पंजाबी विकास मंच नोएडा ने मनाया लोहड़ी उत्सव
नोएडा। पंजाबी विकास मंच नोएडा ने मनाया सेक्टर 56 सामुदायिक भवन में लोहड़ी उत्सव बडे धूमधाम से मनाया जिसमें पंजाबी समाज के साथ साथ शहर के गणमान्य लोग शामिल हुए।

जे. एम. सेठ ने बताया कि गत पिछले दो तीन वर्षों में देश में कोविड महामारी के कारण बहुत उथल पुथल रही। इस कारण पंजाबी विकास मंच अपने लोहड़ी, बैशाखी, गुरूपूर्व आदि कार्यक्रम उस भाँति जैसे पहले किया करते थे नहीं कर सके। क्योंकि अब जब देश समान्यता की ओर अग्रसर हो गया है तो हमने आज का लोहड़ी कार्यक्रम अपने पंजाबी समाज को नई ऊर्जा प्रवाहित करने के लिए पहले की तरह ही घूम घाम से मनाया जिसमें रंगारंग कार्यक्रम के साथ साथ भांगड़ा, गिदा और पंजाबी गाने व कविता गाए गए जिसमें लोगों ने संगीत व ढोल पर डांस भी किया। इस कार्यक्रम में पंजाबी समाज ने बड़चड कर भाग लिया व तक़रीबन 400-500 पंजाबी लोगों ने सहयोग देकर व उपस्थित होकर इसकी शोभा बड़ाई।

इस आयोजन में नोएडा के गणमान्य पंजाबियों के साथ साथ सभी संरक्षक , पदाधिकारी व कार्यकारिणी सदस्य भी सम्मिलित हुए।

कार्यक्रम में पंजाबी विकास मंच की नई टीम की घोषणा की गई जिसमें दीपक विग को चेयरमैन, जी. के. बंसल अध्यक्ष , सुनील वाधवा वरिष्ठ उपाध्यक्ष, जे. एम. सेठ व प्रदीप वोहरा उपाध्यक्ष, संजीव बांधा कोषाध्यक्ष, हरीश सभरवाल, एस. एस. सचदेव, अलका सूद व सरोज भाटिया सचिव,और प्रभा जयरथ, ऋतु दुग्ग़ल व अमरदीपशाह सह सचिव व प्रेम अरोड़ा को ऑडिटर बनाया गया ।

इस अवसर पर सब उपस्थित लोगों ने दीपक विग की पंजाबी विकास मंच को आज की ऊँचाई पर पहुँचाने के लिए भूरी भूरी प्रशंसा की और यह आशा की कि वह नई टीम का मार्ग दर्शन पहले की तरह ही करते रहेंगे।
अतिथियों में नवाब सिंह नागर पूर्व दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री भाजपा से, महेश आर्य राष्ट्रीय प्रवक्ता सपा से, कृपाराम शर्मा पूर्व प्रत्याशी बीएसपी से, मुदित अग्रवाल उपाध्यक्ष कांग्रेसी दिल्ली प्रदेश, पंकज अवाना पूर्व प्रत्याशी आप पार्टी से, संजीव पूरी व संजय मावी सेक्टर 56 RWA से व डॉ. डी. के. मोदी चेयरमैन लक्ष्मी नारायण मंदिर ट्रस्ट से का स्वागत मंच पर पंजाबी विकास मंच के संरक्षकों व चेयरमैन दीपक विज और प्रधान जी. के. बंसल द्वारा गुलदस्ते व शाल भेंट कर किया गया। अतिथियों ने पंजाबी समाज की अपनी परंपराओं को जीवन्त रखने में इस महत्व पूर्ण योगदान की भूरी भूरी प्रशंसा की।
कार्यक्रम के प्रमुख वक्ता दीपक विग ने सभा को संबोधित करते हुए कहा की पंजाबी कोई जाति नहीं है, वरन 10,000 साल पुरानी संस्कृति है। ऋगवेद में पंजाब को सप्त-नद कहा गया है और महाभारत में इसे पंच-नद कहा गया है। भारतीय पंजाब व अविभाजित पंजाब के मूल निवासी, चाहे वो किसी भी जाति अथवा धर्म से हो, पंजाबी ही कहलाते है। जैसे पूर्व-प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह खत्री सिख है, पर पूर्व-प्रधानमंत्री इन्द्र कुमार गुजराल खत्री हिन्दू थे। स्वर्गीय अरुण जेटली पंजाबी ब्राह्मण व लाला लाजपत राय पंजाबी वैशेय थे, अमर शहीद भगत सिंह जाट सिख थे व उनके साथी क्रांतिकारी सुखदेव थापर, मदन लाल ढींगरा भी खत्री थे, आज के समय में लोकप्रिय क्रिकेटर विराट कोहली खत्री हिन्दू है, इन सभी को हम पंजाबी के तौर पर ही जानते है।
दीपक विग ने बताया की आज़ादी से पहले पंजाब एक बहुत बड़ा राज्य था, परन्तु कालान्तर में इसका 60% हिस्सा पाकिस्तान में चला गया, और बचे हुए 40% भाग में से भी हिमाचल, हरियाणा अलग हो गए। आज भी पुरे देश में 5 करोड पंजाबी है, जिसमे से 3 करोड के करीब पंजाब में है और 2 करोड के करीब देश भर में फैलें हुए है। इस के साथ-साथ विदेशों में भी पंजाबी आबादी बड़ी संख्या में है।
पंजाबी विकास मंच के अध्यक्ष जी. के. बंसल ने लोहड़ी पर्व का महत्व बताते हुए कहा कि लोहड़ी का त्यौहार मकर संक्राति से एक दिन पहले हर वर्ष मनाया जाता हैं। इस प्रकार, लोहड़ी त्यौहार पौष माह के अंतिम दिन, सूर्यास्त के बाद (माघ संक्रांति से पहली रात) यह पर्व मनाया जाता है। लोहड़ी की पूजा के समय अग्नि में डलने वाली वस्तुओं से शब्द निर्माण जान पड़ता है, जिसमें ल (लकड़ी) + ओह (गोहा = सूखे उपले) + ड़ी (रेवड़ी) = 'लोहड़ी' के प्रतीक हैं।

उन्होंने बताया कि प्राचीन भारत में श्वतुर्यज्ञ का अनुष्ठान मकर संक्रांति पर होता था, संभवत: लोहड़ी उसी का अवशेष है। इसलिए लोहड़ी मकर संक्रान्ति के एक दिन पहले मनाया जाता है। पूस-माघ की कड़कड़ाती सर्दी से बचने के लिए आग भी सहायक सिद्ध होती है - यही व्यावहारिक आवश्यकता 'लोहड़ी' को मौसमी पर्व का स्थान भी देती है। इस त्यौहार के पीछे मान्यता है कि खरीफ की फसल धान आदि के आगमन के बाद, किसान प्रकृति को धन्यवाद देता। इस लिहाज से लोहड़ी को एक दूसरे नाम ‘ख़ुशी का पर्व' भी कहें तो गलत नहीं होगा।
पंजाबी विकास मंच के उपाध्यक्ष जे. ऐम. सेठ ने बताया की लोहड़ी पर्व बहुत पुराना है, जिसके साथ अन्य किस्से भी जुड़ते गए। जैसे मुगल काल में, अकबर के शासन के दौरान, दुल्ला भट्टी पंजाब में रहा करता था, दुल्ला भट्टी ने पंजाब की लड़कियों की रक्षा की थी, क्योंकि उस समय अमीर सौदागरों को सदंल बार की जगह लड़कियों को बेचा जा रहा था। दुल्ला भट्टी ने इन्हीं सौदागरों से लड़कियों को छुड़वा कर उनकी शादी हिन्दू लड़कों से करवाई। इसलिए दुल्ला भट्टी को नायक की उपाधि से सम्मानित किया गया और हर लोहड़ी को उसकी शौर्य-कथा भी सुनाई जानी शुरू हो गई। उन्होंने सभी से आधुनिकता में भी पर्वो के माध्यम से पंजाबियत को जिन्दा रखने की अपील की।


