शहर की समस्याओं को लेकर कोनरवा का प्रतिनिधिमंडल जिला प्रभारी मंत्री से मिला, सौंपा ज्ञापन
नोएडा। सेक्टर छह स्थित इंदिरा गांधी कला केंद्र में शहर की प्रमुख समस्याओं को लेकर पी. एस. जैन की अध्यक्षता में कोनरवा नोएड़ा चैपटर का एक प्रतिनिधि मंडल उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री कुवर ब्रजेश सिंह, प्रभारी जिला गौतमबुध नगर, एवमं् एमऔएस पीडब्लूडी से मिला। शहर की मुख्य पॉच समस्याओ पर दिर्घ कालीन योजना बनाकर कार्य करने के लिए ज्ञापन दिया।
राज्य मंत्री कुवर ब्रजेश सिंह द्वारा ध्यानपूर्वक सुना गया तथा सभी बिन्दुओ पर प्रशासन से वार्त करने एवम् आवश्यकतानुसार मुख्यमंत्री कार्यालय से कार्यवाही कराने का आश्वासन दिया। प्रतिनिधि मंडल में वी0वी0 बलेचा, श्रीमत्ती किरण भारद्वाज, लोकेश कश्यप, हर्ष चर्तुवेदी, श्रीमत्ती शुषमिता चक्रवर्ती शामील रहे।
ज्ञापन में मुख्य बिन्दु - शुद्ध पेयजल व्यवस्था के समबंध में
नौएड़ा को स्थापित हुऐ 46 वर्षो से अधिक होने के बाद भी नौएड़ा प्राधिकरण पीने योग्य पानी की आपूर्ति करने में पुर्णतः सफल नहीं रहा है यदपि माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा लगभग ढाई दशकों/25 वर्ष पूर्व शतः प्रतिशत ट्रिटिड़ शुद्ध पेयजल आपूर्ति के निर्देश दिये गये थे परन्तु प्राधिकरण द्वारा इस सम्बंध में कोई ठोस कार्यवाही नही की गई है। प्राधिकरण के पास पर्याप्त संसाधन होने के उपरान्त भी ठोस कार्यवाही न करना प्राधिकरण की इस ओर ध्यान नही दिया जा रहा है। जहॉ तक पॅूजी (धन राशी) का प्रश्न है वह प्राधिकरण के पास पर्याप्त है क्योकि प्राधिकरण के द्वारा योजनाओ पर कई कई सो करोड़ रूपये खर्च किय जाता है तथा दूसरे अन्य विभागो को कई हजार करोड़ रूपये उधार दिए जाते रहे है तथा अन्य बाहरी योजनाओ में भी हजारां करोड़ रूपये इनवेस्ट कर रखे है।
पानी की मात्रा को बढ़ाने के लिए
पानी की उपल्बधता बढ़ाने के लिए रेनीवेल व टयूबवेल के पाईप में नीचे लगे फिल्टरो पर लगी फिल्टर जाली की सफाई कर फिल्टर के ऊपर जाली बदल दी जाऐ जिससे रेनीवेल व टयूबवेल से पानी की उपल्बधता अधिक होगी जिससे गंगा वाटर की स्पलाई न होने पर वहॉं से अधिक पानी लिया जा सकेगा तथा रिजर्व टैंक भर कर टंकी के माध्यम से स्पलाई सुनिश्चित की जा सकेगी। इसकी भी कोई निश्चित योजना नही बनाई गई है। जिससे कारण व शिघ्र खराब हो जाते है।
भूगर्भ से जल की उपल्बधता के समबंध में (वाटर की हार्वेस्टिंग). संस्था द्वारा काफी समय से यह मांग की जा रही है। कि भूमि का जल स्तर दिन प्रति दिन कम हो रहा है। जिसके लिए वाटर की हार्वेस्टिंग की दूरगामी योजना बना कर सुचारू व क्रियान्वित करवाई जानी चाहिए। जिसके लिए संस्था का सुझाव है कि सर्वप्रथम सभी सरकारी प्रतिस्ठानों, प्रशांसनिक कार्यालयो, कारपोरेट औफिस, आई0टी0 औफिस, कम्युनिटि सेन्टर, मेरिज होम, सरकारी बंगले, कॉलेज, स्कूल, विश्वविद्यालय, हाउसिग सोसाईटिज, माल, पार्क, स्टेड़ियम, बस टर्मिनल, रेलवे स्टेशन, एयर पोर्ट आदि में क्षेत्रफल के अनुसार वाटर हार्वेस्टिंग कराये जाने चाहिए जिसको कराना सीधे तोर पर सरकारी व प्रशासनिक अधिकारीयों के हाथ में है। जिस से काफी वाटर हार्वेस्टिंग होगा।
शहर के बड़़े नालो की सफाई -
शहर के बड़े नालो की सफाई प्रत्येक वर्ष विल्म्भ से शुरू होती है तथा बरसात शुरू होने के उपरान्त भी 50 प्रतिशत कार्य शेष रह जाता है। जबकि ठेका पूरा कार्य को समय से करने के लिए दिया जाता है। बरसात के समय में की गई सफाई से जो कचरा निकाला जाता है। वह बरसात में पुनः नालो व नालियों में चला जाता है। इस प्रकार केवल धन की बरबादी होती है। इसके लिए दुरगामी योजना स्थाई रूप से बनाई जाऐ जिसमें नालो की मरम्मत अन्दर व बाहर से, नालो की बाउन्डरी वाल की मरम्मत, नालो के अन्दर ढलान व नालो के ऊपर से कुड़ा नालो में न गिरे इसके लिए योजना बनाई जानी चाहिए, जिससे प्रति वर्ष यह समस्या न खड़ी हो।
जल भराव के समबंध में -
शहर में प्रत्येक वर्ष अनेक सैक्टर जैसे 19 ,27 ,11,12,18,20,22,26,28,33,34,36,37,55,57,62,63,65,66,67,125 तथा अधिकाशतः अन्डर पास में प्रतिवर्ष जल भराव होता है। इसका एक कारण यह भी है कि सड़को का ढलान सही नही है तथा नालियॉ बंद पड़ी है। क्योकि नालियो पर अतिक्रमण किया हुआ है जिसके लिए कई सालो से प्राधिकरण को बताया जा रहा है। परन्तु इस और कोई ध्यान नही दिया जाता है। इस के चलते शहर की जनता को अनेको क्षेत्र में जल भराव का समाना करना पढ़ता है।


