मेडिकल बायोटेक्नोलॉजी पर आयोजित त्रिदिवसीय अंर्तराष्ट्रीय सम्मेलन आईसीओएमबी 2026 का समापन
छात्रों और शोधार्थियों को मेडिकल बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अनुसंधान के लिए प्रेरित करने हेतु और अकादमिकों, शोधार्थियों, वैज्ञानिको, उद्यमियों को चर्चा के लिए मंच प्रदान करने हेतु एमिटी विश्वविद्यालय के एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी द्वारा मेडिकल बायोटेक्नोलॉजी पर आयोजित त्रिदिवसीय ( 07 से 09 जनवरी 2026) अंर्तराष्ट्रीय सम्मेलन ‘‘आईसीओएमबी 2026’’का आज समापन हो गया। इस समापन समारोह में सोसाइटी फॉर बायोटेक्नोलॉजीस्टीक इंडिया के अध्यक्ष डा एडाथिल विजयन, एमिटी विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर डा बलविंदर शुक्ला, एमिटी सांइस टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन फांउडेशन के अध्यक्ष डा डब्लू सेल्वामूर्ती, एमिटी विश्वविद्यालय के एडिशनल प्रो वाइस चांसलर डा चंद्रदीप टंडन और एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी की निदेशक डा पूजा विजयाराघवन ने अपने विचार रखे।
इस त्रिदिवसीय सम्मेलन के समापन समारोह में मौखिक प्रस्तुतीकरण अवार्ड के अंर्तगत एमिटी विश्वविद्यालय की डा रूपा मिश्रा को प्रथम, एम्स जम्मू के डा मनीष कुमार और आईसीएमआर - एनजीसीपीआर के श्री अग्नीश प्रतीम दास को को संयुक्त रूप से द्वितीय अवार्ड प्रदान किया गया। पोस्टर प्रस्तुतीकरण अवार्ड के अंर्तगत डी वाय पाटिल विश्वविद्यालय की डा हर्षिता लोखंडे को प्रथम अवार्ड, एमिटी विश्वविद्यालय की सुश्री मुस्कान सैयद को द्वितीय अवार्ड और एमिटी विश्वविद्यालय की सुश्री एपी तेलोंत को तृतीय अवार्ड प्रदान किया गया। इस अवसर एमिटी विश्वविद्यालय की सुश्री शिरंजीनी सेन, राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा संस्थान की सुश्री कस्तुरी गांगुली, एनआईएसटी विश्वविद्यालय उड़ीसा के अभिनाश दत्ता, एमिटी विश्वविद्यालय के तन्मय आदि का एसबीटीआई अवार्ड प्रदान किया गया।
समापन समारोह में सोसाइटी फॉर बायोटेक्नोलॉजीस्टीक इंडिया के अध्यक्ष डा एडाथिल विजयन, ने संबोधित करते हुए कहा कि यह मेडिकल बायोटेक्नोलॉजी पर आधारित बेहतरीन सम्मेलन था जहां पर देश विदेश के विद्वान और विशेषज्ञ एक मंच पर एकत्र हुए। वैज्ञानिक चर्चा की बेहतरीन गुणवत्ता भावी शोधार्थियेा को शोध के नये अवसर प्रदान करेगी। यह सम्मेलन छात्रों को रोजगार निर्माण करने वाले उद्यमी बनने का अवसर प्रदान करेगा।
एमिटी विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर डा बलविंदर शुक्ला ने कहा कि इस त्रिदिवसीय सम्मेलन ने एमिटी विश्वविद्यालय के पर्यावरण को वैज्ञानिकी बना दिया। सम्मेलन के जरीए अकादमिक, उद्योग, सरकारी एंजेसीयों के मध्य आपसी सहयोग को विकसित कर एक मजबूत सबंध स्थापित करना है। एमिटी छात्रों को राष्ट्र निर्माण के लिए तैयार कर रहा है और देश को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए मेडिकल बायोटेक्नोलॉजी का सहयोग आवश्यक है।
एमिटी सांइस टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन फांउडेशन के अध्यक्ष डा डब्लू सेल्वामूर्ती ने कहा कि 21वी सदी बायोतकनीकी की होगी जहां आपके लिए बहुत वैश्विक अवसर प्राप्त होगे। वर्तमान में जीन थेरपी, सिथेंसिस बायोलॉजी, क्षेत्र अधारित निदान या प्रभावी लागत निदान, वैक्सीनेशन आदि क्षेत्रो में अनुसंधान सहित नवाचार के अवसर है। उन्होनें कहा कि नये औषधियों की खोज के लिए एआई उपकरणों का उपयोग करे। इस प्रकार के सम्मेलन आपकी क्षमता का विकास करेगी और हमे मिलकर संयुक्त प्रयास करना है।
समापन समारोह में सम्मेलन के सहअध्यक्ष डा सुदीप बोस, प्रो अमिताभा मुखोपाध्याय, सचिव डा बनाश्री बंदोपाध्याय ने भी विचार व्यक्त किये।


