई दिल्ली। भारतीय संस्कृति, सामाजिक समरसता और वैश्य समाज की गौरवशाली परंपराओं को पुनः जीवंत करने की दिशा में दिल्ली अग्रोहा विकास ट्रस्ट एक ऐतिहासिक और भावनात्मक पहल करने जा रहा है। प्राचीन ग्रंथों एवं ऐतिहासिक मान्यताओं पर आधारित महाराजा अग्रसेन एवं माता माधवी जी के दिव्य विवाह प्रसंग को पहली बार भव्य सांस्कृतिक उत्सव के रूप में समाज के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। 

ट्रस्ट के चैयरमेन नंदकिशोर अग्रवाल व अध्यक्ष बी.पी. गर्ग ने बताया कि शास्त्रों में वर्णित है कि महाराजा अग्रसेन 
का विवाह नागवंश की राजकुमारी महारानी माधवी से वसंत पंचमी के पावन दिन संपन्न हुआ था। महारानी माधवी, नागवंश के प्रतापी सम्राट महाराजा महीधर की सुपुत्री थीं, जिनका विशाल राज्य ‘नागलोक’ तत्कालीन समय में आज के मणिपुर, त्रिपुरा और नागालैंड सहित व्यापक भूभाग में विस्तृत था। तभी से नागलोक को वैश्य समाज की ननिहाल के रूप में श्रद्धा और सम्मान के साथ स्मरण किया जाता है। 

इन्हीं गौरवशाली ऐतिहासिक तथ्यों को मंच पर सजीव करने के उद्देश्य से दिल्ली अग्रोहा विकास ट्रस्ट द्वारा इतिहास में पहली बार ‘महाराजा अग्रसेन-माता माधवी विवाह उत्सव’ का आयोजन किया जा रहा है। यह भव्य एवं अनूठा आयोजन वसंत पंचमी की पूर्व संध्या, दिनांक 22 जनवरी 2026 को सायं 4ः30 बजे से, शाह  ऑडिटोरिम, सिविल लाइंस, दिल्ली में आयोजित होगा। 

महामंत्री डाॅ. जयकिशन गर्ग ने बताया कि आज तक देश में कभी भी महाराजा अग्रसेन एवं माता माधवी जी के विवाह पर आधारित ऐसा भव्य विवाह उत्सव आयोजित नहीं हुआ है। यह आयोजन अपने आप में पहला, अद्वितीय और ऐतिहासिक है, जिसमें प्राचीन ग्रंथों में वर्णित तथ्यों को सांस्कृतिक मंचन के माध्यम से जीवंत किया जाएगा। यह केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि इतिहास का पुनर्लेखन और सांस्कृतिक स्मृति का पुनर्जागरण है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए स्थायी प्रेरणा बनेगा। 

महिला अध्यक्षा गीता गुप्ता ने जानकारी दी कि कार्यक्रम में अत्यंत भव्य एवं भावनात्मक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से यह दर्शाया जाएगा कि माता माधवी ने मां पार्वती जी की आराधना कर महाराजा अग्रसेन को कैसे पाया, तथा हिंदू संस्कृति में गणगौर पूजा की परंपरा का प्रारंभ कैसे हुआ। इसके साथ ही, वैश्य समाज के बच्चों और युवाओं के लिए ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी मंचन, तथा महिलाओं द्वारा समसामयिक सामाजिक विषयों पर रचनात्मक प्रतियोगिताएँ भी इस आयोजन का विशेष आकर्षण होंगी। 

दिल्ली अग्रोहा विकास ट्रस्ट ने सम्पूर्ण वैश्य समाज से आग्रह किया है कि वे अपने कुलपिता महाराजा अग्रसेन के गौरवशाली इतिहास को जानने एवं इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बनने हेतु अधिक से अधिक संख्या में इस कार्यक्रम में सम्मिलित हों।