आत्मनिर्भर भारत के लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार में सहायक जोखिम पर हुआ व्याख्यान का आयोजन

आत्मनिर्भर भारत के लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार में सहायक जोखिम पर हुआ व्याख्यान का आयोजन

देश को आत्मनिर्भर बनाने कीे दिशा में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार में जोखिम लेना आवश्यक है इसी जोखिम के महत्व को बताने हेतु एमिटी सांइस टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन फांउडेशन द्वारा व्याख्यान सत्र का आयोजन किया। इस व्याख्यान सत्र में लखनऊ के जैव चिकित्सा अनुसंधान केन्द्र के निदेशक प्रो आलोक धवन द्वारा ‘‘आत्मनिर्भर भारत के लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार में सहायक जोखिम’’ पर छात्रों, शोधार्थियों और वैज्ञानिकों को जानकारी प्रदान की गई। इस अवसर पर एमिटी शिक्षण समूह के संस्थापक अध्यक्ष डा अशोक कुमार चौहान और एमिटी सांइस टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन फांउडेशन के अध्यक्ष डा डब्लू सेल्वामूर्ती ने प्रो धवन का स्वागत किया।

व्याख्यान सत्र में लखनऊ के जैव चिकित्सा अनुसंधान केन्द्र के निदेशक प्रो आलोक धवन ने संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी अनुसंधान व नवाचार की सफलता में नेतृत्व द्वारा जोखिम को सहायता प्रदान करना एक बेहद महत्वपूर्ण भाग है। कम लागत और अधिक परिणाम वर्तमान समय मे शोध के लिए जरूरी है इसके अतिरिक्त अनुसंधान कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्रों की भागीदारी सुनिश्चित करनी है। हम सभी शोध के जरीए राष्ट्र निर्माण में सहायक बन रहे है। अनुसंधान के मुख्य तीन तत्व है प्रथम व्यवहार्यता जिसमें इंजिनियरिंग एंव विज्ञान की भूमिका महत्वपूर्ण है द्वितीय इच्छा जो मानसिकता, कला और मानवता पर आधारित है और तृतीय जीवन क्षमता जिसमें व्यापार एवं अर्थशास्त्र शामिल है इन तीनों का जोड़ ही नवाचार को जन्म देता है। प्रो धवन ने कहा कि जब कोई भी आपके जोखिम को सहयोग करता है तो सफल होने पर दोनो विजेता बनते है। अनुसंधान के दौरान जो भी ज्ञान प्राप्त हो उसका उसी वक्त लिखित प्रमाण रखे, हो सकता है वह भविष्य के शोध में सहायक बनें। विज्ञान में सहायक जोखिम और एक केद्रित दृष्टिकोण लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करता है। शतप्रतिशत अवलोकन में गंभीरता, शतप्रतिशत प्रेरणा और शतप्रतिशत नवाचार ही विज्ञान का मुख्य भाग है। जब भी शोध व नवाचार प्रारंभ करें तो पर्यावरण के संर्दभ में अवश्यक विचार करें। उन्होनें एमिटी वैज्ञानिकों द्वारा शोध के क्षेत्र में किये जा रहे कार्यो की सरहाना भी की।

एमिटी शिक्षण समूह के संस्थापक अध्यक्ष डा. अशोक कुमार चौहान ने संबोधित करते हुए कहा कि एमिटी मे ंहम छात्रों, शोधार्थियों और वैज्ञानिकों को अनुसंधान व नवाचार में जोखिम लेने के लिए सहायता प्रदान करते है। किसी भी देश का विकास वहां होने वाले शोधों व उसके प्रभावों पर आधारित होता है और देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में संस्थानों एमिटी पूर्ण सहयोग कर रहा है। प्रो धवन के विचारों और शोध कार्यो ने हम सभी को प्रभावित किया है और इससे युवा शोधार्थी नये शोध करने के प्रेरित भी होगें।

एमिटी सांइस टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन फांउडेशन के अध्यक्ष डा. डब्लू सेल्वामूर्ती ने कहा कि भारत हमेशा अत्याधुनिक विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार में आगे रहा है। सदियों से भारत ने कम खर्च और आसानी से उपलब्ध एवं आत्मसात होने वाली तकनीकों का विकास किया है जिसमें हमें सबसे टिकाउ और आत्मनिर्भर देशों में एक बना दिया है। विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार में जोखिम का समर्थन करने के लिए हाल में अपनाई गई नीतियां एक उदाहरण है कि कैसे यह मंत्र भविष्य के लिए नई विश्व व्यवस्था बना सकता है। एमिटी में हम छात्रों को शोध व नवाचार में जोखिम लेकर कुछ नया निर्माण करने या समस्याओं के निवारण हेतु प्रेरित करते है।

इस अवसर पर अतिथि प्रो आलोक धवन ने एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ बायोतकनीकी, एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ मॉलेक्यूलेर मेडिसिन एंड स्टेम सेल रिसर्च सहित अन्य प्रयोगशालाओं का दौरा किया। इस अवसर पर एमिटी फांउडेशन फॉर सांइस टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन एलांयस के डिप्टी डायरेक्टर जनरल डा ए के चक्रवर्ती, वरिष्ठ उपाध्यक्ष डा ए. के. सिंह, एमिटी डायरेक्टोरेट ऑफ साइंस एंड इनोवेशन के डिप्टी डायरेक्टर जनरल डा गोपाल भूषण उपस्थित थे।