भूखंड आवंटन में बंद हो बिचैलियों का दखल - सुरेंद्र सिह नाहटा

भूखंड आवंटन में बंद हो बिचैलियों का दखल - सुरेंद्र सिह नाहटा

नोएडा। प्राधिकरणों में बिचैलियों और फाइनेंसरों का बोलबाला है। भूखंड आवंटन में इनका दखल बंद करने की मांग एमएसएमई इंडस्ट्रियल एसोसिएशन ने उठाई है। आवंटन में भारी अनियमितताओं पर उठ रहे सवालों के बीच संस्था ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल नंदी को पत्र लिखकर ड्रॅा के जरिये पूरी पारदर्शिता के साथ औद्योगिक भूखंडों का आवंटन करने की मांग उठाई है। संस्था ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग भी की है।

एमएसएमई इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह नाहटा का कहना है कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण में ई-नीलामी से औद्योगिक भूखंडों के आवंटन की व्यवस्था को बंद कर साक्षात्कार की व्यवस्था को लागू किया गया था। इसके बाद भी औद्योगिक भूखंडों के आवंटन में गड़बड़ी की शिकायतें नहीं रुकी हैं। मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार स्वयं प्रदेश के औद्योगिक विकास मंत्री ने ही औद्योगिक भूखंडों के आवंटन की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। साथ ही, साक्षात्कार के माध्यम से हाल में आवंटित भूखंडों की रिपोर्ट तलब की है। संस्था की तरफ से लगातार औद्योगिक भूखंडों के आवंटन में प्रॉपर्टी डीलरों और फाइनेंसरों के दखल की शिकायत की जाती रही है। 

ई-नीलामी की व्यवस्था खत्म कर साक्षात्कार से आवंटन की व्यवस्था लागू होने पर उम्मीद थी कि जरूरतमंद उद्यमियों को योजनाओं लाभ मिलेगा, परंतु साक्षात्कार में भी अनियमितताएं बरती जा रही है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में उद्योग लगाकर प्रदेश की आर्थिक तरक्की में जो उद्यमी योगदान देना चाहते हैं, उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था। डेवलपर, फाइनेंसर और प्रॉपर्टी डीलरों का दखल कम होने की बजाय बढ़ता जा रहा है। प्राधिकरणों से भूखंडों का आवंटन कराने के बाद आवंटी मुनाफा कमाने के लिए भूखंडों को महंगे दामों पर बेचते हैं। ऐसे आवंटियों की उद्योग लगाने में किसी तरह की दिलचस्पी नहीं होती है। 

उद्योगों का विकास तब ही संभव है जब सही मायने में असल उद्यमियों को पारदर्शी तरीके से भूखंड और सुविधाएं मिलेंगी। ई-नीलामी और साक्षात्कार के जरिये भूखंड आवंटन में बरती गई अनियमितता की उच्च स्तरीय जांच कराई जानी चाहिए। प्रॉपर्टी डीलर, फाइनेंसरों और बिचैलियों पर अंकुश लगाते हुए ड्रॉ के माध्यम से पारदर्शी तरीके से भूखंड आवंटन शुरुआत करनी चाहिए।