सैनफोर्ट भारत की पहली आईबी प्रीस्कूल चेन शुरू करने को तैयार

सैनफोर्ट भारत की पहली आईबी प्रीस्कूल चेन शुरू करने को तैयार

दिल्ली: अपने प्रगतिशील पाठ्यक्रम और वैश्विक शैक्षणिक मानकों के साथ प्रीस्कूल शिक्षा को नया आकार देते हुए, सैनफोर्ट ग्रुप ऑफ स्कूल्स (सैनफोर्ट) भारत में अपनी पहली प्रीस्कूल श्रृंखला स्थापित करने की योजना बना रहा है, जो अंतर्राष्ट्रीय बैकलॉरिएट (आईबी) प्राइमरी इयर्स प्रोग्राम (पीवाईपी) ढांचे को लागू करने की दिशा में काम कर रहा है। इस तरह का एक निर्णायक कदम सैनफोर्ट द्वारा इनोवेशन और लर्नर-सैंट्रिक दृष्टिकोण की विरासत के साथ प्रारंभिक शिक्षा में एक क्रांतिकारी बदलाव को चिह्नित करेगा।

सैनफोर्ट न केवल बच्चों को स्कूल के लिए तैयार कर रहा है, बल्कि यह उन्हें तेजी से विकसित हो रही दुनिया के लिए फ्यूचर-रेडी सिटीजन के रूप में परिवर्तित कर रहा है। सैनफोर्ट बुनियादी वर्षों से ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा प्रदान कर रहा है। यहां का पाठ्यक्रम खेल आधारित अन्वेषण और विकासात्मक माइलस्टोन का संयोजन है, जो बच्चों को स्वतंत्र रूप से सोचने के लिए प्रोत्साहित करता है।

डॉ. एस.के. राठौर, फाउंडर एवं चेयरमैन, सैनफोर्ट ने कहा, “प्रारंभिक वर्ष जीवनभर की शिक्षा की नींव स्थापित करते हैं। इसलिए सैनफोर्ट में हम ऐसा वातावरण तैयार कर रहे हैं, जहां शिक्षा आनंददायक, सार्थक और वैश्विक मानकों के अनुरूप हो। भारत की पहली आईबी प्रीस्कूल चेन लांच करते हुए, हम हर बच्चे की शिक्षा की यात्रा की शुरुआत एक विश्वस्तरीय अनुभव के साथ कराने का लक्ष्य रखते हैं। हमारा उद्देश्य आत्मविश्वासी, रचनात्मक और संवेदनशील लर्नर्स तैयार करना है, जो भविष्य के लिए पूरी तरह सुसज्जित हों।”

सैनफोर्ट में बच्चों को न केवल विषयों की गहराई से समझने बल्कि अपने परिवेश को जिज्ञासा और आत्मविश्वास के साथ देखने-परखने के लिए भी तैयार किया जा रहा है। कुल मिलाकर, सैनफोर्ट भावनात्मक, बौद्धिक, सामाजिक और शारीरिक--सभी मापदंडों पर समग्र विकास को बढ़ावा देता है। दूरदर्शी शिक्षा विशेषज्ञों डॉ. एस.के. राठौर और श्रीमती कविता राठौर द्वारा स्थापित सैनफोर्ट ने अपनी यात्रा एक प्रीस्कूल से शुरू की थी और आज यह देशभर में प्रारंभिक शिक्षा का एक भरोसेमंद नाम बन चुका है।

सैनफोर्ट ने हमेशा नवीन शिक्षण विधियों और मजबूत नैतिक मूल्यों के समावेश से अपनी एक खास पहचान बनाई है। इनोवेशन, समावेशिता और वैश्विक दृष्टिकोण सैनफोर्ट की पहचान हैं। इसका लर्नर-सेंट्रिक पाठ्यक्रम बच्चों में जिज्ञासा, आत्मनिर्भरता और समग्र विकास को बढ़ावा देता है।

सैनफोर्ट प्रीस्कूल इंडस्ट्री में कई क्रांतिकारी बदलाव लाने के लिए जाना जाता है। यह भारत का पहला प्रीस्कूल था, जिसने ‘टच ऐंड लर्न’ तकनीक पेश की, जिससे शिक्षा बच्चों के लिए और अधिक इंटरैक्टिव व मज़ेदार हो गई। साथ ही, यह भारत का पहला प्रीस्कूल है जिसने एआर (ऑगमेंटेड रियलिटी) आधारित पाठ्यक्रम शुरू किया और प्रारंभिक शिक्षा एवं अन्वेषण का एक नया आयाम जोड़ा।

सैनफोर्ट का स्व-निर्मित ‘कोर वैल्यू सर्कल’ मॉडल छह महत्वपूर्ण विकास स्तंभों पर केंद्रित है — सेंसरी रिफाइनमेंट, मोटर स्किल्स, क्रिएटिविटी, सोशल-इमोशनल ग्रोथ, पर्सनैलिटी डेवलपमेंट और एसेंशियल लाइफ स्किल्स। सैनफोर्ट सभी बच्चों के विकास के लिए एक सुरक्षित और आकर्षक वातावरण प्रदान करता है, जिसमें बच्चों के अनुकूल सुविधाएं, योग्य शिक्षक और सावधानीपूर्वक नियोजित गतिविधियां शामिल हैं।
परिणामस्वरूप, सैनफोर्ट भारत भर में हजारों अभिभावकों के लिए पसंदीदा विकल्प के रूप में उभरा है, जो केवल पारंपरिक स्कूलिंग से संतुष्ट नहीं, बल्कि एक स्नेहशील, प्रगतिशील और वैश्विक दृष्टिकोण वाली प्रीस्कूल शिक्षा चाहते हैं। निरंतर पाठ्यक्रम अपग्रेडेशन और मजबूत शिक्षक विकास कार्यक्रमों के माध्यम से सैनफोर्ट ने 21वीं सदी के बच्चों के लिए एक आधुनिक और सक्रिय लर्निंग इकोसिस्टम तैयार किया है।
 
तीन देशों में 250 से ज़्यादा स्कूलों, 90 से ज़्यादा प्रतिष्ठित पुरस्कारों और एक विशाल पूर्व छात्र नेटवर्क के साथ, सैनफ़ोर्ट की 16+  वर्षों की यात्रा भारत में प्रीस्कूल शिक्षा में क्रांति लाने की प्रतिबद्धता का एक मज़बूत प्रतिबिंब है। इसी नींव पर निर्माण करते हुए, सैनफ़ोर्ट प्रारंभिक शिक्षा में वैश्विक बेस्ट प्रैक्टिसेज को और मजबूत के उद्देश्य से अब अपनी प्रीस्कूल श्रृंखला में आईबीपीवाईपी फ्रेमवर्क को लागू करने की योजना बना रहा है।