नई मूर्तियों के लिए पुरानी मूर्तियों को घर से बाहर रखने का ये कैसा चलन है - आर. एन. श्रीवास्तव

नई मूर्तियों के लिए पुरानी मूर्तियों को घर से बाहर रखने का ये कैसा चलन है - आर. एन. श्रीवास्तव

नोएडा। विजयादशमी और दीपावली के त्यौहार बहुत धूमधाम से मनाए जाते हैं और अपने इष्ट देवी देवताओं की नई मूर्तियां और नई फोटो अपने मंदिर में सजाए जाते हैं लेकिन इनकी जगह बनाने के लिए पुरानी मूर्तियां और पुराने फोटो घर के आसपास किसी भी पीपल के पेड़ के नीचे या किसी भी अन्य पेड़ के नीचे चुपचाप रख कर चले आते हैं ये कैसा चलन चल रहा है। घर से निकली हुई खंडित मूर्तियां सड़क किनारे रख दी जाती हैं जिस पर कुछ असभ्य लोग घर का कूड़ा भी फेंक देते हैं जोकि बहुत ही शर्मनाक है ऐसा कहना है नोएडा अथॉरिटी से सेवानिवृत्त आर. एन. श्रीवास्तव का, जो नोएडा में जगह जगह जाकर ऐसी मूर्तियां और फोटो को एकत्रित करके उन्हें उचित स्थान पर पहुंचाते हैं।

आर. एन. श्रीवास्तव का कहना है कि हम लोग ऐसा करके अपने धर्म और अपनी धार्मिक भावनाओं का स्वयं ही अनादर करते हैं। हम पिछले कुछ वर्षों से शहर के अनेक स्थानो से ऐसी पुरानी मूर्तियो और फोटो आदि को संकलित कर उन्हें उचित स्थान पर पहुंचाने का काम कर रहे है। इसी क्रम में आज हमने ग्राम छलेरा बरात घर के सामने खड़े पीपल के पेड़ के नीचे से अनेक मूर्तियां फोटो आदि संकलित किए गए है।

इस बार एक सकारात्मक बात और हुई कि मूर्तियों का संकलन करते हुए देख कर छलेरा के और वहां से गुजरने वाले कुछ लोग भी  उन मूर्तियों को और फोटोस को वैन में रखे ड्रम में रखने में स्वयं ही सहयोग देने लगे।

इस काम में शुरू के दो दिन कूड़ा बीनने वाला एक 8/9 साल का लड़का आकाश  ने मेरा खूब साथ दिया जिसकी आप ऊपर फोटो भी देख सकते हैं।।आज तीसरे दिन जब सेक्टर 43 की तरफ से मूर्तियां उठानी शुरू की तो पार्क में बैठे 3 लोग भी स्वेच्छा से मूर्ति उठाने में सहयोग करने लगे।

और तो और वहां पर मूर्ति फेंकने आया एक युवक भी साथ में मूर्ति आदि उठाने में लग गया। बरौला के राजीव सिंह, छलेरा के नरेंद्र सिंह और एक अन्य युवक भी पूरे उत्साह से साथ लगे।इन लोगों ने यह भी संकल्प लिया कि अपने गांव में पड़ोस में सब लोगों को इस संबंध में जागरूक करेंगे और अगले वर्षों में गांव के आसपास प्रधान के माध्यम से या सरकारी माध्यम से या व्यक्तिगत प्रयत्नों से एक बड़ा गड्ढा बनाएंगे जिसमें लोगों को मूर्तियां पुरानी मूर्तियां डालने के लिए प्रेरित किया जाएगा और उस गड्ढे को पानी से भर देंगे ताकि मूर्तियां उसमें घुल जाएं और अपने समय में मिट्टी में समा जाएं।

उल्लेखनीय यह है कि वहां से गुजरने वाले हर व्यक्ति ने इस प्रकार मूर्तियों को फेंकना गलत बताया और धर्म का अपमान बताया। उचित स्थान के ना होने के कारण लोगों को मूर्तियां इस प्रकार फेंकनी पड़ती हैं। समाज के लोग इस प्रकार जागरूक होते जाएं तो शायद हम लोगों की थोड़ी सी लापरवाही और आलस्य के कारण हमारे देवी-देवताओं की मूर्तियां फोटो आदि सामग्री कूड़े में ना फेंकी जाएं। इस काम में उनके ड्राइवर श्याम कुमार भी पूरी तन्मयता से सहयोग करते हैं।