कोविड के उपरांत समावेशी, उपलब्धता और स्थायी विश्व का निर्माण - भारतीय परिपेक्ष्य में विषय पर हुई परिचर्चा
नोएडा।PNI News। एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ रिहेबिलटेशन सांइसेस द्वारा अंर्तराष्ट्रीय विकलांगता व्यक्ति दिवस पर ‘‘ कोविड के उपरंात समावेशी, उपलब्धता और स्थायी विश्व का निर्माण - भारतीय परिपेक्ष्य में’’ विषय पर परिचर्चा सत्र का आयोजन किया गया। इस परिचर्चा सत्र में नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ द एंपावरमेंट ऑफ पर्सन्स विथ इंटेलेक्चुअल डिसेबिलिटीज की पूर्व उप निदेशिका डा जयंथी नारायण, अली यावर जंग इंस्टटियूट ऑफ स्पीच एंड हियरिंग डिसेबिलिटीज के पूर्व निदेशक डा रांगासाई, नई दिल्ली के टेलीकॉम लाइव की संपादक डा रश्मी दास और अहमदाबाद के द ब्लाइंड पीपल एसोसिएशन के एक्जीक्यूटिव सेक्रेटरी डा भूषण पूनानी ने अपने विचार व्यक्त किये। इस अवसर पर एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ रिहेबिलटेशन सांइसेस की निदेशिका डा जयंती पूजारी ने अतिथियों का स्वागत किया।
परिचर्चा सत्र में नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ द एंपावरमेंट ऑफ पर्सन्स विथ इंटेलेक्चवुअल डिसेबिलिटीज की पूर्व उप निदेशिका डा जयंथी नारायण ने संबोधित करते हुए कहा कि हमारा उददेश्य विशेष शिक्षकों को हर प्रकार के छात्रों के लिए प्रशिक्षित करने का होना चाहिए। शिक्षक को दिव्यांग छात्रों के लिए कार्य करना आना चाहिए। हमें शिक्षकों को बेहतर तरीके से सुसज्जित करने की आवश्यकता है। नये पाठयक्रम में कोविड के दौरान आपदा प्रबंधन को जोड़ा गया जिसमें ऐसे वक्त में दिव्यांग छात्रों के लिए किस प्रकार कार्य करें इसके लिए प्रशिक्षण प्रदान करना होगा। हमे समावेशी शिक्षा के लिए प्रयासरत रहना चाहिए किंतु शिक्षा की गुणवत्ता को बरकरार रखना चाहिए।
अली यावर जंग इंस्टटियूट ऑफ स्पीच एंड हियरिंग डिसेबिलिटीज के पूर्व निदेशक डा रांगासाई ने कहा कि कोविड के दौरान हमने बधिर छात्रों को ई मेल लिखने, विडियों संदेशों द्वारा बात करने के लिए प्रेरित किया। उन्होनें कहा कि कई प्रकार की समस्याओं के निवारण मौजूद है केवल उसके अनवारण की आवश्यकता है। दिव्यांग छात्रों को तकनीकी के उपयोग से जोड़ना होगा।
नई दिल्ली के टेलीकॉम लाइव की संपादक डा रश्मी दास ने कहा कि हाई फंक्शनिंग ऑटिज्म और लो फंक्शनिंग ऑटिज्म जैसे शब्दों को मिटाना होगा। इसके अतिरिक्त कई विशेष छात्रों के शिक्षक कहते है कि यह छात्र पर निर्भर करता है जिसमें वो अपनी जिम्मेदारी को छात्रों और उनके अभिभावकोें पर डालते है। कोविड के दौरान नये दिव्यांग छात्रों की समस्या उत्पन्न हुई जहां उनके अभिभावकों को पता नही चल पाया कि क्या करना है। हमें विषय आधारित विशेष शिक्षकों की आवश्यकता है। उन्होनें कहा कि शिक्षण संस्थानों को बहुविषयक क्षमता वाले विशेष शिक्षकों को विकसित करना चाहिए।
अहमदाबाद के द ब्लाइंड पीपल एसोसिएशन के एक्जीक्यूटिव सेक्रेटरी डा भूषण पूनानी ने कहा कि हमें दिव्यांग जनों के आमदनी के अवसरों, सभी लाभों, वित्तीय सहायता और स्वास्थय आदि को पहचानना चाहिए। सामजिक न्याय विभाग को उपरोक्त कार्यो के बजट में विशेष प्रावधान रखने के लिए सक्रिय होना चाहिए। उन्होनें कहा कि एक प्रश्न अनुत्तीर्ण है कि कोविड के दौरान दिव्यांगजनों की सुरक्षा और देखभाल किस प्रकार सुनिश्चित होगी। उन्होनें द ब्लाइंड पीपल एसोसिएशन द्वारा दिव्यांग जनों के लिए किये गये पहलों की जानकारी प्रदान की।
एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ रिहेबिलटेशन सांइसेस की निदेशिका डा जयंती पूजारी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि इस प्रकार की परिचर्चा सत्रों द्वारा हम भविष्य के शिक्षकों और विशेष शिक्षकों को विशेष छात्रों के लिए कार्य करने हेतु प्रेरित करते है जिससे वे विशेष छात्रों के सामवेशी विकास में सहायक बन सके। कोविड के दौरान और उसके उपरांत विश्व में दिव्यांगजनों छात्रों के लिए विशेष पहल की गई उसके संर्दभ में छात्रों को जानकारी प्रदान की गइ। इस अवसर पर एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ रिहेबिलटेशन सांइसेस की डा संपूर्णा गुहा, डा अनुसूया यादव उपस्थित थी।


