'एक शाम असर देहलवी के नाम' मुशायरे के साथ हुआ 'आग़ाज़' का विमोचन

'एक शाम असर देहलवी के नाम' मुशायरे के साथ हुआ 'आग़ाज़' का विमोचन

ऑल इंडिया मुशायरा के साथ किताब "आग़ाज़" का भी विमोचन

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली की अदबी फिज़ाओं में शुक्रवार को शायरी की एक खूबसूरत शाम सजी। जनता की खोज मीडिया ग्रुप फनकार कल्चर ग्रुप और अखिल भारतीय उर्दू-हिन्दी एकता अंजुमन के संयुक्त तत्वावधान में दिल्ली निर्माण विहार स्थित एस.एस.एस. स्टूडियो में "एक शाम असर देहलवी असर के नाम" शीर्षक से भव्य मुशायरे का आयोजन किया गया।

यह मुशायरा मेरठ के प्रसिद्ध शायर असर देहलवी असर के जन्म दिवस के मुबारक मौके पर आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में ऑल इंडिया मुशायरा के साथ-साथ असर देहलवी की ग़ज़लों की किताब "आग़ाज़" का विमोचन भी किया गया।

खुर्रम नूर ने की सदारत
मुशायरे की सदारत देश के जाने-माने शायर *जनाब खुर्रम नूर साहब* ने फरमाई। कार्यक्रम के संयोजक *एहतराम सिद्दीकी* ने बताया कि इस मुशायरे में देश भर से आए कवियों और शायरों ने शिरकत की।

*मुख्य मेहमान* के रूप में *खुमार देहलवी*, *मेहमान-ए-ज़ी-वकार डॉ. वसीम राशिद साहिबा* और *स्पेशल गेस्ट साहित्य चंचल साधक व किरन सिंह* उपस्थित रहे।  
मुशायरे की निज़ामत उर्दू-हिन्दी एकता अंजुमन के अध्यक्ष और जाने-माने शायर *असलम बेताब* ने अपने खूबसूरत अंदाज़ में की*इन शायर-शायरात ने बांधा समां*  
मंच से *खुमार देहलवी, फहीम, सरफराज देहलवी, ताबिश खैराबादी, हाशिम देहलवी, सैयद गुफरान, अशोक साहिब, अनस फैज़ी, आरिफ देहलवी, दर्द देहलवी, हश्मत भारद्वाज, वफा आज़मी, नुरुज़ ज़मा शादान हसन, पवन तोमर, सुरेश चौरसिया, जावेद अब्बासी, अरसान, गोल्डी ‘ग़ज़ब’, सुरेंदर सिफर, रंजन शर्मा* सहित कई शायरों ने अपना कलाम पेश किया।
वहीं *किरन सिंह, हुमा देहलवी, सबीना सरताज, अनिका एम, रोज़ी खान* जैसी शायरात ने भी अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।


खाबों की जागीर के आगे बैठ गये 
हम  तेरी  तस्वीर के आगे  बैठ गये 
               असलम बेताब 

तंग बस्ती से तुम निकल आओ 
इस से पहले की शाम हो  जाये 
            असर देहलवी असर 
एहसान दुश्मनों पे  हमारा है दोस्तों 
हम ने तो दोस्तों को भी मारा है दोस्तों 
       एहतराम सिद्दीकी 

याद उस बे वफ़ा की आई है 
आसुओ  ने   झड़ी लगाई है 
            जावेद अब्बासी
अल्लाह ने हसीन बनाया है आपको 
वल्लाह दिलनशीन बनाया है आपको 
    आरिफ़ देहलवी


आयोजक एहतराम सिद्दीकी ने कहा कि यह मुशायरा उर्दू और हिन्दी दोनों भाषाओं के संगम का खूबसूरत उदाहरण रहा, जिसमें देश की गंगा-जमुनी तहज़ीब की झलक देखने को मिली। देर रात तक चले इस मुशायरे में बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।