महावीर जन्मोत्सव पर हुआ आध्यात्मिक भजन संध्या का आयोजन

महावीर जन्मोत्सव पर हुआ आध्यात्मिक भजन संध्या का आयोजन

नोएडा। जैन समाज एक्सप्रेसवे नोएडा ए-103 सेक्टर 93 बी के सौजन्य से महावीर जन्मोत्सव पर आध्यात्मिक भजन संध्या का आयोजन धूमधाम व भव्यता पूर्वक मनाया गया। इस मौके पर अन्तरध्यानी फेस संजीव शास्त्री एवं उनके  कलाकारों ने ' क्षणभंगुर संसार आ कुंद कुंद का वैराग्य' पर अद्भुत नृत्य नाटिका प्रस्तुत किया, जिसपर दर्शक झूमते नजर आए।

इस मौके पर गुरुवार सुबह 8 बजे नोएडा ए-103, सेक्टर 93 बी पर जैन मंदिर से महावीर स्वामी के एक भव्य बैलगाड़ी रथयात्रा निकाली गई जिसमें जैन समाज के हजारों भक्त जय जिनेंद्र का जयघोष करते हुए आसपास के क्षेत्रों में भ्रमण किया।

इस पुनीत अवसर पर जैन समाज एक्सप्रेसवे नोएडा के प्रमुख सुनील जैन ने बताया कि जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी अहिंसा के मूर्तिमान प्रतीक थे। उनका जीवन त्याग और तपस्या से ओतप्रोत था। उनके पास एक लँगोटी तक का परिग्रह नहीं था । हिंसा, पशुबलि, जाति-पाँति के भेदभाव जिस युग में बढ़ गए थे, उसी युग में पैदा हुए थे महावीर स्वामी।

उन्होंने बताया कि महावीर स्वामी ने अपने प्रवचनों में अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह पर सबसे अधिक जोर दिया। त्याग और संयम, प्रेम और करुणा, शील और सदाचार ही उनके प्रवचनों का सार था।

महावीर स्वामी ने श्रमण और श्रमणी, श्रावक और श्राविका, सबको लेकर चतुर्विध संघ की स्थापना की। उन्होंने कहा- जो जिस अधिकार का हो, वह उसी वर्ग में आकर सम्यक्त्व पाने के लिए आगे बढ़े। जीवन का लक्ष्य है समता पाना। धीरे-धीरे संघ उन्नति करने लगा। देश के भिन्न-भिन्न भागों में घूमकर भगवान महावीर ने अपना पवित्र संदेश फैलाया।

सुनील जैन ने कहा कि आज के समय में भी स्वामी महावीर की शिक्षाएं उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी प्राचीन काल में हुआ करती थीं। आज के समय में जब झूठ, लालच, हिंसा और धोखा इतना बढ़ चुका है, ऐसे समय में स्वामी महावीर जैन की शिक्षाएं और भी महत्वपूर्ण बन पड़ती हैं। 
उन्होंने बताया कि एक बेहतर समाज बनाने के लिए लोगों को भगवान महावीर की शिक्षाओं का अनुसरण करना चाहिए। श्री जैन ने कहा कि
स्वामी महावीर ने जैन धर्म के उत्थान के लिए बहुत कार्य किए थे।

स्वामी महावीर ने जैन धर्म के तत्वों को विस्तार प्रदान किया। उन्होंने अपने अनुयायियों को जैन धर्म के बारे में स्पष्ट और आसानी से समझे जा सकने वाले उपदेश प्रदान किए थे। उन्होंने जैन धर्म का दूर दूर तक प्रचार प्रसार करने में भी बड़ी भूमिका निभाई थी। उनकी वजह से जैन धर्म भारत के विभिन्न हिस्सों और पड़ोसी राज्यों तक भी फ़ैल सका।
इस अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए जलपान और भंडारे की उत्तम व्यवस्था की गई थी।

कार्यक्रम में मोहित जैन, रोहित जैन, शरद जैन, विपिन मल्हन सहित भारी संख्या में जैन समाज के लोग शामिल हुए।