'मोदी: एनर्जाइजिंग ए ग्रीन फ्यूचर' पुस्तक का भूपेन्द्र यादव ने किया विमोचन

'मोदी: एनर्जाइजिंग ए ग्रीन फ्यूचर' पुस्तक का भूपेन्द्र यादव ने किया विमोचन

वैश्विक मंच पर माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का साहसिक पर्यावरण नेतृत्व।

नई दिल्ली। हरित भविष्य के प्रति भारत की साहसिक प्रतिबद्धता के बीच 'मोदी: एनर्जाइज़िंग ए ग्रीन फ़्यूचर' पुस्तक का अनावरण हो रहा है। पुस्तक का आज आधिकारिक तौर पर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन तथा श्रम एवं रोजगार के केंद्रीय कैबिनेट मंत्री भूपेन्द्र सिंह यादव द्वारा विमोचन किया गया।

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन के सहयोग से पेंटागन प्रेस द्वारा प्रकाशित, 'मोदी: एनर्जाइजिंग ए ग्रीन फ्यूचर' भारत और दूसरे राष्ट्रों के प्रतिष्ठित निर्णय निर्माताओं एवं प्रख्यात विशेषज्ञों द्वारा योगदान की गई अंतर्दृष्टि का एक संग्रह है। सम्मानित योगदानकर्ताओं में भूपेन्द्र यादव, केंद्रीय कैबिनेट मंत्री; मनोहर लाल, हरियाणा के मुख्यमंत्री;  आर.के. पचनंदा, पूर्व अध्यक्ष, हरियाणा विद्युत नियामक आयोग; प्रोफेसर बिबेक देबरॉय एवं अन्य प्रतिष्ठित योगदानकर्ताओं में डॉ. अनिर्बान गांगुली, डॉ. उत्तम सिन्हा, हनीफ कुरेशी, प्रतिम रंजन बोस, सुश्री लिडिया पॉवेल, एंड्रेस कार्वालो शामिल हैं।

यह पुस्तक पर्यावरण नेतृत्व में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अग्रणी प्रयासों का व्यापक विश्लेषण प्रस्तुत करती है, जो भारत की महत्वाकांक्षी पहल एवं टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल भविष्य की दिशा में योगदान पर प्रकाश डालती है। COP26 ग्लासगो (नवंबर 2021) में प्रधान मंत्री मोदी ने कहा था, “आज, भारत ने एक नई प्रतिबद्धता और नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने का संकल्प लिया है। इसलिए ऐसे समय में जलवायु वित्त और कम लागत वाली जलवायु प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। भारत को उम्मीद है कि विकसित देश जल्द से जल्द 1 ट्रिलियन का जलवायु वित्त प्रदान करेंगे। आज यह आवश्यक है कि जैसे हम जलवायु शमन में हुई प्रगति पर नज़र रखते हैं, वैसे ही हम जलवायु वित्त पर भी नज़र रखें। उचित न्याय तो यही होगा कि जो राष्ट्र जलवायु वित्त पर किये गये वादे पर खरे नहीं उतरते, उन पर भी दबाव डाला जाना चाहिए।”

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन तथा श्रम एवं रोजगार के केंद्रीय कैबिनेट मंत्री, भूपेन्द्र यादव ने पुस्तक में लिखा है, “स्वतंत्रता के समय बिजली की कमी वाले राष्ट्र से, भारत को ऊर्जा-स्वतंत्र राष्ट्र बनाने के प्रयासों ने 2014 में गति पकड़ी। आज हम 4 लाख मेगावाट से अधिक की कुल स्थापित बिजली क्षमता के साथ एक ऊर्जा अधिशेष राष्ट्र हैं। सतत् विकास लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए, भारत का ऊर्जा उत्पादन मिश्रण तेजी से नवीकरणीय ऊर्जा की अधिक महत्वपूर्ण हिस्सेदारी की ओर बढ़ रहा है। आज, भारत नवीकरणीय ऊर्जा का दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक है, इसकी 40 प्रतिशत स्थापित बिजली क्षमता गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से आती है।

यह पुस्तक महत्वाकांक्षा, नवाचार और जिम्मेदारी पर आधारित भारत के ऊर्जा परिदृश्य का एक मजबूत आख्यान प्रस्तुत करती है।