राष्ट्र की समृद्धि व मानव कल्याण के लिए 'श्री विष्णु महायज्ञ' शुरू

राष्ट्र की समृद्धि व मानव कल्याण के लिए 'श्री विष्णु महायज्ञ' शुरू

नोएडा: नोएडा के सेक्टर 110 स्थित रामलीला मैदान, महर्षि आश्रम में ब्रह्मलीन परम पूज्य महर्षि महेश योगी जी की दिव्य प्रेरणा से राष्ट्र की समृद्धि, शांति और विकास के लिए 'श्री विष्णु महायज्ञ' का शुभारंभ हुआ। इस पावन और पवित्र कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि इंदरप्रीत सिंह, जिला जज और सुरेन्द्र नगर (राज्यसभा संसद) के कर-कमलों द्वारा किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथियों का स्वागत श्रीमति हीमा श्रीवास्तव द्वारा किया गया। इस अवसर सुबह 9 बजे से पुरोहित पं. सतीश भट्ट और उनकी टीम के द्वारा किया वैदिक मंत्रोच्चार द्वारा किया गया। इस अवसर पर श्रीमती मोना पनवार, एडीजे, श्वेता वर्मा, एडीजे, छवि सक्सेना, एडीजे, रवीन्द्र गुप्ता, एडीजे,  रणविजय सिंह, एडीजे, ज्योत्सना सिवाच, एडीजे, राहुल भारद्वाज,  पंकज शर्मा भी उपस्थित थे। मानव कल्याण के लिए 'श्री विष्णु महायज्ञ' आयोजन 16 नवंबर तक चलेगा। इस कार्यक्रम में सुबह 9 बजे से 12 बजे तक 'श्री विष्णु महायज्ञ' का कार्यक्रम और सांय चार बजे से आठ बजे तक श्री मद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का भव्य आयोजन किया।

महर्षि आश्रम, महर्षि नगर, नोएडा के रामलीला मैदान में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के प्रथम दिवस में परम पूज्य संत श्री चिन्मयानंद बापू जी ने कहा श्रीमद् भागवत कथा ही एकमात्र ऐसी कथा है इसके अंदर जीवित व्यक्ति के साथ साथ मरे हुए व्यक्ति को भी मुक्त करने का सामर्थ्य है; कोई भी व्यक्ति कितना भी पाप किया हो, जीवन भर कितनी भी गलत कार्यों में लिप्त रहा हो, ऐसे व्यक्ति के मृत्यु के पश्चात यदि उसके नाम से श्रीमद् भागवत कथा    करने से मुक्ति मिल जाती है। श्री बापू जी ने कहा की भागवत कथा के अंदर गोकर्ण धुंधकारी संवाद में हमें यही बताया गया कि जीवन भर धुंधकारी ने पाप किया और बाद में गोकर्ण ऋषि ने उनके नाम से श्रीमद् भागवत कथा का गान किया और वह मुक्त हुए। बापूजी ने कहा कि जहां पर भागवत कथा होती है वहां पर उस समय में सारे तीर्थ सारी नदियां सारे देवता विचरण करते हैं। श्रीमद् भागवत कथा कल्पतरू की तरह है जिसकी शरण में बैठने पर हमारी सारी मनोकामनाएं भागवत कथा पूर्ण करती है बापूजी ने कहा कि भागवत कथा में जो व्यक्ति जिस मनसा के साथ बैठता है उसकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं लेकिन व्यक्ति की भावना पवित्र हो और संसार के मंगल की कामना उसके मन में हो ऐसे व्यक्ति की मनोकामना श्रीमद भागवत कथा से पूर्ण होती है।