नोटा की तर्ज पर जात पात ना मानने वाले लोगों की गिनती हो, जातीय जनगणना में 'नो कॉस्ट' का प्रावधान हो

नोटा की तर्ज पर जात पात ना मानने वाले लोगों की गिनती हो, जातीय जनगणना में 'नो कॉस्ट' का प्रावधान हो

आज भारत जागरूक नागरिक संगठन देश के प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर नई जाति जनगणना में जाति प्रथा में विश्वास नहीं रखने वाले लोगों की गणना की मांग की। पत्र को जिलाधिकारी गौतम बुध नगर के माध्यम से प्रधानमंत्री कार्यालय में भेजा गया। संगठन के अध्यक्ष शैलेंद्र कुमार ने कहा कि आधुनिक एवं वर्तमान काल में लोगों का विचार बदल रहा है। वर्तमान पीढ़ी एवं युवा सोच प्राचीन एवं संकीर्ण जातिगत व्यवस्था पर विश्वास नहीं रखते हैं। 

नई पीढ़ी चुनाव में वोट करते वक्त शादी विवाह बिजनेस आदि संबंध के दौरान जाति को नजरअंदाज करते है। इन्हें जाति से कोई मतलब नहीं होता है l  इन लोगों का देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान होता है lअतः उनकी भी संख्या की जानकारी आवश्यक है। 

वरिष्ठ समाजसेवी मनोज कटारिया ने कहा कि जातिगत व्यवस्था से समाज में विभाजन होता है और देश कमजोर होता है। 

समाजसेवी विक्रम सेठी ने कहा कि समय के साथ लोगों का
कास्ट सिस्टम' में विश्वास कम हो रहा है। बड़े संख्या में बिना विवाद के अंतरजातीय विवाह हो रहे हैं l ऐसे में जाति गणना का कोई मायने नहीं हैl
फिर भी सरकार जातीय जनगणना चाहती है तो जाति ना मानने वाले लोगों की भी गणना की जाए। 

पत्र में प्रधानमंत्री से मांगे

जातीय जनगणना के दौरान जो लोग 'जातिवादी परंपरा' में विश्वास नहीं रखते हैं ,उन्हें जाति बताने के लिए बाध्य न किया जाए। 

 जातीय जनगणना में 'नो कास्ट'(कोई जाति नहीं) का कॉलम डाला जाए 

सरकार की प्रतिबद्धता हर भारतवासी के प्रति है इसलिए सरकार किसी भी कल्याणकारी योजना से 'नो कॉस्ट' (जातिवादी परंपरा को नहीं मानने) वाले लोगों को वंचित न रखें। 

सरकार आर्थिक एवं शैक्षणिक आधार पर 'नो कॉस्ट' मानने वाले लोगों के लिए जनकल्याण योजनाएं बनाएं। 

संगठन के अध्यक्ष शैलेंद्र ने कहा कि जातीय गणना में नो कास्ट के मुद्दे पर लोगों को जागृत किया जाएगा एवं आंदोलन कर लोगों को जागरूक किया जाएगा।