प्रौद्योगिकी एंव नवाचार - विकसित भारत@2047 की परिवर्तनकारी यात्रा के लिए उत्प्रेरक’ पर अमृतकाल विमर्श का हुआ आयोजन
नोएडा। एमिटी विश्वविद्यालय के एमिटी स्कूल ऑफ इंजिनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी द्वारा प्रौद्योगिकी एंव नवाचार - विकसित भारत@2047 की परिवर्तनकारी यात्रा के लिए उत्प्रेरक’’ पर अमृतकाल विमर्श का आयोजन किया गया। इस परिचर्चा सत्र में भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के प्रधान सलाहकार और मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी श्री गोलोक कुमार सिमली, आईबीएम कंसल्टिंग के स्ट्रैटजिक पाटर्नर लीडर की पार्टनर सुश्री लता सिंह और एमिटी स्कूल ऑफ इंजिनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के निदेशक डा मनोज पंाडेय द्वारा किया गया।
इस कार्यक्रम का उददेश्य छात्रों को विकसित भारत@2047 के लक्ष्य को साकार करने में छात्रों को भाग लेने और योगदान करने के लिए प्रेरित करना है। विदित हो कि विकसित भारत@2047 अभियान के तहत एमिटी विश्वविद्यालय ने छात्रों को प्रधानमंत्री श्री नरेद्र मोदी जी के पहल के अनुरूप, विकसित भारत के दृष्टिकोण पर अपने नवीन विचारों को साझा करने के लिए आमंत्रित किया है।

परिचर्चा सत्र में भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के प्रधान सलाहकार और मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी गोलोक कुमार सिमली ने संबोधित करते हुए कहा कि भारत एक लोकतंत्र है जहां इसके नागरिक अपने विचारों को साझा करने और व्यक्त करने के लिए स्वतंत्र है। डिजिटल लोकतंत्र में विविध प्रकार के उपकरण शामिल है जो मौजूदा और उभरते दोनो सूचना स्त्रोतों का उपयोग करते है। उन्होनें कहा कि सार्वभौमिक डिजिटल साक्षरता की आवश्यकता है ताकि देश का प्रत्येक नागरिक डिजिटल साक्षर हो। उन्होनें वंचित वर्गो के उत्थान और समान पहुंच सुनिश्चित करने में प्रौद्योगिकी की भूमिका पर जोर दिया।

आईबीएम कंसल्टिंग के स्ट्रैटजिक पाटर्नर लीडर की पार्टनर लता सिंह ने प्रौद्योगिकी की गतिशील प्रकृति पर जोर दिया और निरंतर अनुकूलन की आवश्यकता बताई सहित जेनेरेटिव एआई के महत्व, एआई रूझानों पर नजर रखने और कौशल की भूमिका पर चर्चा की। उन्होनें कहा कि आज का युग डिजिटल युग है जहंा तकनीक जीवन के हर पहलू में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। प्रौद्योगिकी लगातार विकसित हो रही है इसलिए तेजी से बदलती नवीनतम तकनीक अपनाने की आवश्यकता है।
एमिटी स्कूल ऑफ इंजिनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के निदेशक डा मनोज पंाडेय ने ‘‘विकसित भारत’’ अवधारणा और भारत के स्वर्ण युग के बीच समनताएं दर्शाते हुए हुए कहा कि देश के भविष्य को आकार देने में शैक्षणिक संस्थानों को विशेष भूमिका अदा करनी होगी। उन्होनें छात्रों से विकसित भारत@2047 में भाग लेने और सरकार के साथ नवीन विचारों को साझा करने का आह्वान किया 2047 मेें विभिन्न पहलुओं में विकसित भारत कैसा दिखना चाहिए और इस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए छात्रों को क्या करने की आवश्यकता है।
इस परिचर्चा सत्र का संचालन एमिटी स्कूल ऑफ इंजिनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी की उपनिदेशक डा माधुरी कंुमारी द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम में छात्र, शोधार्थीयों और शिक्षक भी उपस्थित थे।


