अब सांसद नहीं रहे अफजाल अंसारी

अब सांसद नहीं रहे अफजाल अंसारी

गाजीपुर सियासत में अपना सिक्का जमा चुके सांसद अफजाल अंसारी अब सांसद नहीं रहे। जेल जाने के बाद से ही चर्चा का विषय बना हुआ था अब हर चौक चौराहे पर लोगों के बीच उत्सुकता बना हुआ है क्या ज्ञान जी पूर्व जनपद में एक बार फिर से होगा लोकसभा का उपचुनाव अगर ऐसा होता है तो अंसारी बंधुओं की दूरी के बाद राजनीति में एक नया इतिहास जुड़ सकता है।

 जिले की लोकसभा सीट से पहली बार प्रतिनिधित्व करने पहुंचा तो वर्ष 2005 में कृष्णानंद राय की हत्या के मामले में वह जेल चला गया। दोबारा जब जीत कर सांसद बना तो गैंगस्टर मामले में चार साल की सजा मिलने के कारण उसकी सदस्यता समाप्त हो गई।अफजाल ने चुनाव में चार बार किस्मत आजमाई। इसमें दो बार जीत का सेहरा बंधा। जिले ही नहीं, आसपास के अन्य जिलों की सियासत में गहरी पकड़ रखता था। उसे पूर्वांचल का राजनीतिक पंडित बताया जाता था। अफजाल को राजनीतिक की ऐसी जानकारी थी कि हर कोई उसका लोहा मानता रहा लेकिन अपराध का आंकड़ा ऐसा भारी पड़ा कि उसका खुद का राजनीतिक भविष्य दांव पर लग गया। अफजाल अंसारी के पिता सुभानल्लाह अंसारी वर्ष 1977 से लेकर करीब दस वर्ष तक मुहम्मदाबाद टाउन एरिया के चेयरमैन रहे। इस दरम्यान अफजाल पिता की विरासत को संभालने की तैयारियों में जुटा रहा। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उपजी सहानुभूति की लहर में कांग्रेस ने जिले की सात विधानसभा सीटों में से छह पर कब्जा तो कर लिया, लेकिन मुहम्मदाबाद की सीट नहीं जीत सकी। किस्मत रंग लाई और अफजाल भाकपा के टिकट पर पहली बार विधानसभा पहुंचा। इसके बाद वह राजनीति की सीढि़यां चढ़ता चला गया। इसके बाद ऐसा समय आया, जब जिले में उसकी सियासत का सिक्का चलने लगा। शायद यही वजह रही कि मुहम्मदाबाद सीट से वह पांच बार विधायक बना। वर्ष 2004 में सपा के टिकट पर जीतकर लोकसभा तो पहुंचा, लेकिन 29 नवंबर 2005 में कृष्णानंद राय समेत सात लोगों की हत्या की साजिश के आरोप में सलाखों के पीछे चला गया। वर्ष 2009 में सपा से टिकट नहीं मिलने पर बसपा का दामन थाम लिया और टिकट लेकर लोकसभा चुनाव में किस्मत आजमाई, लेकिन हार का मुंह देखना पड़ा। तीसरी बार कौमी एकता दल बनाकर वर्ष 2014 में बलिया लोकसभा से चुनावी मैदान में कूदा लेकिन सफलता हाथ नहीं लग सकी। चौथी बार 2019 में सपा, बसपा, रालोद गठबंधन के संयुक्त प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा और लोकसभा पहुंच तो गया लेकिन अब अर्श से फर्श पर आ गया।