देशभर में 154 स्थानों पर ‘गुरुपूर्णिमा महोत्सव’ भावपूर्ण वातावरण में मनाया गया
‘सुखस्य मूलं धर्मः।’, अर्थात सुख का मूल धर्माचरण में है । यदि समाज और राष्ट्र को सुचारू रूप से चलाना है तो सभी क्षेत्रों में धर्म की स्थापना आवश्यक है । व्यक्तिगत या सामाजिक जीवन में धर्म का अधिष्ठान आने से वह व्यक्ति नीतिवान बनता है और कुछ भी गलत काम करने से बचता है। इसलिए धर्म का अधिष्ठान हुआ, तो ही धर्माधारित यानि आदर्श समाज का निर्माण हो सकता है । इसलिए राष्ट्र को वास्तविक रूप से उर्जितावस्था प्राप्त करनी हो, तो धर्माधारित हिन्दू राष्ट्र की आवश्यकता है। उसके लिए प्रत्येक को धर्मशिक्षा लेकर, धर्माचरण कर धर्माधारित समाज का निर्माण और धर्माधारित हिन्दू राष्ट्र स्थापना के लिए सक्रिय होना चाहिए । कालानुसार हिन्दू राष्ट्र के लिए योगदान देना श्रीगुरु के समष्टि रूप की सेवा ही है, ऐसा प्रतिपादन सनातन संस्था की कु. कृतिका खत्री ने इस अवसर पर किया।

नोएडा सेक्टर 12 के ईशान म्यूजिक सेंटर में आयोजित गुरुपूर्णिमा महोत्सव में वे बोल रही थी। देशभर में कुल 154 स्थानों पर ‘गुरुपूर्णिमा महोत्सव’ भावपूर्ण वातावरण में मनाया गया।
उन्होंने आगे बताया कि आज सनातन धर्म की शिक्षा कहीं नहीं दी जा रही है, जिसके कारण आज पति पत्नी के परिवार में संबंध खराब हो रहे हैं। पति, पत्नी पर अत्याचार कर रहा है। पत्नी, पति पर झूठी एफआईआर करवा रही है । अनैतिक संबंध, माता-पिता का वृद्ध आश्रम में होना, बच्चों में नैतिक संस्कार ना होना यह सब आज के समाज में नजर आ रहा है। धर्म लुप्त हो रहा है। व्यक्ति के जीवन में धर्म शिक्षा और धर्म पालन के अभाव में अनेक समस्याओं का निर्माण हो रहा है। इस देश में बहुसंख्यक हिंदुओं की हत्याएं हो रही हैं। इसका समाधान समाज में धर्म शिक्षा का प्रसार है और जिसके साथ भगवान श्रीकृष्ण हैं उनका रक्षण अवश्य होगा। धर्माधिष्ठित हिन्दू राष्ट्र की स्थापना हेतु प्रयास हम सभी का कर्त्तव्य है। गुरु-शिष्य परंपरा के बारे बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत के इतिहास में जब-जब भी धर्म पर संकट आया है तो गुरु शिष्य परंपरा ने सनातन हिंदू धर्म की रक्षा की है। समर्थ रामदास स्वामी- छत्रपति शिवाजी महाराज, आचार्य चाणक्य-चन्द्रगुप्त इत्यादि अनेक गुरु शिष्य ने धर्म की रक्षा की है । आज का काल युग परिवर्तन का काल है। इसके लिए हमें यह समझने की आवश्यकता है कि धर्म क्या है और उसके अनुरूप ही आचरण करने की आवश्यकता है।
महोत्सव के प्रारंभ में श्रीव्यास पूजा और प.पू. भक्तराज महाराजजी की प्रतिमा का पूजन किया गया । तत्पश्चात परात्पर गुरुदेव डॉक्टर जयंत आठवले श द्वारा संकलित और सनातन संस्था द्वारा प्रकाशित ग्रंथों का विमोचन किया गया।
देशभर में हुए गुरुपूर्णिमा के अवसर पर सनातन संस्था का हिंदी भाषा में ‘परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले जी की गुरु से हुई भेंट एवं उनका गुरु से सीखना’ तथा अंग्रेजी भाषा में ‘परात्पर गुरु डॉ. आठवलेज् स्पिरिच्युअल वर्कशॉप्स इन 1992’, ‘सीकर्स रिवील यूनिक फेसेटस् ऑफ परात्पर गुरु डॉ. आठवले’, ‘एफर्टस् एट द स्पिरिच्युअल लेवल फॉर रिमूवल ऑफ पर्सनॅलिटी डिफेक्टस्’ और ‘हाऊ टू प्रोग्रेस फास्टर स्पिरिच्युअली थ्रू सत्सेवा ?’ इन ग्रंथो का विमोचन किया गया ।
9 भाषाओं में ‘ऑनलाइन गुरुपूर्णिमा महोत्सव’ : इस वर्ष सनातन संस्था द्वारा मराठी, हिन्दी, अंग्रेजी, कन्नड, तमिल, तेलगु, गुजराती, बंगाली, उडिया आदि 9 भाषाओं में ऑनलाइन के माध्यम से गुरुपूर्णिमा महोत्सव संपन्न हुआ । इस माध्यम से देश विदेश के हजाराें श्रद्धालुओं ने ‘गुरुपूर्णिमा महोत्सवों’ का लाभ उठाया । ऑनलाइन गुरुपूर्णिमा उत्सव में सनातन संस्था के संस्थापक परात्पर गुरु डॉ. आठवले की एक आध्यात्मिक उत्तराधिकारी श्रीसत्शक्ति बिंदा सिंगबाळजी ने ‘इम्पोर्टेन्स ऑफ गुरु’ इस ई-बुक का लोकार्पण किया।


