इंडिफी की रिपोर्ट – भारत में महिला एन्‍टरप्रेन्‍योर्स उद्यमशील पारितंत्र को बढ़ावा दे रही हैं

महिलाओं द्वारा लिए गए 75% लोन टियर-1 शहरों के और 25% लोन टियर-2/3/4 शहरों के हैं – इंडिफी के अनुसार पोर्टफोलियो में यह जनसांख्यिकी लगभग 20% है

नई दिल्ली: भारत में महिलाओं ने उद्यमियों के रूप में एक लंबा सफ़र तय किया है और आज के लाभकारी कॉर्पोरेट समूह में कुछ सबसे शक्तिशाली पुरुषों की बराबरी में खड़ी हैं। विगत वर्षों में उनलोगों ने अनगिनत लैंगिक भेदभाव का मुकाबला किया है और घरेलू कामकाज की दहलीज को पार किया है। उन्होंने न केवल रोजगार प्राप्त किया है बल्कि रोजगार देने वाली भी बनी हैं। अब वे उद्यमिता के लिए कोई अजनबी नहीं रह गई हैं।

घर बैठे कारोबार संचालित करने से लेकर स्थापित कंपनियों में जिम्मेदारी निभाने तक महिलाएँ स्टार्टअप के साथ सफलता दर्ज करके या स्वतन्त्र सलाहकार बनने का सफ़र आरम्भ करके बाधाओं को ध्वस्त कर रही हैं। इस परिवर्तन के एक बड़े हिस्से का श्रेय फिनटेक स्टार्टअप्स को जाता है, जहाँ महिलाओं को विकास करने के समान अवसर उपलब्ध हैं और उन्हें रोजगार देने वाली के रूप में उभरने के लिए प्रोत्साहन प्राप्त होता है। ऐसा ही एक स्टार्टअप है इंडिफी टेक्नोलॉजीज। यह भारत का अग्रणी एमएसएमई लेंडिंग प्लैटफॉर्म है जो महिलाओं को वृद्धि करने या अपना कारोबार फैलाने के लिए उन्हें निर्बाध रूप से ॠण देकर उनकी उद्यमिता यात्रा की गति बढ़ाता है।

अपनी शुरुआत से, इंडिफी ने विभिन्न व्यवसायों को 38,000 से अधिक लोन का सफलतापूर्वक वितरण किया है जिनमें से लगभग 20% महिला प्रमोटर वाली कंपनियों को गया है। इनमें से 75% लोन टियर-1 शहरों की महिला उद्यमियों ने और बाकी 25% टियर-2/3/4 शहरों की महिलाओं ने लिया। मेट्रो और टियर-1 शहरों के महिला-संचालित व्यवसायों में वृद्धि हुई। यह मिश्रण बदल सकता है क्योंकि अन्य छोटे शहरों में महिला-संचालित कारोबारों की संख्या बढ़ रही है।

कंपनी ने यह भी देखा कि महिलाएं न केवल शानदार उद्यमी हैं, बल्कि उनका ऋण विवरण भी बेहतर है। आँकड़े बताते हैं कि पुरुष काओबारियों की तुलना में महिलाओं की कुल मासिक बिक्री लगभग 50% अधिक है और उनके सुदृढ़ ऋण विवरण के निर्माण में इसका महत्वपूर्ण योगदान है। इंडिफी के आँकड़ों के अनुसार लोन की तलाश कर रही अधिकाँश महिला उद्यमी ई-कॉमर्स और फ़ूड (रेस्त्राँ) सेक्टर्स से आती हैं और सकल ऋण वितरण में उनका अनुपात 45% है। इसके अलावा, फेसबुक के साथ अपने हालिया सम्बन्ध के हिस्से के रूप में इंडिफी महिलाओं के स्वामित्व वाले व्यवसायों को ब्याज दर में 0.02% के विशेष रियायत प्रदान करता है।

इंडिफी के सीईओ और को-फाउंडर, अलोक मित्तल ने कहा कि, “फिनटेक स्टार्टअप कंपनियों ने न केवल रोजगार के दृष्टिकोण से महिलाओं का मूल्य स्वीकार किया है, बल्कि उनकी ज़रूरतों और अपेक्षाओं को ध्याम में रखकर उत्पादों का निर्माण करते हुए उन्हें प्रोत्साहित भी किया है। इंडिफी का दृढ़ विश्वास है कि महिलाओं के सशक्तीकरण में इस प्रकार के अवसरों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है जिससे कि वे बड़े फैसले ले सकें और बेहतर विकल्प चुन सकें। इस तरह उनकी सफलता के उदाहरणों से अन्य महिलाओं को भी प्रेरणा मिलती है। साथ ही उनकी समान सहभागिता और सशक्तीकरण सुनिश्चित करते हुए फिनटेक कंपनियाँ पूरे देश में अल्पसेवा-प्राप्त समुदायों की सेवा करने और वित्तीय समावेशन को आगे बढ़ाने में महत्‍वपूर्ण कार्य कर रहा है। हमें आशा है कि हमारे देश की महिलाएँ साहस और शालीनता के साथ अपने जूनून का अनुसरण करेंगी और उद्यमिता की नई ऊंचाइयों तक पहुँचेंगी। हमें उनके प्रयासों में सहयोग करने पर बेहद गर्व है।”

एक अध्ययन के अनुसार अगले पांच वर्षों में भारत में महिलाओं के स्वामित्व वाले व्यवसायों के 90% तक बढ़ने का अनुमान है, जबकि यूएस और यूके में समान व्यवसायों की वृद्धि दर क्रमशः 50% और 24% तक रहने का अनुमान है। असल में अर्द्ध-शहरी और ग्रामीण भारत की लाल्ग्भाग 80% महिलाएँ उद्यमी बनने के बाद अपनी सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक हैसियत में भारी सुधार महसूस करती हैं। भारत में सरकार और इंडिफी जैसे निजी कंपनियाँ धन्यवाद की पात्र हैं जो मिल-जुलकर काम कर रही हैं और विविध पहलों के माध्यम से महिला सशक्तीकरण में महत्वपूर्ण योगदान कर रही हैं।