सर्दी में बच्चों में ब्रोंकाइटिस के मामले में बढ़ोतरी
-तेज ठंड और खराब वायु गुणवत्ता से बच्चों में खांसी–कफ की समस्या ते
-ब्रोंकाइटिस के जोखिम बढ़े, डॉक्टरों ने कहा पेरेंट्स को सावधान रहने की जरूरत
नोएडाः सर्दियों के मौसम में बच्चों में सांस संबंधी रोगों के मामलों में चिंताजनक बढ़ोतरी देखी जा रही है। जिसमें खासकर ब्रोंकाइटिस के लक्षण सामान्य सर्दी-खांसी से बढ़कर गंभीर समस्या का रूप ले रहे हैं। चिकित्सकों के मुताबिक, बदलते तापमान, ड्राई हवा और वायु प्रदूषण बच्चों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर रहे हैं, जिससे वायरल और एलर्जिक ब्रोंकाइटिस के मामले बढ़ रहे हैं। इसलिए सावधानी जरूरी है।
फेलिक्स अस्पताल के पीडियाट्रिशियन डॉ प्रभात कुमार ने बताया कि सर्दियों की तेज ठंड और बढ़ती प्रदूषण स्तर ने बच्चों को सांस संबंधी रोगों के प्रति संवेदनशील बना दिया है, जिससे ब्रोंकाइटिस के मामले बढ़ रहे हैं। सर्दी से बचाव, सही पोषण और समय पर चिकित्सा जांच आवश्यक है। ब्रोंकाइटिस एक श्वसन मार्ग (ब्रांकियल ट्यूब) में सूजन है। जिससे बलगम और कफ बनने लगता है और खांसी लंबे समय तक बनी रहती है। यह सामान्यत वायरल संक्रमण के कारण होता है, खासकर ठंड के मौसम में। डॉक्टर के अनुसार, ब्रोंकाइटिस दो प्रकार का होता है एक्यूट और क्रोनिक। बच्चों में अधिकतर तीव्र ब्रोंकाइटिस देखा जाता है। सर्दी में ब्रोंकाइटिस के साथ निमोनिया और अस्थमा जैसे रोगों का खतरा भी बढ़ जाता है, जिनमें सांस लेने में और अधिक कठिनाई और तेज़ बुखार हो सकता है। बच्चों में वायरल संक्रमण जैसे रेस्पिरेटरी सिंसिशियल वायरस (आरएसवी) के कारण ब्रोंकाइटिस गंभीर रूप ले सकता है, खासकर छोटे बच्चों और शिशुओं में। दुनिया भर में 5 साल से कम उम्र के बच्चों में श्वसन संक्रमण की वजह से लाखों अस्पताल में भर्ती की नौबत आती है। लगभग 90% मामलों में एंटीबायोटिक्स की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि अधिकांश ब्रोंकाइटिस वायरस की वजह से होता है। इलाज का मुख्य लक्ष्य लक्षणों को कम करना और बच्चे को आराम देना होता है। इसके लिए पर्याप्त आराम, तरल पदार्थों का अधिक सेवन. आवश्यक होने पर डॉक्टर के निर्देश पर ही कफ या बुखार की दवा देना बच्चों के कमरे में ह्यूमिडिफायर का उपयोग से राहत मिलती है। यदि खांसी 10 दिनों से अधिक बनी रहे, सांस लेने में कठिनाई हो, बच्चे में तेज बुखार हो, या वे ठीक से खाना-पीना न चाहें, तो तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। सर्दी के मौसम में सांस की बीमारियों में बढ़ोतरी आम बात है। पिछले सर्दियों में जैसे पुणे और नोएडा में ब्रोंकाइटिस और निमोनिया के मरीजों में तेज़ी से वृद्धि देखी गई, अस्पतालों में सांस संबंधी रोगों के मरीजों की संख्या सामान्य समय की तुलना में लगभग 40 % तक बढ़ती है।
लक्षणः
● लगातार खांसी जिसमें कफ निकलता है
● बलगम या कफ का रंग फीका/गुलाबी
● घरघराहट या सांस लेने में कठिनाई
● हल्का बुखार और थकान
● सांस में सीटी की आवाज
बचाव और रोकथामः
● बच्चों को गर्म कपड़े पहनाएं और ठंडी हवा से बचाएं।
● बार-बार हाथ धोना और गले/नाक ढक कर रखना सर्दी के वायरस फैलने को रोकता है।
● धूल, धुआं और प्रदूषण से बचाव, खासकर बाहर खेलने के बाद साफ-सफाई।
● समय पर टीकाकरण और फ्लू शॉट लेने से वायरल संक्रमण के जोखिम कम होते हैं।


