राष्ट्रपति मुर्मु ने अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान के 8वें स्थापना दिवस समारोह की गरिमा बढ़ाई
दिल्ली: भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आयुष मंत्रालय के अंतर्गत अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) के 8वें स्थापना दिवस समारोह की गरिमा बढ़ाई और संस्थान के परिसर का दौरा भी किया। इस कार्यक्रम में दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना; केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव; आयुष सचिव वैद्य राजेश कोटेचा; एआईआईए निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) तनुजा नेसारी; आयुष मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और AIIA के वरिष्ठ संकाय सदस्य उपस्थित थे।

इस पावन अवसर पर राष्ट्रपति ने अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान, नई दिल्ली को सफलतापूर्वक 7 वर्ष पूरे करने पर बधाई दी। आयुष औषधि फार्मेसी कार्यक्रम का शुभारंभ और शाश्वत आयुष एक्सपो का अनावरण माननीय राष्ट्रपति द्वारा किया गया, जिससे स्थापना दिवस समारोह का उद्घाटन हुआ। इस फार्मेसी का उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण आयुर्वेदिक दवाओं को सभी के लिए सुलभ बनाना और आयुर्वेद के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा में सुधार करना है।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव द्वारा माननीय राष्ट्रपति का सम्मान किया गया, जिन्होंने संस्थान की पारंपरिक आयुर्वेदिक प्रथाओं को आधुनिक स्वास्थ्य देखभाल के साथ संयुक्त करने की प्रतिबद्धता की सराहना की। हाल के वर्षों में देशभर में सात नए स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र स्थापित किए गए हैं। एआईआईए ने 44 विशेष क्लीनिकों के माध्यम से 27 लाख से अधिक मरीजों का इलाज किया है, जो देशभर में उच्च गुणवत्ता वाली आयुर्वेदिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने की अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।
पिछले सात वर्षों में, AIIA ने पारंपरिक चिकित्सा के एकीकरण और प्रचार में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की हैं। कुल 73 राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिससे आयुर्वेद के क्षेत्र में AIIA की वैश्विक और घरेलू साझेदारियों को और मजबूत किया गया है।
इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा, “आयुर्वेद विश्व की सबसे प्राचीन समग्र चिकित्सा प्रणालियों में से एक है। यह मन, शरीर और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करने पर जोर देता है। आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रणाली हमारी धरोहर है और आयुष मंत्रालय इस धरोहर को एक प्रामाणिक चिकित्सा प्रणाली के रूप में स्थापित करने का कार्य कर रहा है। मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई कि 2014 में अपनी स्थापना के बाद से, आयुष मंत्रालय ने पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को मुख्यधारा में लाने के लिए लगातार प्रयास किए हैं। आयुष मंत्रालय ने शिक्षा, अनुसंधान, औषधियों की गुणवत्ता नियंत्रण, चिकित्सा और सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं।
अपनी स्थापना के मात्र 5 वर्षों में AIIA गोवा की स्थापना संस्थान की एक उल्लेखनीय उपलब्धि के रूप में हुई है, जो आज पारंपरिक चिकित्सा मूल्य यात्रा और चिकित्सा स्वास्थ्य पर्यटन का एक प्रमुख केंद्र बन रहा है।
आज इस संस्थान में किए जा रहे कार्य को देखकर मुझे विश्वास है कि हम सभी के संयुक्त प्रयासों से हम अपनी धरोहर जैसे आयुर्वेद को हमारी दादी-नानी के नुस्खों के साथ आगे बढ़ा सकते हैं और इसे प्रमाण आधारित एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण के माध्यम से वैश्विक स्तर पर मान्यता दिला सकते हैं। मुझे बताया गया है कि इस वर्ष के आयुर्वेद दिवस की थीम - "वैश्विक स्वास्थ्य के लिए आयुर्वेद नवाचार" है, जो समयानुकूल है और मुझे आशा है कि इसके माध्यम से आयुर्वेद जनता तक आसानी से पहुंच सकेगा। मैं आयुष मंत्रालय को इसके लिए शुभकामनाएं देती हूं।
दिल्ली के माननीय उपराज्यपाल श्री विनय कुमार सक्सेना ने कहा, “यदि हम पीछे मुड़कर देखें तो 2014 में अपनी स्थापना के बाद से, AIIA ने विश्वभर में स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों में नई उम्मीदें जगाई हैं। अब तक की यात्रा पर विचार करते हुए, मैं विशेष रूप से इस बात से प्रभावित हूं कि AIIA ने विभिन्न विशिष्टताओं के माध्यम से 28 लाख से अधिक लाभार्थियों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करके समुदाय के स्वास्थ्य पर जो प्रभाव डाला है।
केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रतापराव जाधव ने कहा, “हाल ही में माननीय प्रधानमंत्री ने घोषणा की है कि अगले पांच वर्षों में देश में 10 नए आयुर्वेद संस्थान खोले जाएंगे।
उन्होंने कहा, 'आज आयुष मंत्रालय के लिए एक ऐतिहासिक दिन है कि भारत के राष्ट्रपति ने हमारे संस्थान अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान का दौरा किया। आयुर्वेद एक बहुत प्राचीन चिकित्सा प्रणाली है और यह विश्व में बहुत तेजी से लोकप्रिय हो रही है। मंत्री ने कहा कि आयुष मंत्रालय ने ग्रामीण क्षेत्रों में प्रामाणिक और किफायती आयुर्वेदिक दवाएं उपलब्ध कराने के लिए 'आयुष औषधि केंद्र' की शुरुआत की है।
आयुष सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने अपने स्वागत भाषण में कहा, “आयुर्वेद के क्षेत्र में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) bjjjकी सफलता देश के स्वास्थ्य और कल्याण क्षेत्र में एक अमूल्य योगदान है और यह सभी के लिए एक मानक स्थापित करता है। AIIA केवल मरीजों के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में जागरूकता, अनुसंधान और सफलता के लिए भी कार्य करता है।
इसके अलावा, हमारे तेजी से बदलते जीवन में संतुलित जीवनशैली बनाए रखने और योग का अभ्यास करने का महत्व अत्यधिक है। आयुर्वेद, अपनी समृद्ध धरोहर और समग्र स्वास्थ्य दृष्टिकोण के साथ, शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक कल्याण प्राप्त करने के लिए अमूल्य अंतर्दृष्टि प्रदान करता है। पर्यावरणीय क्षरण की चुनौती के सामने, आयुर्वेद समग्र समाधान प्रदान करता है जो न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है बल्कि हमारे पर्यावरण की भलाई को भी सुनिश्चित करता है।”


