भारत भोगवाद नहीं, त्याग और मूल्यों की भूमि है- इंद्रेश कुमार
नई दिल्ली। “पंच प्रण” पर आधारित तीन दिवसीय आयोजन “दीपोत्सव- पंच प्रण” का भव्य समापन श्रीराम कला केंद्र द्वारा ऐतिहासिक रामलीला के मंचन के साथ 22 अक्टूबर, शनिवार को हो गया। तीसरे दिन कार्यक्रम की शुरुआत अपराह्न चार बजे “एकता और एकात्मता” विषय पर विचारोत्तेजक व्याख्यान के साथ हुई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य श्री इंद्रेश कुमार इस सत्र के मुख्य अतिथि और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख श्री सुनील अंबेकर विशिष्ट अतिथि थे। इस सत्र की अध्यक्षता प्रख्यात नृत्यांगना और सांस्कृतिक विदुषी पद्मविभूषण श्रीमती सोनल मानसिंह ने की।

इंद्रेश कुमार ने इस अवसर पर कहा कि भारत तीर्थों, त्योहारों और मेलों का देश है। उन्होंने यह भी कहा कि हम अपना धर्म बदल सकते हैं, लेकिन पूर्वज नहीं बदल सकते। भले ही हमारा देश बंट गया, लेकिन पाकिस्तान और बांग्लादेश के लोग भी भारतीय हैं, हिन्दुस्तानी हैं, इंडियन हैं, चाहे वे अपने को जिस नाम से पुकारें। उन्होंने कहा, “भारत ने विश्व को जो रास्ता दिखाया, जिसके कारण हम विश्वगुरु कहलाए, जिसके कारण हम महान हुए, वह यह है कि भोग में सम्मान हो सकता है, पूजा नहीं हो सकती। त्याग में और मूल्यों में पूजा होती है। और भारत भोगवाद की दुनिया नहीं है, समाज नहीं है।” उन्होंने कहा कि अपने मूल्यों के बल पर कल हमें दुनिया का नेतृत्व करना है। उन्होंने यह भी कहा कि दूसरों को काफिर कहने वाला इनसान नहीं हो सकता और वह धर्म, धर्म नहीं हो सकता।
सुनील अंबेकर ने सभी को दीपोत्सव की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हमारे पर्व और त्योहार हमें एक और एकात्म रखने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा, “भारत हजारों वर्षों से जबरदस्ती से एक नहीं रहा है। राजाओं के कारण एक नहीं रहा है। संप्रदाय या धर्म का कोई ऐसा बंधन नहीं रहा है कि जिसके कारण आपको ऐसा ही करना पड़े, ऐसा भारत में कभी कुछ नहीं रहा है। लेकिन ऐसा नहीं रहते हुए भी हम एक हैं, सहज रूप से एक हैं। और आने वाले समय में भी हम अपनी एकात्मता को मजबूत करना चाहते हैं, तो हम लोगों को उन उपायों की तरफ ही ध्यान देना होगा।”
इस तीन दिवसीय आयोजन के समापन सत्र में शाम में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में आगंतुक संगीत, कविता और रामलीला के रस में सराबोर हो गए। प्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका सुश्री सुचरिता गुप्ता ने अपने भावपूर्ण गायन से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया, तो कुंवर जावेद ने कविता पाठ से आनंदित कर दिया। अंत में श्रीराम कला केंद्र की ऐतिहासिक रामलीला का दिव्य आस्वाद दर्शकों ने लिया।
हिन्दुस्थान समाचार और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र द्वारा 20 से 22 अक्तूबर तक आयोजित इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में देश के कई प्रसिद्ध विचारकों ने प्रधानमंत्री द्वारा उद्घोषित “पंच प्रण” पर आधारित पांच विषयों पर अपने विचार रखे और देश के सुप्रसिद्ध कलाकारों ने अपने गायन, नृत्य और वादन की बहुरंगी छटा बिखेरी।


