एमिटी विश्वविद्यालय में ‘‘सरल मानक संस्कृत’’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन

एमिटी विश्वविद्यालय में ‘‘सरल मानक संस्कृत’’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन

अकादमिक और प्रशासनिक जनसंचार में संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए एमिटी विश्वविद्यालय के एमिटी संस्कृत एंव शोध संस्थान एंव भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के भारतीय भाषा समिति के सहयोग से ‘‘संरल मानक संस्कृत’’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का शुभारंभ नई दिल्ली के श्री लाल बहादुर शास़्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर प्रो मुरली मनोहर पाठक, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद के संस्कृत भाषा शिक्षक विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डा देवकी नंदन, एमिटी इंस्टीटयूट फॉर संस्कृत स्टडीज एंड रिसर्च की कार्यकारी प्रमुख डा महिमा गुप्ता, मथुरा के संस्कृती विश्वविद्यालय के अस्सीटेंट प्रोफेसर डा सुधिष्ठ कुमार मिश्रा द्वारा किया गया।

 कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए नई दिल्ली के श्री लाल बहादुर शास़्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर प्रो मुरली मनोहर पाठक ने कहा कि एमिटी विश्वविद्यालय के पवित्र वातावारण में भारतीय भाषा समिति के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला से प्रतिभागी निश्चित ही लांभावित होगें। संस्कृत भाषा आपके जीवनशैली में बदलाव लाकर आपके आचरण को शुद्ध बनाती है और आज केवल भारत ही बल्कि विश्व के कई देश के विद्ावन संस्कृत सीखना चाहते है। ंसंस्कृत एक जीवन पद्धती, इसके मुकाबले अन्य भाषा कठिन है किंतु संस्कृत का उपयोग निजी एंव व्यवहारिक जीवन में आपके अंदर गुणों को विकसित करता है। शिक्षा मंत्रालय, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद और एमिटी विश्वविद्यालय जैसे प्रख्यात संस्थान संस्कृत के महत्व का प्रचार प्रसार बढ़ाने में सहयोग प्रदान कर रहे है क्येाकी ये इसके महत्व को समझते है। भारतीय ज्ञान परंापरा संस्कृत निहित है जिसके सभी प्रकार के ज्ञानों का समावेश है। यह सरल मानक संस्कृतम कार्यशाला नये मानक स्थापित करेगा। विश्व एंव राष्ट्र कल्याण के लिए संस्कृत को आत्मसात करना आवश्यक है।

 एमिटी इंस्टीटयूट फॉर संस्कृत स्टडीज एंड रिसर्च की कार्यकारी प्रमुख डा महिमा गुप्ता ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि इस कार्यशाला का उददेश्य शिक्षण, अकादमिक और प्रशासनिक जनसंचार में साफ़, सटीक और मानक संस्कृत शब्दों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है। यह कार्यशाला प्रतिभागीयो को रोज़मर्रा और संस्थागत कामों में आसान लेकिन व्याकरण के हिसाब से सही संस्कृत का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करके पारंपरिक संस्कृत विद्वत्ता और आधुनिक भाषाई इस्तेमाल के मध्य स्थित रिक्त स्थान को भरने की कोशिश करती है।

मथुरा के संस्कृती विश्वविद्यालय के अस्सीटेंट प्रोफेसर डा सुधिष्ठ कुमार मिश्रा ने कहा कि वर्तमान में सभी विषय संस्कृत में निहित है। हमें सरल संस्कृत के प्रचार प्रसार पर विशेष ध्यान देना होगा। इस कार्यशाला में प्रतिभागीयों को संस्कृत के विद्वानों के विचारों को सुनने एंव चर्चा करने का अवसर प्राप्त होगा। कार्यशाला के जरीए संस्कृत को सिर्फ शास्त्रों तक सीमित न रखकर, सभी के लिए उपयोगी बनाना है। भारतीय ज्ञान प्रणाली को समझने और संस्कृत को आमजन की भाषा बनाने के लिए सबका सहयोग आवश्यक है।

इस कार्यशाला में 45से अधिक प्रतिभागीयों ने हिस्सा लिया जिसमें दिल्ली विश्वविद्यालय,श्री लाल बहादुर शास़्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय,संस्कृती विश्वविद्यालय मथुरा,अमृता विद्यालय,पंचशील बालक इंटर कॉलेज नोएडा,केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय,एमिटी विश्वविद्यालय आदि से प्रतिभागी शामिल थे। इस अवसर पर अतिथियों द्वारा ‘‘संरल मानक संस्कृत’’ विषय पर आधारित पुस्तक का विमोचन किया गया।

सत्र के अंर्तगत राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद के संस्कृत भाषा शिक्षक विभाग के अस्सीटेंट प्रोफेसर डा देवकी नंदन, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, के अस्सीटेंट प्रोफेसर डा जी सुर्या प्रसाद, जेएनयू के स्कूल ऑफ संस्कृत एंड इंडिक स्टडीज के प्रो कृष्णा मोहन पांडेय आदि ने अपने विचार रखे।