बिना किताब ही बीत गया बच्चों का आधा शैक्षिक सत्र

गाजीपुर : परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों का आधा शैक्षिक सत्र बिना किताब व ड्रेस के ही बीत गया। इसके बाद भी अभी तक सभी को किताबें नहीं वितरित हो पाई हैं और न ही ड्रेस व बस्ते आदि का पैसा मिल सका है। उनके पिछले वर्ष वाले जूते व बैग फट गए हैं। इससे बच्चों के साथ शिक्षकों को भी पढ़ाने में परेशानी हो रही है, लेकिन सरकार का ध्यान शायद इधर नहीं है।

जनपद के 2269 परिषदीय विद्यालयों में लगभग साढ़े तीन लाख छात्र-छात्राएं पढ़ाई करते हैं। सरकार की योजना के तहत इन छात्रों को निश्शुल्क किताबों का वितरण किया जाता है। इसके लिए लगभग 21 लाख किताबों की आवश्यकता है। ये किताबें जिला मुख्यालय पर पहुंचने लगी हैं। अभी तक जिला मुख्यालय पर इन छात्र-छात्राओं को निश्शुल्क वितरण के लिए लगभग पांच लाख किताबें ही पहुंच गई हैं। अधिकारियों ने इन किताबों का सत्यापन किया। अब इनका वितरण किया जाने लगा है। यही नहीं, किसी भी कक्षा की पूरी किताब नहीं आ सकी है।

पहले चरण में भेजी 1.53 लाख बच्चों को राशि

: ड्रेस, स्वेटर, स्कूल बैग, जूता-मोजा व स्टेशनरी क्रय करने के लिए प्रति छात्र-छात्राओं को 1200 रुपये की धनराशि उनके अभिभावकों के बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से अंतरण प्रक्रिया का शुभारंभ कर दिया गया है। पहले चरण में 1.53 लाख बच्चों को भेजी जा चुकी है और दूसरे चरण में भेजने की तैयारी है। सरकार की इस योजना का मुख्य उद्देश्य कि अभिभावक अपने बच्चों के लिए उनके पसंदीदा यूनिफार्म स्कूल बैग जूते मोजे स्वेटर आदि ले सकते हैं। क्योंकि पहले बच्चों के साइज और क्वालिटी को लेकर अक्सर विवाद होता रहता था लेकिन सीधे खाते में मिली धनराशि से अब वह अपनी पसंद और साइज के ड्रेस व जूते ले सकते हैं।

- कुल परिषदीय स्कूल : 2269

- कुल पंजीकृत बच्चे : साढ़े तीन लाख

- किताबें चाहिए : 21 लाख

- अब तक आईं किताबें : पांच लाख

- अब तक भेजी गई रकम : 1.53 लाख बच्चे

--------------------

जैसे-जैसे किताबें आ रही हैं, उनका वितरण किया जा रहा है। शीघ्र ही सभी बच्चों को किताबें उपलब्ध करा दी जाएंगी। वहीं ड्रेस व जूते आदि के लिए एक लाख 53 हजार बच्चों के खाते में राशि भेजी जा चुकी है। शेष बच्चों को भेजी जा रही है।

- हेमंत राव, बीएसए।