न्यूरोडीजेनेरेेटिव विकारों और चिकित्सा विज्ञान में प्रगति पर पांच दिवसीय कार्यक्रम का शुभारंभ

न्यूरोडीजेनेरेेटिव विकारों और चिकित्सा विज्ञान में प्रगति पर पांच दिवसीय कार्यक्रम का शुभारंभ

नोएडा।PNI News। न्येरोडीजेनेरेटिव विकारों से उत्पन्न रोगों के उपचार के क्षेत्र में हो रही प्रगति सहित शोध के संर्दभ में जानकारी प्रदान करने के लिए एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ न्यूरोसाइकोलॉजी और न्यूरोसांइसेस द्वारा इंटरनेशनल ब्रेन रिसर्च ऑरगनाइजेशन - एशिया पैसफिक रिजनल कमेटी के सहयोग से ‘‘न्यूरोडीजेनेरेेटिव विकारों और चिकित्सा विज्ञान में प्रगति” विषय पर पांच दिवसीय अंर्तराष्ट्रीय कार्यक्रम का शुभांरभ किया गया। इस कार्यक्रम का शुभारंभ इडियन एकेडमी ऑफ न्यूरोसाइसेंस के अध्यक्ष प्रो इशान कुमार पात्रो, इंटरनेशनल ब्रेन रिसर्च ऑरगनाइजेशन के प्रतिनिधि और एनएएसआई वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो प्रहलाद किशोर सेठ, एमिटी शिक्षण समूह के संस्थापक अध्यक्ष डा अशोक कुमार चौहान, मलेशिया की इंटरनेशनल ब्रेन रिसर्च ऑरगनाइजेशन - एशिया पैसफिक रिजनल कमेटी चेयर प्रो पाइके सी चीह, एमिटी सांइस टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन फांउडेशन के अध्यक्ष डा डब्लू सेल्वामूर्ती द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम मंे एनआईएमएचएनएस, एबीआरसी, आईआईएससीआर, एनआईपीईआर, बीएचयू, एनसीबीएस आदि से न्यूरोसांइटिस्ट विभिन्न देश यूएसए, जर्मनी, मलेशिया, नेपाल आदि विद्वान, विशेषज्ञ, वैज्ञानिक सहित एशिया पैसफिक रिजन से 20 शोधार्थि छात्र हिस्सा ले रहे है।

इडियन एकेडमी ऑफ न्यूरोसाइसेंस के अध्यक्ष प्रो इशान कुमार पात्रो ने ‘‘21वी सदी में न्यूरोसांइस शिक्षा’’ पर एमिटी को न्यूरोसांइसेस मे ंबीएससी और एमएससी प्रारंभ करने के ििलए बधाई देते हुए कि भारत छात्रों की अलग श्रेणी बनायेगा जो मस्तिष्क को समझने के लिए मस्तिष्क समर्पित करेगेे। वर्तमान समय में न्यूरोसांइस शिक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रासंगिक है। न्यूरोसांइस के जरीए हम मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को समझना चाहते है और अभी तक हमारी जानकारी समुद्र में से एक बूंद के बराबर है। न्यूरोसांइसेस में गंभीर और एकीकृत विचार को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। न्यूरोसांइसेस, तंत्रिका प्रणाली को नतीजों का विश्लेषण करने में सहायक होता है। हमें छात्रों में गंभीर कौशल, संचार कौशल विशेषकर लिखने और बोलने को विकसित करना होगा इसके प्राप्त सूचनाओं का कंपोटेशन विश्लेषण और प्रयोगिक डिजाइन में क्षमता पूर्ण विकास करना होगा। छात्रों को समझाना होगा कि उन्हे क्या उपलब्धि हासिल करनी है और यह भी बताना होगा कि मेडिकल बायोलॉजिस्ट मानव स्वास्थय के क्षेत्र में कितने अह्म है। प्रो पात्रों ने कहा कि छात्रों को न्यूरोसांइसेस के ़क्षेत्र में हो रही प्रगति से अवगत करायें और छोटे छोटे प्रयोगों को करने के लिए प्रेरित करें। उन्होनें शिक्षक से शिक्षक की बातचीत, मेंटर छात्र प्रोग्राम, अन्य पाठयक्रमो के लिए न्यूरोसांइस वैकल्पिक विषय बनाने पर अपने विचार रखे। न्यूरोसांइस एक बड़ी चुनौती है और मस्तिष्क को समझने की इस चुनौती को स्वीकार करें।

मलेशिया की इंटरनेशनल ब्रेन रिसर्च ऑरगनाइजेशन - एशिया पैसफिक रिजनल कमेटी चेयर प्रो पाइके सी चीह ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह मंच न्यूरोसांइसेस के क्षेत्र में काम करने वाले संगठन के बीच अनुसंधान के अधिक अवसर प्रदान करेगा। इस कार्यक्रम का उददेश्य एशिया प्रशांत क्षेत्र में तंत्रिका विज्ञान के क्षेत्र में शोधो का पता लगााने के लिए नए विचारों और प्रेरणा प्राप्त करना है। उन्होनें संस्थानो से वित्त पोषण, साझेदारी, शिक्षा प्रशिक्षण और अनुसंधान के अवसरों का पता लगाने के लिए समुदाय का निर्माण करने और विश्व स्तर पर काम करने का आह्वान किया।

एमिटी शिक्षण समूह के संस्थापक अध्यक्ष डा अशोक कुमार चौहान ने संबोधित करते हुए कहा कि इस कार्यक्रम में 20 चयनित छात्रों को तंत्रिका विज्ञान की बाधाओं का समझने में शामिल करने से ना केवल मानव जाति को मदद मिलेगी बल्कि क्षेत्र के विशेषज्ञों से छात्रों का मार्गदर्शन भी होगा। उन्होनें एमिटी विश्वविद्यालयों में न्यूरोसांइस सेंटर की स्थापना और छात्रों को शोध के लिए प्रोत्साहित करने हेतु 10 करोड़ के फंडिग की घोषणा की। आज पूरे विश्व में मानव अल्जाइमर, पार्कसन, चिंता, तनाव आदि से जुझ रहा है और हमारे छात्र उनकी मनोवैज्ञानिक एंव न्यूरोसांइसेस से जुड़ी समस्या का निवारण करेगे। आज का दिन हम सभी के अत्यंत महत्वपूर्ण दिन है और हम सब मिलकर एक दिन विश्व में अवश्य परिवर्तन लायेगें।

इंटरनेशनल ब्रेन रिसर्च ऑरगनाइजेशन के प्रतिनिधि और एनएएसआई वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो प्रहलाद किशोर सेठ ने कहा कि न्यूरोसाइंसेस समय की मांग है और यह पाठयक्रम क्षमता निर्माण करने में सहायक होगा। प्रो सेठ ने कहा कि न्यूरोसाइंसेस और उसके उपयोग को प्राचीन आयुर्वेद ज्ञान से पता लगाया जा सकता है। सुश्रुतः संहिता में सर्जिकल उपकरणों का ज्र्रिक मिलता है। न्यूरोलॉजिकल विकारों के उपचारों और प्रबंधनों के साक्ष्य प्राप्त हुए है। सुश्रुतः संहिता के अनुसार चार तरह के रोग होते है, दर्दनाक या बाहरी मूल, शारीरिक, मानसिक ओर प्राकृतिक है। सुश्रुत ने मस्तिष्क को विशेष चेतना को केन्द्रंिबदू बताया है।

इस कार्यक्रम में एमिटी सांइस टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन फांउडेशन के अध्यक्ष डा डब्लू सेल्वामूर्ती, एमिटी विश्वविद्यालय के हेल्थ एंड एलाइड सांइसेस के डीन डा भूदेव चंद्रा दास, एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ न्यूरोसाइकोलॉजी और न्यूरोसांइसेस ने अपने विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम का संचालन एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ न्यूरोसाइकोलॉजी और न्यूरोसांइसेस के एसोसिएट प्रोफेसर डा जितेंद्र कुमार सिन्हा द्वारा किया गया।

इस पांच दिवसीय कार्यक्रम के प्रथम दिन विभिन्न सत्रों का आयोजन किया गया जिसमें पंजाब विश्वविद्यालय के बायोकेमेस्ट्रर विभाग के प्रो रजत संधीर ने ‘‘ आलीव ऑयल कंपोनेंट हाईड्रोक्सीआयरोसॉल से पार्कीसन रोग से बचाव’’ पर, लखनउ के इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ टॉक्सीकोलॉजी रिसर्च के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डा आदित्य भूषण पंत ने ‘‘ स्टेम सेल एंड रिजेनरेटिव मेडिसिन ’’ पर अपने विचार रखे। इस अवसर पर कई अन्य विषयों पर विद्वानों ने अपने विचार व्यक्त किये।